भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर नया विवाद, कितनी गोलियां लगीं? उठ रहे कई सवाल

आरा/भोजपुर: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब गोली लगने की संख्या को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर गांव और शहर तक इस बात की चर्चा तेज है कि भरत भूषण तिवारी को आखिर कितनी गोलियां लगी थीं। इस बीच कथित पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर कई दावे सामने आए हैं, हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत भूषण तिवारी के शरीर पर कुल पांच गोली लगने का उल्लेख बताया जा रहा है। चर्चा है कि गोलियां दोनों पैरों और जांघों के अलग-अलग हिस्सों में लगी थीं। हालांकि पटना से संबंधित रिपोर्ट के भोजपुर पहुंचने या उसके आधिकारिक विवरण की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से, दूसरी उसी जांघ के मध्य भाग, तीसरी दाहिनी जांघ के मध्य हिस्से, चौथी दाहिनी जांघ के बाहरी हिस्से तथा पांचवीं गोली पैर के पिछले हिस्से में लगी थी।

सूत्रों का यह भी दावा है कि पोस्टमार्टम के दौरान शरीर से एक बुलेट बरामद की गई, जबकि बाकी चार गोलियां शरीर को आर-पार कर निकल गई थीं। हालांकि इन दावों की किसी सरकारी एजेंसी या प्रशासनिक अधिकारी ने पुष्टि नहीं की है।

मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कथित तौर पर एक गोली तत्कालीन थानाध्यक्ष द्वारा चलाई गई थी, जबकि चार गोलियां एसटीएफ के एक जवान ने दागी थीं। उल्लेखनीय है कि प्राथमिकी में भी पुलिस द्वारा कुल पांच राउंड फायरिंग किए जाने का जिक्र है। हालांकि यह पूरा मामला अभी जांच के दायरे में है।

इस बीच इलाज करने वाले चिकित्सक के अलग-अलग बयानों ने भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आरा सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. एमएच अंसारी ने घटना के बाद शुरुआती बयान में चार से पांच गोलियां लगने की बात कही थी। वहीं हाल ही में एक डिजिटल मीडिया साक्षात्कार में उन्होंने तीन गोलियां लगने की बात कही।

डॉ. अंसारी ने यह भी कहा कि शरीर पर बारूद के निशान नहीं मिले थे, जिससे प्रारंभिक तौर पर यह संभावना जताई गई कि फायरिंग कुछ दूरी से की गई होगी। उनके अनुसार गोली लगभग 20 से 25 फीट की दूरी से चलाई गई हो सकती है।

गौरतलब है कि 17 जून की सुबह शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस ने उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया, जहां से बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

अब कथित पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकों के अलग-अलग बयान और प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों के बीच सामने आ रहे अंतर ने पूरे एनकाउंटर को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में आधिकारिक स्थिति तभी स्पष्ट होगी, जब प्रशासन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा या जांच एजेंसियां अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेंगी।

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