राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस पर पटना में विशेष समारोह, प्रशासनिक डेटा की शक्ति पर हुआ मंथन

पटना में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें सांख्यिकी के महत्व, नीति निर्माण में उसकी भूमिका और प्रशासनिक डेटा के बढ़ते उपयोग पर विस्तृत चर्चा हुई। भारत सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (क्षेत्रीय संचालन प्रभाग), क्षेत्रीय कार्यालय पटना द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, सरकारी अधिकारियों, शोधकर्ताओं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। समारोह का उद्देश्य सांख्यिकी के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को इस क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित करना था।

यह आयोजन प्रख्यात सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। प्रोफेसर पी. सी. महालनोबिस को भारत में आधुनिक सांख्यिकी का आधार स्तंभ माना जाता है। उनके योगदान ने देश में डेटा आधारित योजना निर्माण और नीति निर्धारण को नई दिशा दी। राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का आयोजन हर वर्ष उनके सम्मान में किया जाता है ताकि समाज में सांख्यिकीय सोच और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को बढ़ावा दिया जा सके।

इस वर्ष राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का केंद्रीय विषय “एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा की क्षमता को अनलॉक करना” रखा गया। यह थीम प्रशासनिक आंकड़ों की उपयोगिता, उनकी विश्वसनीयता और नीति निर्माण में उनकी अहम भूमिका को केंद्र में रखती है। बदलते डिजिटल दौर में डेटा को केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे शासन, विकास और सार्वजनिक सेवा वितरण का मजबूत आधार समझा जा रहा है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वसनीय आंकड़े किसी भी प्रभावी प्रशासन की रीढ़ होते हैं।

समारोह की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद प्रोफेसर महालनोबिस की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, क्षेत्रीय कार्यालय पटना के उपमहानिदेशक एवं क्षेत्रीय प्रमुख रोशन लाल साहू ने किया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने सांख्यिकी की व्यापक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दौर में आंकड़े केवल शोध या अकादमिक अध्ययन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता और प्रभावी निर्णय लेने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके पास कितना सटीक और अद्यतन डेटा उपलब्ध है। यदि आंकड़े विश्वसनीय हों तो योजनाओं को सही दिशा में लागू करना आसान हो जाता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सांख्यिकी विषय को केवल पढ़ाई का एक विषय न समझें, बल्कि इसे भविष्य के व्यापक करियर अवसरों से जोड़कर देखें। डेटा साइंस, एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में सांख्यिकी की भूमिका पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है।

कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक डेटा के विभिन्न आयामों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उपनिदेशक परिमल ने अपने संबोधन में बताया कि प्रशासनिक डेटा देश के विकास के लिए कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जनगणना, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, स्वास्थ्य रिकॉर्ड, विवाह संबंधी आंकड़े और अन्य प्रशासनिक डेटा सरकार को समाज की वास्तविक जरूरतों को समझने में मदद करते हैं।

उन्होंने बताया कि यदि जन्म दर, मृत्यु दर, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक बदलावों से जुड़े आंकड़ों का सही विश्लेषण किया जाए तो सरकार बेहतर नीतियां बना सकती है। उदाहरण के तौर पर किसी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, जनसंख्या वृद्धि की दर या शिक्षा से जुड़े अंतर को आंकड़ों के आधार पर आसानी से पहचाना जा सकता है। यही डेटा आगे चलकर बजट निर्धारण, योजनाओं के विस्तार और संसाधनों के वितरण में उपयोगी साबित होता है।

समारोह में बिहार सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार सरकार के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के उपनिदेशक वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि आज प्रशासनिक डेटा का उपयोग नीति निर्माण के साथ-साथ योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन में भी तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ डेटा संग्रह और विश्लेषण की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक और तेज हो गई है।

पटना विश्वविद्यालय से आए विशिष्ट प्रोफेसरों ने भी सांख्यिकी के अकादमिक और व्यावहारिक महत्व पर विस्तृत चर्चा की। प्रोफेसर डॉ. प्रमित कुमार, डॉ. डौली भारती और डॉ. सुरभि सुमन ने अपने वक्तव्यों में सांख्यिकी के मूलभूत सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी केवल संख्याओं का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और मानव व्यवहार को समझने का एक वैज्ञानिक माध्यम भी है।

विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान समय में लगभग हर क्षेत्र—चाहे वह स्वास्थ्य हो, शिक्षा हो, वित्त हो या तकनीक—डेटा आधारित निर्णयों पर निर्भर होता जा रहा है। ऐसे में युवाओं के लिए सांख्यिकी एक बेहद संभावनाशील क्षेत्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने छात्रों को रिसर्च, डेटा एनालिसिस, मशीन लर्निंग और सरकारी सेवा जैसे क्षेत्रों में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं के लिए विशेष रूप से एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उन्हें सांख्यिकी से जुड़े सवाल पूछने और विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। इससे छात्रों में विषय के प्रति उत्सुकता और रुचि स्पष्ट रूप से देखने को मिली। कई विद्यार्थियों ने डेटा एनालिटिक्स, रिसर्च मेथडोलॉजी और सरकारी सांख्यिकीय सेवाओं में करियर से जुड़े प्रश्न पूछे।

समारोह के अंतिम चरण में वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी सुशील कुमार सिंह द्वारा एक संक्षिप्त प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस क्विज सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों की समझ को परखना और सांख्यिकी के प्रति उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। छात्रों ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया और विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी जानकारी का प्रदर्शन किया।

स्थानीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से बड़ी संख्या में सांख्यिकी विषय के छात्र-छात्राओं ने इस कार्यक्रम में भागीदारी की। इसके अलावा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी भी समारोह में मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि भविष्य का शासन और विकास डेटा आधारित निर्णयों पर ही अधिक निर्भर करेगा।

राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि आंकड़ों की शक्ति को समझे बिना आधुनिक समाज और प्रशासन की कल्पना अधूरी है। विश्वसनीय डेटा, वैज्ञानिक विश्लेषण और जागरूक नागरिक भागीदारी के जरिए ही अधिक प्रभावी नीतियां बनाई जा सकती हैं। यही सोच भारत को डेटा-संचालित और अधिक सक्षम शासन व्यवस्था की ओर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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