IIIT भागलपुर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा पर कार्यशाला आयोजित, शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान

भागलपुर स्थित में बुधवार को “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020” विषय पर एक दिवसीय संकाय विकास कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों और अकादमिक समुदाय को नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के विभिन्न आयामों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता से अवगत कराना था। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के बीच गहरे संबंधों पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम का आयोजन 24 जून 2026 को प्रातः 10 बजे संस्थान के व्याख्यान कक्ष में किया गया। कार्यशाला की शुरुआत सामूहिक रूप से वंदे मातरम् के गायन, दीप प्रज्ज्वलन और मंचासीन अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। पूरे आयोजन में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली, जिसने उपस्थित प्रतिभागियों के बीच एक सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण तैयार किया।

इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा चिंतक उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक ने की। इसके अलावा संस्थान के कुलसचिव भी विशेष रूप से मौजूद रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की महत्ता को और बढ़ा दिया।

कार्यशाला में कई विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। इनमें , , , और शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में मूल्यों, शोध, नवाचार और बहुविषयक शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. अतुल कोठारी ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल एक शैक्षणिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत के भविष्य के निर्माण का मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक और विद्यार्थी को इस नीति को गंभीरता से पढ़ना और समझना चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी या डिग्री प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, मूल्य संवर्धन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का विकास भी होना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा सदियों से भारत की बौद्धिक शक्ति का आधार रही है। यदि इसे आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ समन्वित किया जाए, तो देश एक मजबूत ज्ञान-आधारित समाज की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के भीतर कर्तव्यबोध, नैतिकता और राष्ट्रीय चेतना का विकास करें।

विशिष्ट अतिथि डॉ. राजू एम. टुग्नायत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के मूल्यांकन और परीक्षा प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नई नीति छात्रों के लिए शिक्षा को अधिक सरल, लचीला और उपयोगी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने विशेष रूप से सतत मूल्यांकन प्रणाली, सीखने के परिणामों और छात्र-केंद्रित शिक्षा मॉडल की सराहना की। उनके अनुसार यह नीति छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. मधुसूदन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य समाज और संस्कृति का पुनर्निर्माण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के चरित्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

कुलसचिव डॉ. धीरज कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, नवाचारोन्मुख और मूल्य आधारित बनाएगी। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल तत्वों को अपने शिक्षण और अनुसंधान में शामिल करें ताकि विद्यार्थियों को एक समग्र दृष्टिकोण प्राप्त हो सके।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने भारतीय दृष्टिकोण से शिक्षा, बहुविषयक अध्ययन, अनुसंधान, नवाचार और शिक्षक की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा की। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का भारतीय मॉडल केवल सूचना आधारित नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, चिंतन क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी पर आधारित होना चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद स्थापित किया। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, चुनौतियों और संभावनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। इस संवाद ने कार्यशाला को अधिक प्रभावी और ज्ञानवर्धक बना दिया।

कार्यक्रम का सफल संचालन और समन्वयन डॉ. चेतन बडे एवं श्री निलेश भारद्वाज द्वारा किया गया। आयोजकों के कुशल नेतृत्व और समर्पित प्रयासों से पूरा कार्यक्रम सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

अंत में आयोजकों ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, अध्यक्ष, कुलसचिव, विशेषज्ञ वक्ताओं और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चिंतन का महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। साथ ही इसने शिक्षकों को भारतीय दृष्टिकोण से शिक्षा के पुनर्संरचना और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

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