
पटना: बिहार सरकार राज्य में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और नदियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए नई एवं आधुनिक जल नीति तैयार करने जा रही है। इस नीति के तहत आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ जल प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित बनाया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार मौजूदा जल संसाधन संस्थाओं की समीक्षा कर नई वाटर अथॉरिटी और अन्य आवश्यक संस्थानों के गठन पर विचार कर रही है। इसके लिए जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से स्टेट वाटर रिसोर्स रिफॉर्म फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है।
नई नीति का मुख्य उद्देश्य नदियों के जलस्तर की निगरानी और रिपोर्टिंग प्रणाली को आधुनिक बनाना है, ताकि बाढ़ और सूखे जैसी परिस्थितियों की समय पर सटीक जानकारी मिल सके और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
इस फ्रेमवर्क को तैयार करने के लिए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति में योजना एवं मॉनिटरिंग अंचल-4 के अधीक्षण अभियंता को सदस्य सचिव बनाया गया है। इसके अलावा लघु जल संसाधन, कृषि, पर्यावरण, नगर विकास, पीएचईडी और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
नई नीति में गिरते भूजल स्तर को सुधारने और नदी जल से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक एवं उपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देते हुए जल परियोजनाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि पुराने जल कानूनों को भी समयानुकूल बनाया जा सके।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ किसानों और शहरी क्षेत्रों को मिलेगा। नहरों के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सके।
इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों और शहरों के लिए भी जल आपूर्ति का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाएगा। डैम में सेंसर आधारित मीटर लगाए जाएंगे, जबकि नहरों में पानी की लीकेज रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इस फ्रेमवर्क के लागू होने के बाद बिहार जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर, सुरक्षित और तकनीक-सक्षम राज्य के रूप में उभरेगा।


