राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में बिहार की मजबूत मौजूदगी, जियो-टैगिंग मॉडल को मिली राष्ट्रीय सराहना

बिहार ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में बिहार सरकार की अभिनव पहलों, विशेष रूप से ग्रामीण आवास योजनाओं में अपनाई गई जियो-टैगिंग प्रणाली, को व्यापक सराहना मिली। दो दिवसीय इस सम्मेलन में बिहार सरकार का प्रतिनिधित्व ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री ने किया। सम्मेलन के दौरान उन्होंने बिहार की ग्रामीण विकास नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को राष्ट्रीय मंच पर रखा।

नई दिल्ली में 28 और 29 जून को आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समृद्धि को गति देना, राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए साझा रणनीति तैयार करना था। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में लागू सफल मॉडलों, चुनौतियों और नवाचारों पर विचार साझा किए।

इस वर्ष सम्मेलन की थीम “ग्रामोदय से राष्ट्रोदय” रखी गई थी। इस थीम के केंद्र में यह विचार था कि भारत के समग्र विकास की मजबूत नींव गांवों के विकास में ही निहित है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आवास, रोजगार, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को केंद्र में रखकर नीतियां तैयार करने पर विशेष बल दिया गया।

सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने किया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब गांव आत्मनिर्भर, समृद्ध और संसाधन-संपन्न बनेंगे। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, रोजगार के अवसरों और सामाजिक सशक्तिकरण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया।

सम्मेलन के दौरान बिहार विशेष रूप से चर्चा के केंद्र में रहा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में बिहार द्वारा अपनाई गई ऑन-साइट जियो-टैगिंग पहल को देश की श्रेष्ठ प्रक्रियाओं में शामिल कर सराहा गया। इस उपलब्धि ने बिहार को ग्रामीण आवास प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत उदाहरण के रूप में स्थापित किया है।

जियो-टैगिंग तकनीक के उपयोग ने ग्रामीण आवास योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता में महत्वपूर्ण सुधार किया है। इस प्रणाली के तहत निर्माणाधीन या पूर्ण हो चुके आवासों की वास्तविक लोकेशन डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड की जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभार्थियों तक योजना का लाभ सही तरीके से पहुंचे और निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि जियो-टैगिंग जैसी तकनीकी व्यवस्था सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को भी कम करती है। बिहार में इस प्रणाली के सफल उपयोग ने अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल प्रस्तुत किया है। सम्मेलन में कई प्रतिनिधियों ने बिहार के इस नवाचार में रुचि दिखाई।

सम्मेलन के दौरान मंत्री श्रवण कुमार ने बिहार में ग्रामीण विकास योजनाओं की उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण गरीबों को आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से मुख्यमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के तहत हजारों परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण आवास के क्षेत्र में अभी कई चुनौतियां मौजूद हैं। विशेष रूप से वर्ष 2015 से पहले बने कई मकानों की स्थिति अब जर्जर हो चुकी है और उन्हें मरम्मत की आवश्यकता है। मंत्री ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय मंच पर उठाते हुए कहा कि पुराने ग्रामीण मकानों के पुनर्वास और मरम्मत के लिए भी नीति स्तर पर विशेष व्यवस्था की जरूरत है।

श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार सरकार केवल योजनाएं घोषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर भी जोर देती है कि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे। उनके अनुसार ग्रामीण विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है।

उन्होंने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि बिहार में जमीनी स्तर पर शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक योजनाओं की मॉनिटरिंग को मजबूत किया गया है ताकि क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही आजीविका के अवसरों को बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास का सीधा संबंध रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से है। यदि गांव मजबूत होंगे तो पलायन में कमी आएगी और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। यही कारण है कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है।

सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच अनुभव साझा करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रही। इससे राज्यों को एक-दूसरे की सफल योजनाओं से सीखने और बेहतर मॉडल अपनाने का अवसर मिला। बिहार की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि राज्य तकनीकी नवाचारों और पारदर्शी शासन मॉडल को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ग्रामीण विकास विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली, डिजिटल डेटा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासनिक सशक्तिकरण ग्रामीण विकास की दिशा तय करेंगे। बिहार की जियो-टैगिंग पहल इसी बदलते मॉडल का हिस्सा मानी जा रही है।

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में बिहार की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि राज्य केवल योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि नवाचार और नीति निर्माण में योगदान देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। जियो-टैगिंग जैसी पहलों को मिली राष्ट्रीय पहचान बिहार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

कुल मिलाकर, नई दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। बिहार की उपलब्धियों और जमीनी प्रयासों ने यह दिखाया कि यदि तकनीक, पारदर्शिता और प्रभावी प्रशासन को साथ लेकर काम किया जाए तो ग्रामीण भारत के विकास को नई गति दी जा सकती है।

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