भागलपुर में धूमधाम से मनाई गई दानवीर भामाशाह की जयंती, प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया नमन

भागलपुर। दान, त्याग, समाजसेवा और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक माने जाने वाले दानवीर भामाशाह की जयंती रविवार को भागलपुर में श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। शहर के भामाशाह चौक पर आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में समाजसेवी, गणमान्य नागरिक और मारवाड़ी समाज के लोग शामिल हुए। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने दानवीर भामाशाह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का आयोजन बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा किया गया। समारोह सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल खेतान के नेतृत्व में संपन्न हुआ। आयोजन के दौरान पूरे परिसर में श्रद्धा और सम्मान का वातावरण देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने पुष्प अर्पित कर दानवीर भामाशाह के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने दानवीर भामाशाह के जीवन, संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा कि भामाशाह केवल एक दानवीर नहीं थे, बल्कि वे ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने धन, संसाधन और जीवन को राष्ट्रहित में समर्पित कर दिया। उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

वक्ताओं ने कहा कि भारतीय इतिहास में दानवीर भामाशाह का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने अपने समय में जिस प्रकार राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए बलिदान और सहयोग का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए निस्वार्थ सेवा सबसे बड़ा धर्म है।

समारोह में बताया गया कि भामाशाह मेवाड़ के वीर योद्धा महाराणा प्रताप के सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में से एक थे। जब संघर्ष के कठिन समय में महाराणा प्रताप आर्थिक संकट से गुजर रहे थे, तब भामाशाह ने अपनी संपूर्ण संपत्ति राष्ट्र रक्षा के लिए समर्पित कर दी थी। उनके इस योगदान ने स्वतंत्रता और स्वाभिमान की लड़ाई को नई ऊर्जा दी थी।

वक्ताओं ने कहा कि भामाशाह का त्याग केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं था, बल्कि वह राष्ट्रभक्ति की एक अद्वितीय मिसाल था। उन्होंने दिखाया कि यदि समाज के सक्षम लोग आगे आकर राष्ट्र और समाज के लिए योगदान दें, तो बड़े से बड़े संकट का समाधान संभव है। यही भावना आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक है।

बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल खेतान ने अपने संबोधन में कहा कि दानवीर भामाशाह का जीवन समाज सेवा की सर्वोच्च मिसाल है। उन्होंने कहा कि भामाशाह के आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना हमारा नैतिक दायित्व है। समाज तभी मजबूत बनता है जब उसमें सहयोग और सेवा की भावना जीवित रहे।

उन्होंने कहा कि आज के समय में आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही आवश्यक है। यदि समाज का सक्षम वर्ग शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में योगदान दे, तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से लाया जा सकता है। भामाशाह की प्रेरणा इसी दिशा में हमें आगे बढ़ने की सीख देती है।

समारोह में सम्मेलन के संरक्षक रामगोपाल पोद्दार ने कहा कि भामाशाह की जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को भामाशाह के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

निगम पार्षद अश्वनी जोशी मोंटी ने कहा कि समाज में सेवा, समर्पण और सहयोग की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दानवीर भामाशाह ने जिस प्रकार राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, वह आज भी प्रासंगिक है। उनका जीवन हर पीढ़ी को यह सिखाता है कि व्यक्तिगत हित से ऊपर समाज और राष्ट्र का हित होना चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भामाशाह के आदर्शों को केवल समारोहों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि समाज सेवा के कार्यों के माध्यम से उन्हें जीवंत रखना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबों की सहायता और सामाजिक उत्थान जैसे क्षेत्रों में सामूहिक प्रयास भामाशाह को सच्ची श्रद्धांजलि होंगे।

समारोह के दौरान युवाओं और उपस्थित लोगों में विशेष उत्साह देखा गया। कई लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ते हैं और उन्हें महान व्यक्तित्वों के जीवन से सीखने का अवसर प्रदान करते हैं। आज के दौर में जब समाज तेजी से बदल रहा है, तब भामाशाह जैसे महापुरुषों के आदर्श और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दानवीर भामाशाह के विचारों को आगे बढ़ाने और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि समाज के विकास, जरूरतमंदों की सहायता और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना ही भामाशाह को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

भागलपुर में आयोजित यह समारोह केवल एक जयंती उत्सव नहीं था, बल्कि समाज को सेवा, त्याग और राष्ट्रभक्ति का संदेश देने वाला प्रेरणादायक आयोजन बन गया। दानवीर भामाशाह की जयंती ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि समाज की वास्तविक शक्ति सेवा, सहयोग और समर्पण की भावना में निहित होती है।

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