
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड क्षेत्र में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश शनिवार को खुलकर सामने आया। कमरगंज पंचायत के जहांगीरा गांव के वार्ड संख्या-8 में लंबे समय से जारी जल संकट से परेशान ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप एनएच-80 मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। सड़क जाम के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लगभग डेढ़ घंटे तक चले इस प्रदर्शन ने प्रशासन की जलापूर्ति व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह करीब 9 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण एनएच-80 पर पहुंच गए। उन्होंने सड़क पर डिब्बे, बाल्टी, बर्तन और अन्य घरेलू सामान रखकर आवागमन बाधित कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि बार-बार शिकायत के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा, जिसके कारण उन्हें मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं, पुरुषों और युवाओं की बड़ी भागीदारी देखी गई।
सड़क जाम होते ही एनएच-80 पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। छोटे-बड़े वाहन, निजी कारें, बसें, ट्रक और हाइवा सड़क के दोनों ओर फंस गए। चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी के बीच यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई लोग अपने जरूरी काम के लिए निकले थे, लेकिन जाम के कारण घंटों फंसे रहे। कुछ राहगीर ऐसे भी दिखे जो वाहन छोड़कर पैदल ही अपने गंतव्य की ओर निकल पड़े।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि एनएच-80 सड़क निर्माण का कार्य लगभग दो वर्ष पहले पूरा हो चुका है, लेकिन सड़क बनने के बाद भी गांव में पेयजल की समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार की योजनाओं के तहत घर-घर नल तो लगाए गए, लेकिन नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही। पाइपलाइन और जलापूर्ति व्यवस्था होने के बावजूद अधिकांश घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीण काजल कुमारी ने बताया कि गांव की महिलाओं को रोजाना सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। घरों में पानी नहीं आने के कारण पीने और घरेलू उपयोग के लिए पानी दूर से लाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार सड़क पार कर दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। गर्मी के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीण बबलू कुमार ने कहा कि समस्या केवल पेयजल तक सीमित नहीं है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में गांव के कई हिस्सों में जलजमाव हो जाता है। घरों के सामने गंदा पानी जमा रहने से लोगों को आने-जाने में कठिनाई होती है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है और बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला। लोगों का आरोप था कि अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर समस्या जस की तस बनी रहती है।
सड़क जाम की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। के नेतृत्व में सुल्तानगंज थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी भी दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने पहले ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और फिर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया।
करीब डेढ़ घंटे तक समझाइश और बातचीत के बाद प्रशासन ग्रामीणों को जाम हटाने के लिए राजी कर सका। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि समस्या का तत्काल समाधान करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद सड़क जाम समाप्त कराया गया और यातायात धीरे-धीरे सामान्य हुआ।
मौके पर बीडीओ संजीव कुमार ने जलापूर्ति व्यवस्था की विस्तृत जानकारी लेने के लिए पंप संचालक विपिन यादव को बुलाया। पंप संचालक ने अधिकारियों को बताया कि तकनीकी रूप से जलापूर्ति व्यवस्था काम कर रही है, लेकिन कुछ घरों में अवैध रूप से मोटर लगाए जाने के कारण पानी की सप्लाई बाधित हो रही है। उनका कहना था कि जिन घरों में मोटर लगाए गए हैं, वहां अत्यधिक पानी खींच लिया जाता है, जिससे अन्य घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।
इस जानकारी के बाद बीडीओ ने तत्काल जांच का निर्देश दिया। जांच के दौरान कुछ घरों में अवैध मोटर लगे पाए गए। अधिकारियों ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए कई मोटरों को हटवा दिया। बीडीओ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी घर में अवैध मोटर लगाकर सार्वजनिक जलापूर्ति व्यवस्था को बाधित किया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
बीडीओ ने पंचायत सचिव और विभाग के जूनियर इंजीनियर को निर्देश दिया कि जिन घरों में अवैध मोटर पाए गए हैं, उन्हें चिन्हित कर नोटिस जारी किया जाए। साथ ही आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
प्रशासन की कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में कुछ हद तक संतोष देखा गया, हालांकि लोगों ने स्पष्ट कहा कि केवल मोटर हटाने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। उन्होंने मांग की कि जलापूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी हो और गांव में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था भी बनाई जाए।
सुल्तानगंज के जहांगीरा गांव की यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों को सामने लाती है। पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता पूरी न होने पर लोगों का सड़क पर उतरना यह दर्शाता है कि प्रशासन को जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए और सक्रिय होना होगा। फिलहाल प्रशासन ने कार्रवाई कर स्थिति नियंत्रित कर ली है, लेकिन अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर टिकी है कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान कब तक होता है।


