किसानों के हाथों शुरू हुई हाउस ऑफ मिथिला की उत्पादन इकाई, ‘नैवेद्यम’ ब्रांड से मखाने को मिलेगी वैश्विक पहचान

क्षेत्र के प्रसिद्ध मखाने को देश और दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सहरसा में हाउस ऑफ मिथिला की अत्याधुनिक उत्पादन इकाई का विधिवत शुभारंभ किया गया, जहां सबसे खास बात यह रही कि इस यूनिट का उद्घाटन किसी बड़े उद्योगपति या अधिकारी के बजाय किसानों के हाथों कराया गया। इस पहल ने स्पष्ट संदेश दिया कि संस्था अपने विकास मॉडल के केंद्र में किसानों को रखना चाहती है और उनकी भागीदारी के बिना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता।

सहरसा में आयोजित उद्घाटन समारोह में उत्साह और उम्मीद का माहौल देखने को मिला। 100 से अधिक स्थानीय किसान, ग्रामीण युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने। कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों की भी सक्रिय मौजूदगी रही। उपस्थित लोगों ने इसे सिर्फ एक उत्पादन इकाई की शुरुआत नहीं, बल्कि मिथिला क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए नए युग की शुरुआत बताया।

किसानों को केंद्र में रखकर बनाई गई नई रणनीति

हाउस ऑफ मिथिला ने शुरुआत से ही यह स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य केवल उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचना नहीं है। संस्था एक ऐसी आर्थिक श्रृंखला विकसित करना चाहती है जिसमें किसान, उत्पादक, प्रोसेसर और बाजार एक-दूसरे से सीधे जुड़े रहें। यही कारण है कि उत्पादन इकाई के उद्घाटन के लिए किसानों को प्राथमिकता दी गई।

संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि मखाना उत्पादन से जुड़े किसान वर्षों से मेहनत करते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। बिचौलियों और सीमित बाजार पहुंच के कारण किसानों की आय पर असर पड़ता है। हाउस ऑफ मिथिला इस स्थिति को बदलने के उद्देश्य से काम कर रहा है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।

‘नैवेद्यम’ ब्रांड के तहत तैयार होंगे प्रीमियम उत्पाद

नई उत्पादन इकाई में ‘नैवेद्यम’ ब्रांड के तहत उच्च गुणवत्ता वाले मखाना उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यह ब्रांड घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। संस्था का दावा है कि उत्पादन प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक, स्वच्छता मानक और गुणवत्ता नियंत्रण के सभी जरूरी पहलुओं का पालन किया जाएगा।

उद्घाटन के दिन उत्पादन इकाई में स्थापित सभी मशीनों का सफल ट्रायल रन किया गया। मशीनों की कार्यक्षमता की जांच के बाद आधिकारिक रूप से उत्पादन प्रक्रिया शुरू कर दी गई। यह यूनिट कच्चे मखाने की सफाई, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता परीक्षण जैसे कई चरणों पर काम करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट से मखाने की गुणवत्ता में सुधार होगा और उत्पादों की शेल्फ लाइफ भी बढ़ेगी। इससे बड़े रिटेल नेटवर्क और विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान होगी।

मखाना उद्योग को मिलेगा नया विस्तार

बिहार, विशेष रूप से मिथिला क्षेत्र, मखाना उत्पादन के लिए देशभर में जाना जाता है। लंबे समय से यह क्षेत्र भारत के कुल मखाना उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी निभाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में मखाने की मांग स्वास्थ्यवर्धक स्नैक के रूप में तेजी से बढ़ी है। प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण देश-विदेश में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है।

इसके बावजूद उत्पादन और विपणन के बीच मजबूत ढांचा विकसित नहीं हो पाया था। किसानों को स्थानीय मंडियों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां कीमतों में अस्थिरता बनी रहती थी। नई उत्पादन इकाई इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हाउस ऑफ मिथिला का मानना है कि यदि सही ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग रणनीति अपनाई जाए तो मखाना उद्योग बिहार की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

रोजगार सृजन की दिशा में बड़ा कदम

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू रोजगार सृजन भी है। उत्पादन इकाई के संचालन के लिए तकनीकी स्टाफ, पैकेजिंग कर्मी, गुणवत्ता विशेषज्ञ, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और प्रशासनिक कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। इससे स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर बनेंगे।

इसके अलावा परिवहन, पैकेजिंग सामग्री, सप्लाई चेन और वितरण नेटवर्क से जुड़े क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ेगा। ग्रामीण युवाओं के लिए यह अवसर खास मायने रखता है, क्योंकि इससे उन्हें अपने क्षेत्र में ही काम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने कहा कि यदि ऐसे उद्योग ग्रामीण इलाकों में स्थापित होते हैं तो रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन कम हो सकता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और परिवारों की आय में स्थिरता आएगी।

‘लोकल टू ग्लोबल’ मॉडल पर काम

हाउस ऑफ मिथिला ने अपनी कार्ययोजना को ‘लोकल टू ग्लोबल’ मॉडल पर आधारित बताया। इसका मतलब है कि स्थानीय स्तर पर उत्पादित कृषि वस्तुओं को बेहतर प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग के जरिए वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए।

संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि मिथिला की पहचान केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है। यहां के कृषि उत्पादों में भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने की क्षमता है। मखाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

नई यूनिट के माध्यम से संस्था ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, आधुनिक रिटेल चेन और अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क तक अपनी पहुंच मजबूत करने की योजना बना रही है। यदि यह मॉडल सफल होता है तो भविष्य में क्षेत्र के अन्य कृषि उत्पादों को भी इसी तरह बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है।

किसानों में बढ़ी उम्मीद

उद्घाटन समारोह में शामिल किसानों ने इस पहल का स्वागत किया और इसे क्षेत्र के लिए सकारात्मक बदलाव बताया। किसानों का कहना है कि यदि बाजार तक सीधी पहुंच और बेहतर मूल्य सुनिश्चित होता है तो कृषि आधारित उद्योगों में बड़ा परिवर्तन संभव है।

कई किसानों ने उम्मीद जताई कि इस उत्पादन इकाई के संचालन से मखाने की खरीद अधिक व्यवस्थित होगी और मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता आएगी। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा होगी।

क्षेत्रीय विकास में निभाएगी अहम भूमिका

हाउस ऑफ मिथिला की यह नई उत्पादन इकाई केवल मखाना उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास का भी एक मजबूत आधार बन सकती है। कृषि, उद्योग और रोजगार—इन तीनों क्षेत्रों को जोड़ने वाली ऐसी पहल ग्रामीण बिहार के विकास मॉडल को नई दिशा दे सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस तरह की और इकाइयां स्थापित होती हैं तो बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ मिल सकता है। कुल मिलाकर सहरसा में शुरू हुई यह उत्पादन इकाई किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार देने और मिथिला के मखाने को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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