सहकारिता सप्ताह की शुरुआत, PACS सशक्तिकरण पर मंथन; नई सहकारी नीति से बदलेगी बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था

बिहार में सहकारिता आंदोलन को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सहकारिता सप्ताह का शुभारंभ हुआ। सहकारिता विभाग, बिहार सरकार और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) के संयुक्त तत्वावधान में पटना स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित उद्घाटन एवं जागरूकता कार्यक्रम में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं के सशक्तिकरण पर व्यापक मंथन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “नवीन राष्ट्रीय सहकारी नीति के माध्यम से PACS एवं जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं का सशक्तिकरण” रहा।

कार्यक्रम में बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री ने उद्घाटन करते हुए कहा कि नई बिहार सहकारी नीति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले वर्षों में सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधियों का माध्यम नहीं रहेगी, बल्कि विकसित बिहार की मजबूत आधारशिला बनेगी। उनके अनुसार गांवों की आर्थिक मजबूती और किसानों की आय वृद्धि में सहकारिता क्षेत्र सबसे प्रभावी उपकरण साबित हो सकता है।

इस अवसर पर मंत्री ने राज्य की 10 सहकारी समितियों को की सदस्यता प्रमाण-पत्र सांकेतिक रूप से प्रदान किए। यह कदम सहकारी संस्थाओं को बीज उत्पादन, वितरण और कृषि आपूर्ति श्रृंखला से मजबूत रूप से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना ही सहकारिता पर आधारित रही है। सामूहिक प्रयास, साझी जिम्मेदारी और संसाधनों के साझा उपयोग की अवधारणा भारतीय सामाजिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित सहकारिता मंत्रालय ने पिछले पांच वर्षों में इस क्षेत्र में कई ऐतिहासिक परिवर्तन किए हैं।

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस, PACS कंप्यूटरीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र, प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और डिजिटल बैंकिंग जैसी पहलों ने सहकारी संस्थाओं की कार्यक्षमता को नई ऊंचाई दी है। इन तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों के कारण किसानों तक सेवाओं की पहुंच अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी हुई है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बिहार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। वर्ष 2047 तक बिहार को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में कृषि और सहकारिता सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरेंगे। उनका मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुए बिना राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है।

मंत्री ने PACS की बदलती भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब PACS को केवल धान और गेहूं की अधिप्राप्ति या ऋण वितरण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समय की मांग है कि PACS उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन, मूल्य संवर्धन और निर्यात जैसी पूरी मूल्य श्रृंखला में सक्रिय भागीदारी निभाएं। इससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक गतिशील बनेगी।

खेती में विविधीकरण को भी उन्होंने आवश्यक बताया। उनके अनुसार बहुउद्देशीय PACS मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ाएगा। यदि सहकारी संस्थाएं कृषि के साथ डेयरी, मत्स्य, प्रसंस्करण और अन्य आय आधारित गतिविधियों से जुड़ेंगी तो ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

मंत्री ने युवाओं का विशेष रूप से आह्वान करते हुए कहा कि सहकारिता उन्हें नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाला बनाएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार, डिजिटलीकरण और पारदर्शी प्रशासन को अपनाकर सहकारी संस्थाओं को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा। इससे ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता की भावना भी विकसित होगी।

BBSSL की भूमिका पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि यह संस्था किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रही है। साथ ही स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन और विपणन नेटवर्क को मजबूत कर कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद कर रही है। उन्होंने बताया कि बिहार की 7,157 सहकारी समितियां BBSSL की सदस्य बन चुकी हैं, जिससे “बीज से बाजार” तक एक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला विकसित हो रही है।

कार्यक्रम में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह ने भी विभाग की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार सहकारिता क्षेत्र को अधिक आधुनिक, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार नवाचार आधारित पहल कर रही है। गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन एवं वितरण को बढ़ावा देकर सहकारी संस्थाओं की आय और किसानों की आर्थिक मजबूती दोनों को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 8,463 PACS मॉडल उपविधि अपनाकर बहुउद्देशीय PACS के रूप में कार्य कर रहे हैं। प्रथम चरण में 4,477 PACS का कंप्यूटरीकरण पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष समितियों का कार्य तेजी से प्रगति पर है। यह डिजिटलीकरण सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार राज्य में 6,381 PACS में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 1,726 PACS को प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। 32 PACS में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र शुरू हो चुके हैं, जबकि 2,430 PACS को उर्वरक अनुज्ञप्ति प्रदान की गई है। साथ ही 100 PACS आधारित किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी स्थापित किए जा चुके हैं।

डेयरी सहकारिता के क्षेत्र में भी बिहार तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में अब तक 13,370 डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है। सात निश्चय-3 के तहत इन समितियों का विस्तार राज्य के सभी गांवों तक करने की योजना पर कार्य जारी है। इससे दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आय दोनों में वृद्धि की उम्मीद है।

वर्तमान में बिहार की 27,388 सहकारी समितियों से लगभग 1.60 करोड़ किसान जुड़े हुए हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस आंदोलन का विस्तार करते हुए 5 करोड़ लोगों, विशेषकर महिलाओं, को सहकारिता से जोड़ना है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से सहकारिता आंदोलन और अधिक मजबूत होगा।

कार्यक्रम के दौरान BBSSL के विशेषज्ञों ने सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों को गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, विपणन रणनीति और सहकारिता क्षेत्र की नई पहलों पर विस्तृत प्रशिक्षण भी दिया। इससे प्रतिनिधियों को जमीनी स्तर पर योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर सहकारिता सप्ताह का पहला दिन बिहार के ग्रामीण आर्थिक ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देकर गया। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि सहकारिता को केवल संस्थागत ढांचा न मानकर उसे ग्रामीण समृद्धि, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर बिहार की केंद्रीय शक्ति बनाया जाए।

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