
बिहार के जिले से जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर हाई-प्रोफाइल ठगी और आपराधिक साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के से करोड़ों रुपये की जमीन डील करने आए कारोबारियों को कथित तौर पर होटल में बंधक बनाकर जबरन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए और 51 लाख रुपये हड़पने की कोशिश की गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस घटना ने बिहार में जमीन कारोबार से जुड़े अपराधों और संगठित ठगी के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार पूरा मामला 5 करोड़ रुपये की एक बड़ी जमीन डील से जुड़ा है। नागपुर के कारोबारी सुनील काले और विजय वनवे अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने के सिलसिले में नवादा पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि जमीन का सौदा लगभग 5 करोड़ रुपये में तय हुआ था। लेनदेन की शर्तों के अनुसार एक हिस्सा ऑनलाइन भुगतान और शेष बड़ी रकम नकद देने की बात कही गई थी। इसी सौदे के बहाने आरोपियों ने पीड़ितों को बिहार बुलाया और एक सुनियोजित साजिश को अंजाम देने का प्रयास किया।
सुनील काले ने पुलिस को बताया कि वे पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और अपनी बेटी की उच्च शिक्षा के लिए धन जुटाना चाहते थे। उनकी योजना बेटी को जापान भेजने की थी, जिसके लिए लगभग 90 लाख रुपये की आवश्यकता थी। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए परिवार ने नागपुर स्थित पुश्तैनी जमीन बेचने का फैसला लिया था। इसी दौरान संपर्कों के माध्यम से जमीन खरीदने के इच्छुक लोगों से बातचीत शुरू हुई।
जानकारी के अनुसार रजौली क्षेत्र के एक बिचौलिए ने इस सौदे में अहम भूमिका निभाई। उसने नागपुर के जमीन मालिकों और बिहार के कथित खरीदारों के बीच संपर्क स्थापित कराया। शुरुआती बातचीत सकारात्मक रही और आरोपियों ने भरोसा जीतने के लिए खुद को बड़े कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया। दावा किया गया कि उनके पास गोल्ड प्रोसेसिंग यूनिट, कोयला कारोबार और बड़े निवेश की क्षमता है। इसी भरोसे के आधार पर डील आगे बढ़ी।
बताया जा रहा है कि जून के तीसरे सप्ताह में नागपुर से कारोबारी नवादा पहुंचे। उन्हें रजौली के एक होटल में ठहराया गया। शुरुआत में माहौल सामान्य रखा गया ताकि पीड़ितों को किसी साजिश का शक न हो। लेकिन 21 जून को स्थिति अचानक बदल गई। आरोप है कि मुख्य साजिशकर्ता ने अपने गनमैनों के साथ होटल पहुंचकर दबाव बनाना शुरू किया। कारोबारी और बिचौलिए को धमकाया गया, मारपीट की गई और जबरन कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए।
पीड़ितों के मुताबिक उनसे 51 लाख रुपये का चेक भी कटवाया गया। आरोप है कि बंदूक की नोक पर दबाव बनाकर यह सब कराया गया। डर का माहौल इतना गहरा था कि पीड़ितों को अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा। सुनील काले ने पुलिस को बताया कि मारपीट के बाद उन्होंने बाथरूम में जाकर अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर परिवार के मोबाइल नंबर लिख लिए थे। उनका डर यह था कि यदि उनकी हत्या कर शव कहीं फेंक दिया गया तो कम से कम पहचान संभव हो सके।
घटना ने और भी भयावह मोड़ तब लिया जब कथित तौर पर गोली मारने की धमकी दी गई। मामले में मौजूद कुछ लोगों ने दावा किया कि आरोपी ने पहले खुद को गोली मारकर झूठी कहानी बनाने और बाद में पीड़ितों को खत्म कर देने जैसी बातें भी कही थीं। इस धमकी ने पीड़ितों को पूरी तरह भयभीत कर दिया।
हालांकि किस्मत से पीड़ितों को भागने का मौका मिल गया। देर रात मौका देखकर सुनील काले, विजय वनवे और उनके साथ मौजूद बिचौलिया होटल से बाहर निकले और कार से वहां से फरार हो गए। वे लगातार सुरक्षित स्थान की तलाश में रहे। लेकिन दूसरी ओर आरोपी ने कहानी पलटने की कोशिश की और अगले दिन पुलिस थाने में झूठा मामला दर्ज करा दिया। आरोप लगाया गया कि नागपुर से आए लोग 51 लाख रुपये लेकर फरार हो गए हैं।
यहीं से मामले ने नया मोड़ लिया। पुलिस ने दोनों पक्षों के दावों की जांच शुरू की। जांच के दौरान होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। पुलिस को कहीं भी 51 लाख रुपये नकद लेनदेन या नोट गिनने वाली मशीन का कोई प्रमाण नहीं मिला। तकनीकी साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रारंभिक शिकायत संदिग्ध लगी।
इसके बाद पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज किए और पूरे घटनाक्रम को नए सिरे से जांचा। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उड़ीसा से पीड़ित पक्ष को बरामद किया और सुरक्षित हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में सामने आए तथ्यों ने कथित जमीन सौदे के पीछे बड़ी साजिश का खुलासा किया।
जांच के बाद मुख्य आरोपी पंकज सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी का आपराधिक इतिहास भी काफी गंभीर है। जांच में सामने आया कि उसका नाम पहले भी अपहरण, फिरौती और हत्या जैसे गंभीर मामलों में सामने आ चुका है। पुराने मामलों में उसे उम्रकैद की सजा भी सुनाई जा चुकी थी, हालांकि हाल के महीनों में उसे जमानत मिली थी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से जमीन सौदों के नाम पर लोगों को जाल में फंसाने की कोशिश कर रहा था। उसके खिलाफ कई अन्य शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिनमें जमीन दिखाकर लाखों रुपये ऐंठने के आरोप शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह कोई अकेली घटना नहीं बल्कि संगठित ठगी का हिस्सा हो सकता है।
मामले में एक और विवाद उस समय हुआ जब आरोपी की मेडिकल जांच कराई जा रही थी। अस्पताल परिसर में आरोपी के समर्थकों और परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस पर दबाव बनाने और आरोपी को छुड़ाने की कोशिश की गई। स्थिति बिगड़ती देख अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और हालात नियंत्रित किए गए। दो लोगों को हिरासत में लेकर अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है।
नागपुर से आए पीड़ितों ने पुलिस कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि वे इस पूरे घटनाक्रम को एक बुरे सपने की तरह देख रहे हैं। यदि समय रहते पुलिस सक्रिय नहीं होती तो उनके साथ कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस कथित जमीन सौदे में और कौन-कौन लोग शामिल थे। नवादा की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि बड़े निवेश और हाई-वैल्यू डील के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह अब नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में किसी भी बड़े आर्थिक सौदे से पहले दस्तावेजों और पक्षों की गहन जांच करना बेहद जरूरी हो गया है।


