
पटना स्थित देवीपद शहीद स्मारक (मिलर) उच्च माध्यमिक विद्यालय को राज्य के सबसे उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में शामिल करने की दिशा में बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को विद्यालय का निरीक्षण कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि इस संस्थान को एक आदर्श मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि यह बिहार के सभी विद्यालयों के लिए प्रेरणास्रोत और अनुकरणीय बन सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालय के समग्र विकास के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए और उसके क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत भी माना जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालय परिसर की विभिन्न सुविधाओं का विस्तार से जायजा लिया और अधिकारियों से मौजूदा संसाधनों, आवश्यक सुधारों तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
विद्यालय पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने सबसे पहले शहीद देवीपद चौधरी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने स्मारक स्थल पर पुष्प अर्पित कर स्वतंत्रता और समाज निर्माण में उनके योगदान को नमन किया। इसके बाद उन्होंने विद्यालय के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण शुरू किया। इस दौरान कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल परिसर और अन्य आधारभूत संरचनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई।
निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री को विद्यालय में संचालित स्मार्ट स्टीम, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब की विस्तृत जानकारी दी गई। आधुनिक तकनीक से लैस इन प्रयोगशालाओं को देखकर मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त किया और कहा कि भविष्य की शिक्षा तकनीक आधारित होगी। ऐसे में विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तकनीकी शिक्षा को और मजबूत बनाया जाए ताकि छात्र-छात्राएं आधुनिक प्रतिस्पर्धी माहौल के लिए तैयार हो सकें।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बच्चों के कक्षाओं में जाकर उनसे सीधे संवाद भी किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, शैक्षणिक गतिविधियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने बच्चों से यह भी पूछा कि विद्यालय को मॉडल स्कूल बनाने के लिए वे क्या सुझाव देना चाहते हैं। छात्रों ने अपनी आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों की राय को गंभीरता से सुना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास का माध्यम बननी चाहिए। इसके लिए आधुनिक सुविधाएं, प्रेरक शिक्षण वातावरण और सक्षम शिक्षक आवश्यक हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मिलर स्कूल को आधुनिक सुविधाओं से पूरी तरह सुसज्जित किया जाए। इसके लिए आवश्यक आधारभूत संरचना का विकास प्राथमिकता पर किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण, पुस्तकालय के विस्तार और खेल सुविधाओं के उन्नयन पर विशेष जोर दिया। साथ ही उन्होंने विद्यालय परिसर के सौंदर्याकरण और स्वच्छता पर भी ध्यान देने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की पहचान केवल भवन से नहीं होती, बल्कि वहां उपलब्ध सुविधाओं, अनुशासन और शिक्षण गुणवत्ता से बनती है। यदि एक विद्यालय को आदर्श रूप में विकसित किया जाए, तो उसका प्रभाव पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मिलर स्कूल को इस स्तर तक विकसित किया जाए कि अन्य विद्यालय भी इससे प्रेरणा लें।
उन्होंने विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु अलग व्यवस्था विकसित करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में केवल स्कूली शिक्षा पर्याप्त नहीं है। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी प्रारंभिक स्तर से तैयार करना जरूरी है। इसके लिए विशेष मार्गदर्शन, अतिरिक्त अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी दिया कि शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। उनका मानना है कि अतिरिक्त अध्ययन सत्र और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां विद्यार्थियों के विकास में सहायक होंगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस समयावधि के दौरान पढ़ाई, समूह चर्चा और कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने मिलर स्कूल मैदान में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया ताकि शाम के समय भी गतिविधियां सुचारु रूप से चल सकें। उन्होंने कहा कि खेल और शारीरिक गतिविधियां भी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा हैं। बेहतर खेल सुविधाएं बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार के लिए लगातार कार्य कर रही है। राज्य के विद्यालयों में आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की दिशा में कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है।
इस अवसर पर , , , , , और सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विद्यालय की प्राचार्या भी इस दौरान उपस्थित रहीं।
पटना के इस ऐतिहासिक विद्यालय को मॉडल स्कूल बनाने की पहल बिहार की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो मिलर स्कूल न केवल राज्य बल्कि देश के उत्कृष्ट सरकारी विद्यालयों में अपनी पहचान बना सकता है। मुख्यमंत्री का यह संदेश स्पष्ट है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और बेहतर शिक्षण वातावरण के जरिए बिहार के छात्रों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।


