भागलपुर में 15 दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ, रंगमंच के माध्यम से प्रतिभाओं को मिलेगा नया मंच

भागलपुर, 28 जून। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार, भागलपुर संग्रहालय तथा सांस्कृतिक नाट्य संस्था ‘आलय’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का रविवार को विधिवत शुभारंभ किया गया। अंग संस्कृति भवन स्थित भागलपुर संग्रहालय के परीक्षागृह में आयोजित उद्घाटन समारोह में कलाकारों, प्रशिक्षकों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति देखने को मिली। इस कार्यशाला का उद्देश्य जिले की नई नाट्य प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना तथा रंगमंच की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

कार्यशाला का शुभारंभ शिक्षाविद राजीवकांत मिश्रा ने भारतीय परंपरा के अनुसार नारियल फोड़कर किया। उद्घाटन के साथ ही पूरे वातावरण में सांस्कृतिक ऊर्जा और रचनात्मक उत्साह का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह सहायक संग्रहालयाध्यक्ष अंकित रंजन, वरिष्ठ रंगकर्मी शशि रंजन, युवा ड्रामा प्रशिक्षक मिथिलेश कुमार, किलकारी भागलपुर के प्रमुख साहिल राज तथा कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक एवं सह-संयोजक डॉ. चैतन्य प्रकाश सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई, जिसके बाद कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। उद्घाटन अवसर पर वक्ताओं ने नाट्य कला के महत्व, उसके सामाजिक सरोकार और वर्तमान समय में रंगमंच की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और संवेदनशील बनाने की प्रभावशाली विधा है।

अपने संबोधन में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह सहायक संग्रहालयाध्यक्ष अंकित रंजन ने कहा कि यह नाट्य प्रशिक्षण पखवाड़ा विशेष रूप से शहर के बाल, किशोर, युवा और वरिष्ठ कलाकारों को ध्यान में रखकर आयोजित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अभिनय, संवाद-अदायगी, मंच संचालन, चरित्र निर्माण, शारीरिक अभिव्यक्ति, स्वर साधना और रंगमंच की कई अन्य महत्वपूर्ण विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रतिभागियों के व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। मंच पर आत्मविश्वास के साथ संवाद करना, भावों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करना और दर्शकों से जुड़ने की कला भी सिखाई जाएगी। अनुभवी प्रशिक्षक प्रतिभागियों को व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से रंगमंच की बारीकियां समझाएंगे।

अंकित रंजन ने कहा कि कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन भागलपुर स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता है कि सरकार की सांस्कृतिक योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और जिले की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।

कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक एवं निर्देशक डॉ. चैतन्य प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा कि रंगमंच केवल अभिनय सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, अनुशासन, संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना का सशक्त साधन है। उन्होंने कहा कि थिएटर व्यक्ति को समाज, जीवन और मानवीय भावनाओं को गहराई से समझने का अवसर देता है।

डॉ. चैतन्य प्रकाश ने कहा कि इस कार्यशाला में सभी इच्छुक प्रतिभागियों का स्वागत है। अभिनय या नाट्य कला में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा निखारने और मंचीय अभिव्यक्ति को मजबूत करने का अवसर देगा।

उन्होंने जानकारी दी कि कार्यशाला के समापन पर जिला प्रशासन भागलपुर के तत्वावधान में प्रशिक्षुओं द्वारा एक विशेष नाट्य प्रस्तुति आयोजित की जाएगी। इस प्रस्तुति में प्रतिभागी प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई कला और कौशल का प्रदर्शन करेंगे। इससे न केवल उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, बल्कि उन्हें वास्तविक मंच अनुभव भी प्राप्त होगा।

उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला आगामी 12 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 5:30 बजे तक भागलपुर संग्रहालय परिसर में संचालित होगी। इस दौरान प्रतिभागियों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे रंगमंच की विभिन्न विधाओं का समग्र ज्ञान प्राप्त कर सकें।

सांस्कृतिक संस्था ‘आलय’ के सचिव एवं वरिष्ठ रंगकर्मी शशि रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए जिला प्रशासन और कला एवं संस्कृति विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि भागलपुर में इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे नई प्रतिभाओं को मंच मिलता है और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्राप्त होती है।

उन्होंने कहा कि यह पहल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है। यदि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, तो बिहार के सांस्कृतिक परिदृश्य को और अधिक समृद्ध बनाया जा सकता है।

मुख्य अतिथि राजीवकांत मिश्रा ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि नाट्य विधा सभी कलाओं का समन्वित स्वरूप है। इसमें साहित्य, संगीत, नृत्य, चित्रकला, वेशभूषा, मंच सज्जा और अभिव्यक्ति जैसी अनेक कलाओं का सुंदर संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि रंगमंच से जुड़ने वाला व्यक्ति केवल अभिनय नहीं सीखता, बल्कि जीवन को समझने की नई दृष्टि भी प्राप्त करता है।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस कार्यशाला से जुड़ें और अपनी रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करें। उनका कहना था कि कला व्यक्ति को संवेदनशील, अनुशासित और सामाजिक रूप से जागरूक बनाती है।

कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। 50 से अधिक प्रशिक्षुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें विद्यालय और महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ विभिन्न आयु वर्ग के कलाकार और कला प्रेमी शामिल रहे। कई प्रतिभागियों ने कहा कि आने वाले दिनों में और भी युवक-युवतियां इस प्रशिक्षण से जुड़ेंगे।

आयोजकों ने बताया कि इच्छुक प्रतिभागियों के लिए पंजीकरण अभी भी खुला है। इच्छुक व्यक्ति भागलपुर संग्रहालय से संपर्क कर कार्यशाला में शामिल हो सकते हैं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं, बल्कि जिले में भविष्य के रंगकर्मियों की नई पीढ़ी तैयार करना भी है।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने विश्वास जताया कि यह 15 दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला भागलपुर की सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा देगी और जिले में रंगमंच की सशक्त परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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