
आरा/भोजपुर: चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच के तहत पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश Vinod Kumar Sinha की अध्यक्षता वाली जांच टीम बुधवार को भोजपुर के बिलौटी गांव पहुंची। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उनका पक्ष सुना।
जांच के दौरान उस समय भावुक माहौल बन गया जब टीम के साथ मौजूद STF कर्मियों को देखकर भरत तिवारी की मां आशा देवी नाराज हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर उनके बेटे की मौत का आरोप है, वही जांच के दौरान मौजूद थे।
“मेरे बेटे के हत्यारों को फांसी मिले”
आशा देवी ने जांच आयोग के सामने कहा कि उनके बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की जांच CBI से कराने और दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग दोहराई।
उनका कहना था कि न्यायिक जांच पर उन्हें भरोसा है, लेकिन निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए।
परिजनों के खिलाफ दर्ज FIR वापस
भरत तिवारी की मां ने बताया कि घटना के बाद परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी वापस ले ली गई है। हालांकि उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक परिवार न्याय की लड़ाई जारी रखेगा।
17 जून को हुआ था एनकाउंटर
गौरतलब है कि 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में गोली चलाई गई थी, जबकि परिजनों का आरोप है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था और उसके बाद गोली मारी गई।
घटना के बाद सामने आए वीडियो और विवाद के चलते मामले ने राज्यभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया। मामले में एसडीपीओ, थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया जा चुका है।
न्यायिक जांच पर टिकी सबकी नजर
अब न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाला जांच आयोग पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रहा है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एनकाउंटर पुलिस की आत्मरक्षा में हुई कार्रवाई थी या फिर परिजनों के आरोपों में दम है।


