इस्माइलपुर बिंद टोली में कटाव रोकने की कवायद तेज, डीएम ने गंगा तटबंध निर्माण कार्य का लिया जायजा

भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत इस्माइलपुर बिंद टोली में गंगा नदी के बढ़ते कटाव को रोकने के लिए प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। आगामी बाढ़ सत्र को देखते हुए जिला प्रशासन किसी भी प्रकार की लापरवाही के मूड में नहीं है। इसी क्रम में मंगलवार को भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने इस्माइलपुर बिंद टोली पहुंचकर गंगा तट पर चल रहे तटबंध निर्माण और ऊंचीकरण कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्माण कार्य समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए।

गंगा के किनारे स्थित स्पर संख्या 7 और 8 के बीच लगभग 142 मीटर लंबाई में यह महत्वपूर्ण निर्माण कार्य चल रहा है। यह इलाका लंबे समय से कटाव की गंभीर समस्या से जूझता रहा है। हर वर्ष मानसून और बाढ़ के दौरान यहां नदी का दबाव बढ़ जाता है, जिससे तटबंध और आसपास के रिहायशी इलाकों पर खतरा मंडराने लगता है। प्रशासन का मानना है कि समय पर सुरक्षा कार्य पूरा होने से संभावित नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

निरीक्षण के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल नवगछिया के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार ने जिलाधिकारी को निर्माण कार्य की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 की बाढ़ के दौरान इस क्षेत्र में भारी कटाव हुआ था। तेज जलधारा के कारण तटबंध का एक हिस्सा कमजोर पड़ गया था, जिससे स्थानीय लोगों के बीच भय का माहौल बन गया था। कटाव की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने इस स्थान को संवेदनशील श्रेणी में रखा और तत्काल स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए।

अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना पर लगभग 33.5 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराया जा रहा है। विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद संविदा प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया गया। परियोजना का उद्देश्य केवल क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करना नहीं, बल्कि पूरे प्रभावित क्षेत्र को अधिक मजबूत सुरक्षा कवच देना है ताकि भविष्य में बाढ़ और कटाव का खतरा कम किया जा सके।

अब तक निर्माण कार्य का बड़ा हिस्सा पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि मिट्टी भराई का काम लगभग पूर्ण हो चुका है और तटबंध के ऊंचीकरण का प्रमुख कार्य भी पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा बोल्डर गैप रन का कार्य भी समाप्त हो चुका है। यह तकनीक नदी के बहाव से होने वाले दबाव को कम करने और मिट्टी के कटाव को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। इससे तटबंध की मजबूती बढ़ती है और जल प्रवाह का सीधा असर कम होता है।

फिलहाल परियोजना में केवल स्लोप निर्माण का कार्य शेष बचा है। अभियंताओं ने जानकारी दी कि लगभग 2000 कैरेट के दायरे में स्लोप तैयार किया जाना है। यह कार्य तटबंध की स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे पानी के दबाव को संतुलित करने में मदद मिलती है। यदि स्लोप मजबूत होता है तो तटबंध लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और टूटान की संभावना काफी घट जाती है।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्माण एजेंसियों और अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी स्थिति में 15 जुलाई से पहले कार्य पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि मानसून और संभावित बाढ़ को देखते हुए समय पर निर्माण कार्य समाप्त होना अत्यंत आवश्यक है। यदि कार्य में अनावश्यक देरी हुई तो बाढ़ के दौरान जोखिम बढ़ सकता है, जिसका असर स्थानीय आबादी पर पड़ सकता है।

जिलाधिकारी ने गुणवत्ता को लेकर भी विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल समय पर कार्य पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता भी सर्वोच्च स्तर की होनी चाहिए। उपयोग में लाई जा रही सामग्री, तकनीकी मानकों और सुरक्षा उपायों की लगातार निगरानी करने को कहा गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस्माइलपुर बिंद टोली क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से कटाव की समस्या झेलते आए हैं। कई बार गंगा के बढ़ते दबाव ने कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया है, जबकि कुछ स्थानों पर बस्तियों तक खतरा पहुंच गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर मानसून के दौरान उनके सामने घर, खेत और आजीविका बचाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। ऐसे में तटबंध निर्माण कार्य से उन्हें राहत और सुरक्षा की उम्मीद जगी है।

विशेषज्ञों के अनुसार गंगा किनारे बसे क्षेत्रों में कटाव एक गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौती बन चुका है। नदी का प्राकृतिक बहाव बदलने, तेज धारा और लगातार जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण कई इलाकों में भूमि क्षरण तेज हो गया है। ऐसे क्षेत्रों में मजबूत तटबंध और वैज्ञानिक सुरक्षा संरचनाएं ही स्थायी समाधान मानी जाती हैं।

प्रशासन इस बार बाढ़ पूर्व तैयारी को लेकर विशेष सतर्क नजर आ रहा है। केवल तटबंध निर्माण ही नहीं, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी, आपदा प्रबंधन टीम की तैयारी और राहत व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ सत्र शुरू होने से पहले सभी संवेदनशील बिंदुओं का निरीक्षण कर सुरक्षा उपायों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान नवगछिया अनुमंडल पदाधिकारी, अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन भागलपुर, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता और अन्य संबंधित पदाधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मौके पर विभिन्न तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की और निर्माण कार्य की प्रगति पर चर्चा की।

भागलपुर जिला प्रशासन का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि इस वर्ष बाढ़ और कटाव से होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस्माइलपुर बिंद टोली में चल रहा तटबंध निर्माण कार्य केवल एक परियोजना नहीं बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा अहम कदम है। यदि कार्य तय समय पर पूरा हो जाता है तो आगामी बाढ़ सत्र में इस क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है और कटाव के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

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