
बिहार के पवित्र तीर्थस्थल गयाजी को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप नई सजावट दी जा रही है। गयाजी नगर निगम शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर ऐसे गोलंबर विकसित कर रहा है, जिन पर भगवान विष्णु, विष्णुपद मंदिर, भगवान बुद्ध और गयासुर की पौराणिक कथा से जुड़ी कलाकृतियां उकेरी जा रही हैं। उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश करते ही गयाजी की आध्यात्मिक विरासत का अनुभव हो।
धार्मिक और सांस्कृतिक थीम पर बन रहे गोलंबर
नगर निगम द्वारा पीर मंसूर मोड़, काशीनाथ मोड़ सहित शहर के कई प्रमुख चौराहों पर धार्मिक थीम आधारित गोलंबर बनाए जा रहे हैं। इनमें भगवान विष्णु के चरण चिन्ह, विष्णुपद मंदिर की आकृति, भगवान बुद्ध की प्रतिमा तथा गयासुर की कथा को दर्शाने वाली कलाकृतियां शामिल की गई हैं।
फाउंटेन और रंग-बिरंगी रोशनी से बढ़ेगी खूबसूरती
इन गोलंबरों को आधुनिक फाउंटेन और आकर्षक एलईडी लाइटिंग से भी सजाया गया है। रात के समय रंग-बिरंगी रोशनी में ये गोलंबर शहर की सुंदरता को और अधिक आकर्षक बनाएंगे तथा धार्मिक वातावरण को सजीव करेंगे।
नगर निगम अपने फंड से करा रहा निर्माण
गयाजी नगर निगम के मेयर गणेश पासवान ने बताया कि शहर में कुल 8 बड़े और 5 छोटे गोलंबर बनाए जा रहे हैं। इनमें समाहरणालय से लेकर ओटीए 5 नंबर गेट तक के प्रमुख चौराहे शामिल हैं। अधिकांश गोलंबरों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य तेजी से कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा,
“गयाजी नगर निगम अपने फंड से इन गोलंबरों का निर्माण करा रहा है। पिछले वर्ष बोर्ड की बैठक में इसका निर्णय लिया गया था। सभी गोलंबरों के लिए अलग-अलग बजट निर्धारित है और शेष निर्माण कार्य भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।”
रेलवे स्टेशन से ही मिलेगा आध्यात्मिक अनुभव
विष्णुपद मंदिर के पंडा महेश लाल ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि गयाजी सनातन परंपरा का आदि तीर्थ है। अब श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन से निकलते ही पूरे मार्ग में धार्मिक प्रतीकों के दर्शन होंगे, जिससे उनकी यात्रा और अधिक आध्यात्मिक अनुभव से भर जाएगी।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि शहर के प्रवेश मार्गों पर भी स्वागत द्वार बनाए जाएं, जिन पर विष्णुपद मंदिर और महाबोधि मंदिर की झलक दिखाई दे, ताकि श्रद्धालु शहर में प्रवेश करते ही गयाजी को नमन कर सकें।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
धनबाद से आए श्रद्धालु रंजन कुमार ने कहा कि काशीनाथ मोड़ पर गयासुर की कथा पढ़कर उन्हें गयाजी के इतिहास की जानकारी मिली। वहीं नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसी कलाकृतियां शहर की पहचान को मजबूत करेंगी और नई पीढ़ी को गयाजी की धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत से जोड़ेंगी।
नगर निगम का मानना है कि इस पहल से न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को गयाजी की सांस्कृतिक पहचान का सजीव अनुभव होगा।


