विश्वविद्यालय में शैक्षणिक अराजकता पर ABVP का अनोखा प्रदर्शन, कुलपति को चूड़ी भेंट कर जताया विरोध

विश्वविद्यालय में लगातार बढ़ रही शैक्षणिक अव्यवस्था, प्रशासनिक निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर (एबीवीपी) ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने कुलपति से मुलाकात कर विभिन्न समस्याओं को उनके सामने रखने का प्रयास किया, लेकिन लंबे समय तक मुलाकात नहीं होने और शिकायतों पर कार्रवाई न होने से नाराज कार्यकर्ताओं ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। परिषद के कार्यकर्ताओं ने कुलपति को चूड़ी भेंट कर विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया और छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

एबीवीपी का आरोप है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से शैक्षणिक अराजकता का माहौल बना हुआ है। छात्रों को बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं से लेकर प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। परीक्षा व्यवस्था, कक्षाओं का नियमित संचालन, छात्र हितों से जुड़े निर्णयों में देरी तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पारदर्शिता की कमी को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। परिषद का कहना है कि इन सभी मुद्दों को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

परिषद के कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से कुलपति से मिलने का प्रयास कर रहे थे ताकि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को सीधे उनके सामने रखा जा सके। हालांकि कुलपति के विश्वविद्यालय में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण मुलाकात संभव नहीं हो सकी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब कई दिनों बाद कुलपति विश्वविद्यालय पहुंचे, तब भी छात्रों की समस्याओं को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई दी। इसी रवैये ने छात्र संगठन के बीच नाराजगी और बढ़ा दी।

एबीवीपी नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीनता केवल प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उनका आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद समस्याओं पर कार्रवाई नहीं होना यह दर्शाता है कि प्रशासन छात्रों की चिंताओं को प्राथमिकता नहीं दे रहा। छात्र संगठन का कहना है कि जब संवाद के सभी लोकतांत्रिक रास्ते कमजोर पड़ जाते हैं, तब विरोध प्रदर्शन ही अपनी बात रखने का प्रभावी माध्यम बनता है।

इसी नाराजगी के बीच परिषद के कार्यकर्ताओं ने कुलपति को चूड़ी भेंट कर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। इस विरोध के पीछे संदेश स्पष्ट था कि यदि विश्वविद्यालय प्रमुख समस्याओं का समाधान करने और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें पद पर बने रहने पर पुनर्विचार करना चाहिए। छात्रों ने इसे प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ एक प्रतीकात्मक लेकिन कड़ा संदेश बताया।

एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में हाल के कुछ विवादित मामलों को भी अपने विरोध का आधार बनाया। परिषद ने आरोप लगाया कि पूर्व में में असामाजिक तत्वों द्वारा परिषद कार्यकर्ताओं पर हमला करने की कोशिश की गई थी। संगठन का कहना है कि यह घटना केवल छात्र संगठन पर हमला नहीं थी, बल्कि परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल थी। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कठोर कार्रवाई नहीं की गई।

इसके अलावा परिषद ने शिक्षक नीलेश कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई। संगठन के अनुसार इस मामले को लेकर पहले आवेदन दिया गया था और कई चरणों में आंदोलन भी किए गए थे। लेकिन अब तक संबंधित मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया। इस मुद्दे ने भी छात्र संगठन के भीतर असंतोष को और गहरा किया।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी और निष्क्रियता अब अस्वीकार्य हो चुकी है। उनका कहना था कि छात्रों की आवाज को लगातार नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है। विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं का उद्देश्य शिक्षा, अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना होता है, लेकिन जब वहीं अव्यवस्था और अनियमितता बढ़ने लगे तो छात्रों का आंदोलन स्वाभाविक हो जाता है।

एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री कुणाल पांडेय और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैप्पी आनंद ने संयुक्त रूप से कहा कि परिषद छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन का संघर्ष किसी व्यक्तिगत विरोध का हिस्सा नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों और बेहतर शैक्षणिक माहौल की बहाली के लिए है। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय में शिक्षा का वातावरण तभी मजबूत होगा जब प्रशासन जवाबदेह बने और भ्रष्टाचार के मामलों पर पारदर्शी कार्रवाई करे।

नेताओं ने यह भी कहा कि यदि आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन ने समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि परिषद छात्र हितों के लिए धरना, प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक माध्यमों का सहारा लेने से पीछे नहीं हटेगी।

प्रदर्शन में अमन रॉय, पीयूष भारती, ऋषि किशन, राजा यादव, अंकित आनंद, दिव्यांशु, अनमोल, सुमित, लक्ष्मण सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाबदेही तय करने और लंबित मामलों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।

यह विरोध प्रदर्शन विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि छात्र अब केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। वे समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई चाहते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस विरोध को किस तरह लेता है और छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाता है। फिलहाल एबीवीपी के इस अनोखे विरोध ने विश्वविद्यालय की आंतरिक व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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