बिहार में मानसिक रोगियों की स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी जवाबदेही; 3 हफ्ते बाद फिर होगी सुनवाई

पटना: बिहार में मानसिक रोगियों की स्थिति, उनके उपचार और पुनर्वास को लेकर पटना हाईकोर्ट लगातार गंभीर रुख अपनाए हुए है। इसी मामले में दायर जनहित याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। हालांकि इस मामले की अगली सुनवाई अब तीन सप्ताह बाद होगी।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य में मानसिक रोगियों की स्थिति को लेकर सुनवाई शुरू की थी।

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके परिणाम भी जमीन पर दिखाई देने चाहिए। अदालत ने राज्य में बढ़ती मानसिक रोगियों की संख्या और सड़कों पर बेसहारा घूम रहे मनोरोगियों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार को ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 1 अक्टूबर 2025 से मानसिक रोगियों के भोजन और दवाओं पर नियमित खर्च किया जा रहा है। बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान द्वारा दिसंबर 2025 में 144 प्रकार की दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराने की अधिसूचना भी जारी की गई थी।

सरकार ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने वाले मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2023-24 की तुलना में 2024-25 में आउटडोर मरीजों की संख्या 20 हजार से अधिक पहुंच गई है।

वर्तमान में राज्य के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में कुल 180 बेड उपलब्ध हैं, जिनमें 100 पुरुषों, 60 महिलाओं और 20 कैदियों के लिए आरक्षित हैं। सरकार ने अदालत को बताया कि बेड क्षमता बढ़ाने की योजना पर भी काम चल रहा है।

इसके अलावा टेली हेल्पलाइन सेवा के माध्यम से भी मानसिक रोगियों और उनके परिजनों को सहायता प्रदान की जा रही है। वर्ष 2022 से अब तक लगभग 36 हजार लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है।

राज्य सरकार के अनुसार, प्रशासन और पुलिस की मदद से पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में मानसिक रोगियों को उपचार के बाद उनके घर पहुंचाया गया है। वर्ष 2019 से 2025 के बीच 100 से अधिक महिला और पुरुष मनोरोगियों का सफल पुनर्वास किया गया, जबकि 2026 में भी कई मरीजों को इलाज के बाद उनके परिवारों तक पहुंचाया गया है।

हाईकोर्ट ने आम लोगों से भी अपील की थी कि यदि उनके आसपास कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति बेसहारा अवस्था में दिखाई दे तो इसकी सूचना 24 घंटे संचालित टोल-फ्री हेल्पलाइन पर दें, ताकि समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

अब अदालत इस मामले में तीन सप्ताह बाद फिर सुनवाई करेगी। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति और सुधारात्मक कदमों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करना होगा।

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