
भागलपुर स्थित में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम सह कार्यशाला ने देशभर के आम उत्पादक किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान किया। इस विशेष आयोजन का उद्देश्य आम की खेती से जुड़े किसानों को आधुनिक तकनीक, नई किस्मों और उन्नत उत्पादन पद्धतियों से जोड़ना था, ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो सके। कार्यक्रम में बिहार सरकार के ग्रामीण विकास सह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री ने शिरकत की और किसानों की मेहनत, नवाचार और समर्पण की खुलकर सराहना की।
राष्ट्रीय आम समागम में बिहार सहित देश के कई राज्यों से आम उत्पादक किसान पहुंचे। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के किसानों ने अपने बगीचों में तैयार की गई अलग-अलग प्रजातियों के आमों की प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी में पारंपरिक और नई विकसित किस्मों के आमों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। अलग-अलग रंग, स्वाद, आकार और खुशबू वाले आमों की विविधता ने इस आयोजन को खास बना दिया। किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बदलते मौसम और बाजार की मांग के अनुरूप वे नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान आम उत्पादन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें आम की उन्नत किस्मों का विकास, पौध प्रबंधन, रोग नियंत्रण, सिंचाई की आधुनिक तकनीक, जैविक खेती और उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों पर विशेषज्ञों ने किसानों को जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि आधुनिक अनुसंधान और तकनीकी सहायता के जरिए आम की खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
मंत्री श्रवण कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आम केवल एक फल नहीं बल्कि भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस समागम में पहुंचे किसान आम उत्पादन के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और अपने बगीचों में विभिन्न किस्मों का सफल उत्पादन कर रहे हैं। ऐसे किसान न केवल कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ा रहे हैं बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। उन्होंने किसानों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और नवाचार से बिहार की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं और ऐसे आयोजनों से किसानों को सीधे विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य की खेती ज्ञान, तकनीक और नवाचार पर आधारित होगी। इसलिए किसानों को समय के साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की मिट्टी और जलवायु बागवानी के लिए बेहद अनुकूल है। विशेष रूप से आम उत्पादन में बिहार की संभावनाएं काफी व्यापक हैं। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीक के साथ खेती करें, तो राज्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। सरकार की प्राथमिकता किसानों को प्रशिक्षण, संसाधन और विपणन सहायता उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
कार्यक्रम में उपस्थित ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि शोध को खेत तक पहुंचाना भी है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय आम की नई प्रजातियों और रोग प्रतिरोधक पौधों पर लगातार काम कर रहा है। आने वाले समय में किसानों को ऐसी किस्में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है जो कम लागत में अधिक उत्पादन दें और बाजार में बेहतर कीमत प्राप्त करें।
भागलपुर के सांसद ने कहा कि भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में बागवानी की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यदि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक मार्गदर्शन को अपनाया जाए, तो कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन किसानों के भविष्य के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे।
कार्यक्रम में सहित कई जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि आम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय आम समागम की सबसे खास बात यह रही कि यहां किसानों को केवल प्रदर्शनी देखने का अवसर ही नहीं मिला, बल्कि विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का मौका भी मिला। किसानों ने अपनी समस्याएं जैसे मौसम परिवर्तन, कीट प्रबंधन, लागत वृद्धि और बाजार अस्थिरता जैसे मुद्दे सामने रखे। विशेषज्ञों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए।
आज के समय में जलवायु परिवर्तन कृषि के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अनियमित वर्षा, बढ़ता तापमान और बदलते मौसम का सीधा असर फल उत्पादन पर पड़ रहा है। ऐसे में कृषि विश्वविद्यालय और वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। इस समागम ने किसानों को यह भरोसा दिलाया कि वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीक उनकी चुनौतियों का समाधान बन सकती है।
दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम का मूल उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और आम की खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। यह आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे किसानों को आधुनिक कृषि की नई दिशा मिली है और आम उत्पादन के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं।
भागलपुर के सबौर में आयोजित यह समागम बिहार के कृषि परिदृश्य के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है। यह स्पष्ट है कि जब किसान, वैज्ञानिक और सरकार एक मंच पर आते हैं, तो कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव संभव हो जाते हैं। आम की मिठास के साथ यह आयोजन किसानों के भविष्य में समृद्धि की नई उम्मीद भी लेकर आया है।


