‘छोटी मछलियां गिरफ्तार, बड़े खिलाड़ी फरार’—टेंडर घोटाले पर तेजस्वी का वार

बिहार टेंडर घोटाले पर सियासत तेज: तेजस्वी यादव के सरकार पर 20 बड़े सवाल, BJP ने पलटवार कर पूछा- ‘रिशु श्री से कितना कमीशन लिया?’

पटना: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दो IAS अधिकारियों के निलंबन के बावजूद स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की चार्जशीट में उनका नाम शामिल नहीं किए जाने पर बिहार सरकार को घेरा है। तेजस्वी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार से 20 तीखे सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि बड़े अधिकारियों और सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने के लिए केवल छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है।

तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि जब दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को इस मामले में निलंबित किया जा चुका है, तो फिर चार्जशीट में उनका नाम क्यों नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच को सीमित कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ठेकेदार सरकारी विभागों के टेंडर अपनी मर्जी से प्रभावित कर रहा था और विभागीय अधिकारियों पर उसका प्रभाव था। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि ई-टेंडरिंग व्यवस्था होने के बावजूद इतने बड़े स्तर पर कथित घोटाला कैसे हुआ।

तेजस्वी ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिन अधिकारियों और लोगों की भूमिका संदिग्ध है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया।

वहीं, तेजस्वी यादव के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने भी पलटवार किया। बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि तेजस्वी यादव पहले यह बताएं कि जिस समय संबंधित विभाग उनके पास था, उस दौरान हुए कथित घोटालों में उनकी क्या भूमिका रही। उन्होंने सवाल उठाया कि रिशु श्री मामले में तेजस्वी यादव का क्या संबंध है और उनसे कथित तौर पर कितना कमीशन लिया गया।

बीजेपी ने कहा कि बिना सबूत सरकार पर आरोप लगाना उचित नहीं है। यदि तेजस्वी यादव के पास कोई ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच एजेंसियां सबूतों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।

अब इस मामले को लेकर बिहार की राजनीति और तेज होने के संकेत हैं। एक ओर विपक्ष सरकार पर भ्रष्टाचारियों को बचाने का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर सत्तापक्ष विपक्ष से जवाब मांग रहा है। ऐसे में टेंडर घोटाले का मुद्दा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है।

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