राष्ट्रीय विद्युत सुरक्षा सप्ताह 2026 की शुरुआत, बिहार में शॉर्ट सर्किट से होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक को लेकर बड़ा अभियान

पटना में राष्ट्रीय विद्युत सुरक्षा सप्ताह 2026 की शुरुआत के साथ बिहार में विद्युत सुरक्षा को लेकर एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्युत शॉर्ट सर्किट से होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं को रोकना, सुरक्षित बिजली उपयोग को बढ़ावा देना और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कर्मियों के साथ आम नागरिकों को सुरक्षा मानकों के प्रति अधिक जागरूक बनाना है। “आज की जागरूकता, कल की सुरक्षा” थीम पर आयोजित यह कार्यक्रम राज्य में बढ़ते विद्युत उपभोग और विस्तृत हो रहे बिजली नेटवर्क के बीच सुरक्षा की अहमियत को रेखांकित करता है।

सोमवार को पटना स्थित विद्युत भवन-III के सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह में बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (बीएसपीएचसीएल) द्वारा इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन ऊर्जा विभाग के सचिव एवं कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने किया। समारोह में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जबकि राज्यभर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम से जुड़े।

कार्यक्रम के उद्घाटन संबोधन में ऊर्जा सचिव ने स्पष्ट कहा कि बिहार ने ऊर्जा क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 2 करोड़ 20 लाख तक पहुंच चुका है। वहीं, राज्य की पीक विद्युत मांग 9,000 मेगावाट का स्तर पार कर चुकी है। बिजली की बढ़ती मांग राज्य के विकास का संकेत है, लेकिन इसके साथ सुरक्षित संचालन की जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े विद्युत नेटवर्क के सफल और सुरक्षित संचालन के लिए केवल आधुनिक तकनीक ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानव स्तर पर अनुशासन और सुरक्षा मानकों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। अधिकारियों, अभियंताओं, तकनीशियनों और लाइनमैन को प्रत्येक कार्य से पहले मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का पालन करना चाहिए। किसी भी तकनीकी कार्य की शुरुआत से पहले उचित शटडाउन, आइसोलेशन, इंसुलेशन और अर्थिंग सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि दुर्घटनाओं की आशंका न्यूनतम हो सके।

ऊर्जा विभाग ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण यानी पीपीई के उपयोग को भी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। अधिकारियों ने कहा कि हेलमेट, इंसुलेटेड ग्लव्स, सेफ्टी बेल्ट, सुरक्षा जूते और अन्य उपकरणों का उपयोग केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जीवन रक्षा का अनिवार्य साधन है। कार्यस्थल पर छोटी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए सुरक्षा उपकरणों के बिना किसी भी कर्मचारी को जोखिम वाले कार्यों में शामिल नहीं होना चाहिए।

नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार ने कहा कि विद्युत क्षेत्र में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी की पहली जिम्मेदारी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एसओपी और पीपीई का अनुपालन कार्य संस्कृति का स्थायी हिस्सा बनना चाहिए। यदि सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए तो कार्यक्षमता बढ़ने के साथ दुर्घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

वहीं बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि किसी भी तकनीकी कार्य से पहले सुरक्षा की पुष्टि सबसे पहला कदम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं की रोकथाम केवल उपकरणों से नहीं, बल्कि सतर्क मानसिकता और अनुशासित कार्यशैली से संभव है। एक सुरक्षित विद्युत प्रणाली के निर्माण में प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका महत्वपूर्ण है।

साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सौरव जोरवाल ने आम नागरिकों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्युत सुरक्षा केवल विभाग या कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है। आम लोगों को भी घर, कार्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर बिजली का उपयोग करते समय आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए। खराब वायरिंग, ओवरलोडेड सॉकेट, खुले तार और घटिया गुणवत्ता के विद्युत उपकरण कई बार शॉर्ट सर्किट और आग लगने का बड़ा कारण बनते हैं।

बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विशाल राज ने कहा कि बिहार के ऊर्जा क्षेत्र ने तकनीकी और परिचालन स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क में सुधार के कारण राज्य की ऊर्जा क्षमता मजबूत हुई है। हालांकि इन उपलब्धियों को स्थायी बनाए रखने के लिए सुरक्षा मानकों का कठोर अनुपालन जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य विद्युत निरीक्षक अरविंद कुमार सहित कई विशेषज्ञों ने विस्तृत तकनीकी प्रस्तुति दी। इसमें विद्युत शॉर्ट सर्किट से होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों और उनसे बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि घरेलू स्तर पर भी विद्युत सुरक्षा की अनदेखी गंभीर हादसों का कारण बन सकती है।

कार्यक्रम में एल एंड टी, केपीटीएल, श्नाइडर इलेक्ट्रिक, बजाज इलेक्ट्रिकल्स और पॉलीकैब इंडिया जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने आधुनिक सुरक्षा तकनीकों पर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। इनमें शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाओं की रोकथाम, आधुनिक प्रोटेक्शन सिस्टम, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की सुरक्षा और उन्नत सुरक्षा उपकरणों की भूमिका पर विशेष जानकारी साझा की गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि घरेलू उपयोग में सस्ती और मानकहीन वायरिंग या उपकरणों के इस्तेमाल से आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। समय-समय पर वायरिंग की जांच, ओवरलोड से बचाव, सही अर्थिंग और प्रमाणित उपकरणों का उपयोग दुर्घटनाओं को रोकने में बेहद प्रभावी साबित हो सकता है। विशेष रूप से मानसून और गर्मी के मौसम में विद्युत उपकरणों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सावधानी और अधिक आवश्यक हो जाती है।

कार्यक्रम के अंत में राज्यभर के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विद्युत सुरक्षा के प्रति सामूहिक संकल्प दोहराया। सुरक्षित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने, सुरक्षा मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने और विद्युत दुर्घटनाओं को न्यूनतम स्तर तक लाने का लक्ष्य रखा गया। राष्ट्रीय विद्युत सुरक्षा सप्ताह 2026 केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह संदेश देने का प्रयास है कि बिजली आधुनिक जीवन की आवश्यकता है, लेकिन इसका सुरक्षित उपयोग ही वास्तविक सुरक्षा की गारंटी बन सकता है। जागरूकता, अनुशासन और तकनीकी सतर्कता के माध्यम से ही विद्युत हादसों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

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