
विश्व मादक द्रव्य निषेध दिवस के अवसर पर नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान न्यायिक पदाधिकारियों, कर्मचारियों और आमजनों ने नशे से दूर रहने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नशा केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती है, जिससे लड़ने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक है।
यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भागलपुर के तत्वावधान में आयोजित किया गया। समारोह का उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग, अवैध तस्करी और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के प्रति लोगों को जागरूक करना था। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बताया गया कि नशे की लत व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालती है। यह केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करती है।
विश्व मादक द्रव्य निषेध दिवस हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि नशीले पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है और इससे सामाजिक अपराधों में भी वृद्धि होती है। इसी कड़ी में भागलपुर व्यवहार न्यायालय में आयोजित यह कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास माना गया।
समारोह के दौरान ने उपस्थित सभी न्यायिक पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं कर्मियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। शपथ के दौरान सभी ने यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में कभी भी नशीली दवाओं या किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी वचन दिया कि वे किसी अन्य व्यक्ति को भी नशे के लिए प्रेरित नहीं करेंगे।
शपथ ग्रहण के दौरान उपस्थित लोगों ने यह भी संकल्प लिया कि वे अपने परिवार, मित्रों, परिचितों और समाज के अन्य लोगों को भी नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करेंगे। कार्यक्रम में यह संदेश विशेष रूप से दिया गया कि जागरूकता ही नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है। यदि समाज का हर व्यक्ति अपने स्तर पर जागरूकता फैलाने का प्रयास करे, तो इस सामाजिक बुराई को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में कार्यालय परिसर को पूर्ण रूप से नशामुक्त बनाए रखने की भी शपथ ली गई। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वस्थ, सुरक्षित और सकारात्मक कार्य वातावरण बनाए रखने का संकल्प दोहराया। साथ ही अपने सहयोगियों को भी नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की बात कही।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में युवाओं के बीच नशीले पदार्थों का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। कई युवा गलत संगत, तनाव, बेरोजगारी या सामाजिक दबाव के कारण नशे की ओर आकर्षित हो जाते हैं। शुरुआत में यह एक आदत के रूप में शुरू होता है, लेकिन धीरे-धीरे गंभीर लत का रूप ले लेता है, जिससे बाहर निकलना बेहद कठिन हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार नशे की लत व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को कमजोर करती है। इससे निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है, व्यवहार में आक्रामकता बढ़ती है और कई बार व्यक्ति अपराध की दुनिया में भी प्रवेश कर सकता है। यही कारण है कि नशे की रोकथाम केवल स्वास्थ्य या कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय भी है।
ने अपने संबोधन में कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून के सहारे नहीं जीती जा सकती। कानून अवैध तस्करी और मादक पदार्थों के कारोबार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन जब तक समाज स्वयं जागरूक नहीं होगा, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी और सामाजिक सहयोग के बिना नशामुक्त समाज की कल्पना अधूरी है।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दें और खेल, शिक्षा, कौशल विकास तथा रचनात्मक गतिविधियों की ओर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए अनुशासन, आत्मविश्वास और सही सोच जरूरी है, न कि नशीले पदार्थों का सहारा।
कार्यक्रम में न्यायालय के कई अन्य न्यायिक पदाधिकारी, अधिकारी, कर्मचारी और कर्मी भी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में नशे के खिलाफ जनजागरूकता फैलाने और समाज को नशामुक्त बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने यह भी कहा कि नशे के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक लोग इससे बच सकें।
न्यायपालिका द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि सामाजिक परिवर्तन के लिए संस्थागत पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब न्यायालय जैसी संवैधानिक संस्थाएं समाज के हित में जागरूकता अभियान चलाती हैं, तो उसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।
आज के समय में मादक पदार्थों की अवैध तस्करी और नशे का फैलता नेटवर्क कई क्षेत्रों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। ऐसे में परिवार, विद्यालय, प्रशासन, सामाजिक संगठन और न्यायपालिका सभी की साझा जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सही मार्गदर्शन दें और उन्हें नशे से दूर रखें।
कुल मिलाकर, भागलपुर व्यवहार न्यायालय में आयोजित यह शपथ ग्रहण समारोह नशे के खिलाफ एक सशक्त संदेश देने में सफल रहा। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में सामूहिक चेतना को मजबूत करने का प्रभावी प्रयास साबित हुआ। यदि इसी प्रकार समाज का हर वर्ग जागरूक होकर आगे आए, तो एक स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त समाज का निर्माण निश्चित रूप से संभव है।


