
बिहार में संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राज्य पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की विशेष टीम ने पटना जिले के कुख्यात और लंबे समय से वांछित अपराधी संजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। संजय सिंह बिहार के टॉप मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में शामिल था और उसे पांडव सेना नामक आपराधिक गिरोह का सरगना माना जाता है। उसकी गिरफ्तारी को बिहार पुलिस की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से वह कानून से बचता आ रहा था और कई गंभीर मामलों में वांछित था।
एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान संजय सिंह को पटना रेलवे स्टेशन से दबोचा गया। पुलिस को उसके मूवमेंट की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद विशेष रणनीति बनाकर टीम ने स्टेशन परिसर में निगरानी बढ़ाई। पर्याप्त पुष्टि होने के बाद एसटीएफ ने बिना किसी बड़ी झड़प के उसे हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा कारणों से उसे कड़ी निगरानी में रखा गया और आगे की पूछताछ शुरू कर दी गई है।
गिरफ्तार अपराधी संजय सिंह पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत निमा गांव का निवासी बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह वर्षों से बिहार सहित कई राज्यों में सक्रिय रहा है और उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, नरसंहार, अपहरण, अवैध हथियार, अवैध खनन और भू-माफिया गतिविधियों से जुड़े अनेक गंभीर मामले दर्ज हैं। उसकी आपराधिक गतिविधियों का दायरा केवल पटना तक सीमित नहीं था, बल्कि झारखंड और बिहार के अन्य जिलों तक फैला हुआ था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार संजय सिंह केवल एक साधारण अपराधी नहीं, बल्कि संगठित आपराधिक नेटवर्क संचालित करने वाला व्यक्ति था। वह अपने गिरोह के माध्यम से रंगदारी वसूली, जमीन कब्जाने, हथियारों की सप्लाई और विरोधियों को रास्ते से हटाने जैसी गतिविधियों में शामिल रहा। कई मामलों में उसका नाम सुपारी किलिंग और योजनाबद्ध हत्या के आरोपों में सामने आया है।
एसटीएफ ने बताया कि संजय सिंह बिहटा थाना कांड संख्या 672/25 में भी वांछित था। इस मामले में AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियार की बरामदगी हुई थी, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे हथियारों की उपलब्धता किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क या संगठित गिरोह की ओर संकेत करती है। इसी कारण संजय सिंह की तलाश तेज कर दी गई थी।
संजय सिंह का आपराधिक इतिहास लगभग तीन दशकों तक फैला हुआ है। उसके खिलाफ पहला गंभीर मामला वर्ष 1996 में मसौढ़ी थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था, जिसमें हत्या और आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं। इसके बाद लगातार उसके खिलाफ नए मामले दर्ज होते गए। वर्ष 1998, 2001 और 2002 में भी उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, हथियार रखने और रंगदारी जैसे कई मामले सामने आए।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार धनरुआ, पुनपुन, मसौढ़ी और बिहटा जैसे क्षेत्रों में उसका गहरा प्रभाव रहा। स्थानीय स्तर पर उसका नाम भय और दबदबे का पर्याय बन चुका था। कई मामलों में गवाहों और पीड़ितों पर दबाव बनाने की शिकायतें भी सामने आई थीं। यही कारण था कि उसके खिलाफ कार्रवाई आसान नहीं मानी जा रही थी।
उसके खिलाफ दर्ज मामलों में कई हाई-प्रोफाइल केस भी शामिल हैं। हजारीबाग, रांची, भागलपुर और सुल्तानगंज जैसे स्थानों पर भी उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं। भागलपुर टाउन थाना में दर्ज हत्या और हत्या के प्रयास का मामला, सुल्तानगंज थाना में अपहरण से जुड़ा केस तथा रांची में हथियार अधिनियम के तहत दर्ज मामला उसके व्यापक नेटवर्क की ओर संकेत करता है।
वर्ष 2017 और 2018 में भी संजय सिंह का आपराधिक नेटवर्क सक्रिय बना रहा। इस दौरान उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट, बिहार उत्पाद अधिनियम, रंगदारी, धमकी और महिलाओं से दुर्व्यवहार जैसी धाराओं में कई केस दर्ज हुए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह लगातार अपने गिरोह को पुनर्गठित कर रहा था और विभिन्न क्षेत्रों में अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा था।
2022 में उसके खिलाफ दर्ज मामलों ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया। पत्रकार नगर, जहानाबाद और मसौढ़ी में हत्या और आपराधिक साजिश से जुड़े कई गंभीर मामले सामने आए। इन मामलों में उसका नाम मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल बताया गया। जांच में यह भी सामने आया कि वह सीधे घटनास्थल पर मौजूद न होकर अपने नेटवर्क के जरिए वारदातों को अंजाम दिलवाता था।
एसटीएफ अधिकारियों का मानना है कि संजय सिंह की गिरफ्तारी से कई पुराने मामलों की जांच में नई जानकारी मिल सकती है। पूछताछ के दौरान उसके गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, हथियार सप्लायरों, वित्तीय नेटवर्क और राजनीतिक अथवा स्थानीय संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है। पुलिस अब उसके संपर्कों और कॉल रिकॉर्ड की भी गहराई से जांच कर रही है।
सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या संजय सिंह का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है या उसके गिरोह के अन्य सदस्य अलग-अलग नामों से आपराधिक गतिविधियां चला रहे हैं। पुलिस का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से बिहार में संगठित अपराध के एक बड़े नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है।
कानून व्यवस्था के लिहाज से यह गिरफ्तारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार पुलिस और एसटीएफ ने संगठित अपराध, हथियार तस्करी और गैंग ऑपरेशन पर लगातार कार्रवाई तेज की है। संजय सिंह जैसे कुख्यात अपराधी की गिरफ्तारी इसी अभियान की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।
फिलहाल संजय सिंह से गहन पूछताछ जारी है। पुलिस अन्य आपराधिक मामलों में उसकी भूमिका और संभावित सहयोगियों की तलाश कर रही है। अधिकारियों के अनुसार उसका विस्तृत आपराधिक रिकॉर्ड अभी भी खंगाला जा रहा है और संभावना है कि आने वाले दिनों में उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या और बढ़ सकती है। बिहार पुलिस का कहना है कि राज्य में अपराध और अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।


