
भागलपुर में सोमवार की संध्या शहीद भरत भूषण तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करने और निष्पक्ष न्याय की मांग को लेकर अभूतपूर्व जनसमर्थन देखने को मिला। शहर में आयोजित विशाल कैंडल मार्च और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। मोमबत्तियों की रोशनी के बीच न्याय की मांग और भावनात्मक नारों ने पूरे शहर का माहौल गंभीर और संवेदनशील बना दिया।
यह कैंडल मार्च केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्याय, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की सामूहिक आवाज बनकर सामने आया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे किसी भी परिस्थिति में सत्य सामने आने और न्याय सुनिश्चित होने तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भागलपुर के प्रमुख सार्वजनिक स्थल लाजपत पार्क से हुआ। यहां सभी प्रतिभागियों ने एकत्र होकर मोमबत्तियां जलाईं और भरत भूषण तिवारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया और कई लोगों की आंखें नम दिखाई दीं।
लाजपत पार्क से शुरू हुआ कैंडल मार्च धीरे-धीरे एक विशाल जनसैलाब का रूप लेता गया। मार्च घंटाघर चौक से होते हुए स्टेशन चौक तक निकाला गया। रास्ते भर लोग हाथों में मोमबत्तियां, पोस्टर और तख्तियां लेकर चलते रहे। कई पोस्टरों पर न्याय, निष्पक्ष जांच और सत्य को सामने लाने की मांग लिखी हुई थी।
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग से जुड़े नारे लगाए। “भरत तिवारी को न्याय दो”, “सत्य सामने लाओ” और “निष्पक्ष जांच कराओ” जैसे नारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा। हालांकि विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और आयोजकों ने लगातार अनुशासन बनाए रखने की अपील की।
वक्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज की सबसे बड़ी ताकत न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास होता है। यदि किसी मामले में सवाल उठ रहे हों, तो उन सवालों का जवाब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के माध्यम से मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भरत भूषण तिवारी से जुड़े मामले में भी सत्य का सामने आना आवश्यक है ताकि जनता का भरोसा कानून और व्यवस्था पर बना रहे।
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि न्याय केवल एक व्यक्ति या परिवार की मांग नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की आवश्यकता है। यदि किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो इससे आम नागरिकों के बीच असुरक्षा और अविश्वास की भावना बढ़ती है। इसलिए प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान एक और मुद्दा चर्चा का केंद्र बना। भाजपा नेता नागमणि द्वारा दिए गए कथित विवादित बयान को लेकर प्रदर्शनकारियों में नाराजगी दिखाई दी। भरत भूषण तिवारी को “गुंडा” कहे जाने वाले बयान पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों ने इसे अपमानजनक बताते हुए स्टेशन चौक पर नागमणि का पुतला दहन किया।
पुतला दहन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि नागमणि अपने बयान को वापस लें और सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दें। उनका कहना था कि बिना निष्पक्ष जांच और सत्य सामने आए किसी व्यक्ति के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी सामाजिक तनाव बढ़ा सकती है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अपने वक्तव्यों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है। उनका कहना था कि समाज न्याय और कानून के शासन में विश्वास रखता है और इसी उद्देश्य से यह शांतिपूर्ण जनभागीदारी आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि आंदोलन का मकसद किसी संस्था या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि न्याय प्रक्रिया को मजबूत करना है।
कैंडल मार्च में शामिल युवाओं का उत्साह और प्रतिबद्धता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में युवा हाथों में मोमबत्तियां लिए पूरे मार्च में सक्रिय रहे। कई युवाओं ने कहा कि आज की पीढ़ी केवल सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जरूरत पड़ने पर सड़कों पर उतरकर भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहती है।
महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी ने भी कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक स्वरूप दिया। कई महिलाओं ने कहा कि न्याय के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध जनता का संवैधानिक अधिकार है और ऐसे कार्यक्रम सामाजिक जागरूकता को मजबूत करते हैं।
आयोजकों ने कैंडल मार्च में शामिल सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, मीडिया प्रतिनिधियों और भागलपुर के नागरिकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि न्याय के लिए जनता का समर्थन लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति है। उनके अनुसार जब समाज एकजुट होकर आवाज उठाता है, तब व्यवस्था को जवाबदेह बनने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
कार्यक्रम में शुभम तिवारी, नितेश चौबे, भास्कर तिवारी, नीरज चौधरी, अभिषेक रॉय, कुश, राजू तिवारी, गौरव, रिशांत, तजेश, मोनू, समुज्जुअल, सनी, आदित्य, अर्जित और गौतम सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। इन सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
भागलपुर में आयोजित यह कैंडल मार्च स्पष्ट संकेत देता है कि भरत भूषण तिवारी का मामला अब केवल एक व्यक्तिगत या स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है। यह न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यापक मांग में बदलता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस आंदोलन की दिशा तय करेगी। फिलहाल भागलपुर की सड़कों से उठी यह आवाज यही संदेश दे रही है कि न्याय की मांग अब और मजबूत होती जा रही है।


