
शहर में लगातार बनी जल-जमाव की समस्या और निर्माणाधीन परियोजनाओं की धीमी प्रगति को लेकर नगर निगम अब सख्त रुख में नजर आ रहा है। शहरवासियों को जलभराव, कीचड़ और निर्माण कार्यों से उत्पन्न परेशानियों से राहत दिलाने के उद्देश्य से 26 जून 2026 को एक उच्चस्तरीय संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण में नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की जमीनी स्थिति का बारीकी से आकलन किया और संबंधित एजेंसियों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
यह निरीक्षण विशेष रूप से शहर के उन इलाकों पर केंद्रित रहा जहां लंबे समय से जल निकासी की समस्या आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। निरीक्षण दल में महापौर, उप-महापौर, नगर आयुक्त, विभिन्न वार्ड पार्षदों और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। टीम ने शहर के महत्वपूर्ण स्थलों का दौरा करते हुए वर्तमान हालात का आकलन किया और मौके पर मौजूद तकनीकी अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान टीम सबसे पहले परिसर स्थित निर्माणाधीन एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) पहुंची। इसके बाद भोलानाथ पुल और बौंसी पुल के समीप चल रहे रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया। इन क्षेत्रों में लंबे समय से जल-जमाव और अधूरे निर्माण कार्यों के कारण स्थानीय लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई स्थानों पर स्थिति अपेक्षा से अधिक गंभीर है। खासकर भोलानाथ पुल के आसपास जल निकासी बाधित होने के कारण गंदा पानी जमा हो रहा है, जिससे दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और यातायात अवरोध जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों ने भी अधिकारियों के सामने अपनी शिकायतें रखीं और जल्द समाधान की मांग की।
नगर आयुक्त ने मौके पर ही रेलवे विभाग और निर्माण एजेंसियों को कड़े निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को 24 घंटे के भीतर प्राथमिक सुधारात्मक कार्य शुरू करने का आदेश दिया।
निरीक्षण में सबसे गंभीर मुद्दा रेलवे यार्ड स्थित एसटीपी के निष्क्रिय होने का सामने आया। वर्तमान स्थिति में गंदा पानी बिना उपचार के सीधे भोलानाथ पुल के पास नाले में छोड़ा जा रहा है। यही जल-जमाव का एक बड़ा कारण बन रहा है। इस पर नगर निगम ने रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिया कि गंदे पानी के डिस्चार्ज को तत्काल एसटीपी चेंबर की ओर डायवर्ट किया जाए और केवल उपचारित पानी ही बाहर निकाला जाए।
अधिकारियों ने माना कि यदि एसटीपी को शीघ्र पूरी क्षमता से चालू नहीं किया गया तो मानसून के दौरान स्थिति और खराब हो सकती है। जलभराव के कारण आसपास के घरों, दुकानों और सड़कों पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई गई।
रेलवे विभाग को दूसरा बड़ा निर्देश ड्रेनेज सिस्टम की सफाई को लेकर दिया गया। निरीक्षण में पाया गया कि भोलानाथ पुल और बौंसी पुल के नीचे रेलवे का ड्रेनेज नेटवर्क कई जगह पूरी तरह जाम हो चुका है। नालियों में मिट्टी, कचरा और निर्माण मलबा जमा होने के कारण पानी की निकासी बंद है। नगर निगम ने तत्काल सफाई अभियान चलाकर जल प्रवाह बहाल करने को कहा है।
इसके अलावा मानसून के बाद स्थायी समाधान के तौर पर रेलवे क्षेत्र में कच्चे नालों को पक्का बनाने का निर्देश दिया गया। नगर आयुक्त ने कहा कि संबंधित विभाग तुरंत प्राक्कलन तैयार करें ताकि कच्ची नालियों को पक्की संरचना में बदला जा सके। साथ ही उन स्थानों पर जहां पानी ओवरफ्लो होकर सड़क और रिहायशी इलाकों में पहुंच रहा है, लगभग एक मीटर ऊंची सुरक्षा दीवार बनाने का निर्देश भी दिया गया।
निरीक्षण के दौरान के अधिकारियों को भी कई दिशा-निर्देश दिए गए। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि जहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित है, वहां भी जल निकासी बाधित नहीं होनी चाहिए। ऐसे क्षेत्रों में अस्थायी कच्ची नालियां बनाकर पानी के बहाव की वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने को कहा गया।
निर्माण कार्य से उत्पन्न धूल और प्रदूषण को लेकर भी सख्ती दिखाई गई। नगर निगम ने निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिया कि पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए। सड़कों की नियमित सफाई की जाए और वाटर स्प्रिंकलर की मदद से धूल नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल आसपास के निवासियों और राहगीरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रही है।
पाइपलाइन शिफ्टिंग से जुड़े मुद्दों पर भी निरीक्षण के दौरान विस्तार से चर्चा हुई। नगर निगम ने और पुल निर्माण निगम को संयुक्त सर्वेक्षण जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। स्पष्ट रूप से कहा गया कि जब तक पाइपलाइन शिफ्टिंग का कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक निर्माण कार्य के अगले चरण की शुरुआत नहीं की जाएगी।
नगर निगम ने निर्माण एजेंसियों, जिनमें राम कंस्ट्रक्शन और हरदेव कंस्ट्रक्शन शामिल हैं, को भी जवाबदेह ठहराया। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि निरीक्षण के दौरान चिन्हित सभी सुधारात्मक उपायों पर तत्काल काम शुरू किया जाए और 24 घंटे के भीतर सचित्र अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
यह फोटो रिपोर्ट नगर निगम प्रशासन को सौंपना अनिवार्य किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्देश केवल कागजों तक सीमित न रहें। नगर आयुक्त ने साफ किया कि यदि तय समयसीमा में कार्य नहीं हुआ तो संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि इस निरीक्षण के बाद लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान तेज होगा। खासकर मानसून के मौसम में जल-जमाव से राहत मिलना शहर के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, नगर निगम का यह निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं बल्कि शहर की प्रमुख समस्याओं के समाधान की दिशा में एक निर्णायक पहल माना जा रहा है। यदि रेलवे, पुल निर्माण निगम और संबंधित एजेंसियां निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्देशों का पालन करती हैं, तो आने वाले दिनों में भोलानाथ पुल और बौंसी पुल क्षेत्र में जल-जमाव, धूल और अव्यवस्था जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी देखी जा सकती है।


