पूर्व रेलवे ने बढ़ाई यात्री सुरक्षा और सुविधा, भागलपुर समेत कई सेक्शनों में तकनीकी अपग्रेड पूरा

पूर्व रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और रेल परिचालन को अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण तकनीकी उन्नयन कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। रेलवे प्रशासन का कहना है कि आधुनिक तकनीक और मजबूत संचार व्यवस्था के जरिए रेल यात्रा को पहले से अधिक सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध बनाया जा रहा है। इन सुधारों का उद्देश्य केवल रेल संचालन को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि प्रतिदिन लाखों यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना भी है।

कोलकाता से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्व रेलवे ने अपने विभिन्न रेल खंडों में कई आधुनिक तकनीकी और संचार आधारित परियोजनाओं को लागू किया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ये सभी कार्य पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में तेज गति से पूरे किए जा रहे हैं। रेलवे का फोकस अत्याधुनिक समय प्रबंधन, निर्बाध संचार, निगरानी प्रणाली और आपातकालीन बैकअप सिस्टम को मजबूत करना है, ताकि किसी भी परिस्थिति में रेल सेवाओं पर प्रतिकूल असर न पड़े।

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कई बार यात्रियों को दिखने वाले बदलाव बहुत छोटे लगते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे किए गए तकनीकी सुधार रेल सुरक्षा और समयपालन में बेहद बड़ी भूमिका निभाते हैं। स्टेशन की घड़ियों से लेकर सिग्नलिंग नेटवर्क, बैटरी बैकअप, फाइबर ऑप्टिक कनेक्टिविटी और वायरलेस संचार प्रणाली तक, हर स्तर पर उन्नयन किया गया है।

इसी क्रम में बरियारपुर स्टेशन पर एक नई जीपीएस प्लेटफॉर्म घड़ी स्थापित की गई है। यह घड़ी सीधे उपग्रह आधारित नेटवर्क से जुड़कर सेकंड तक की सटीक समय सूचना देती है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इससे यात्रियों को ट्रेन के समय की सही जानकारी मिलेगी और गलत समय दिखाने वाली पुरानी घड़ियों से होने वाली असुविधा काफी हद तक खत्म होगी। खासकर व्यस्त स्टेशनों पर यह तकनीक यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

भागलपुर रेलखंड में भी सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। भागलपुर–टिकानी सेक्शन में स्थित लेवल क्रॉसिंग गेट संख्या 1सी, 2सी और 3सी पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वॉयस लॉगर स्लेव फोन संचालित करने वाली 12V/120AH क्षमता की सेकेंडरी बैटरियों को नई बैटरियों से बदल दिया गया है। इस बदलाव से गेट संचालन के दौरान संचार व्यवस्था निर्बाध बनी रहेगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार लेवल क्रॉसिंग गेटों पर संचार व्यवस्था का मजबूत होना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी तकनीकी बाधा से सड़क और रेल यातायात दोनों प्रभावित हो सकते हैं। नई बैटरियों की स्थापना से बिजली बाधित होने की स्थिति में भी संचार प्रणाली सुचारु रूप से कार्य करती रहेगी, जिससे दुर्घटना की संभावना कम होगी और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

स्टेशन परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को भी नई तकनीक से सशक्त किया गया है। न्यू फरक्का स्टेशन के आरपीएफ परिसर में स्थित सीसीटीवी निगरानी प्रणाली के लिए 1.1 केवीए क्षमता वाला यूपीएस स्थापित किया गया है। यह बैकअप सिस्टम अचानक बिजली कटने की स्थिति में भी कैमरों को चालू रखेगा।

इस तकनीकी उन्नयन का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि निगरानी व्यवस्था बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा निगरानी लगातार सक्रिय रहने से यात्रियों, उनके सामान और स्टेशन परिसरों की सुरक्षा और मजबूत होगी। अपराध रोकथाम तथा त्वरित प्रतिक्रिया के लिहाज से यह बड़ा कदम माना जा रहा है।

पूर्व रेलवे ने अपनी डिजिटल नेटवर्क संरचना को भी व्यापक रूप से आधुनिक बनाया है। न्यू फरक्का स्टेशन स्थित आरपीएफ कार्यालय में रेलनेट कनेक्टिविटी के लिए ऑप्टिकल नेटवर्क यूनिट स्थापित की गई है। इसके अलावा मनीग्राम रिले रूम तक दो नेटवर्क स्विचों के माध्यम से इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार किया गया है।

इस अपग्रेडेशन से स्थानीय कर्मचारियों को आवश्यक डेटा, रिपोर्ट और परिचालन सूचनाओं का तेज और सुरक्षित आदान-प्रदान करने में सुविधा मिलेगी। रेलवे के लिए मजबूत डिजिटल नेटवर्क का मतलब है तेज निर्णय क्षमता, बेहतर निगरानी और परिचालन में अधिक दक्षता।

मौसम जनित बाधाओं से संचार व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए भी पूर्व रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। तिलडांगा और बोनीदांगा सेक्शन के बीच बिंदुबासिनी हॉल्ट पर आईबीएच कार्य के तहत अप और डाउन दोनों दिशाओं में 2×48 कोर फाइबर ऑप्टिकल केबल बिछाने का कार्य पूरा कर लिया गया है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भारी बारिश या प्रतिकूल मौसम के दौरान पारंपरिक संचार नेटवर्क प्रभावित हो सकता है, लेकिन नई फाइबर ऑप्टिक प्रणाली सिग्नलिंग संचार को अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनाए रखेगी। इससे ट्रेन संचालन में बाधाएं कम होंगी और समयपालन में सुधार आएगा।

गोड्डा–कटवा सेक्शन में भी विशेष क्वाड केबल बिछाने का कार्य पूरा किया गया है। इसके माध्यम से बीपीएसी और यूएफएसबीआई प्रणाली की इकाइयों को अधिक सुरक्षित मीडिया नेटवर्क पर स्थानांतरित किया गया है। यह प्रणाली ट्रैक उपलब्धता की दोहरी पुष्टि करती है, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होती है।

रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार ट्रैक क्लियरेंस की दोहरी पुष्टि सिग्नलिंग सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इससे गलत सिग्नल या संचालन संबंधी देरी को कम करने में मदद मिलती है और ट्रेन परिचालन अधिक सुरक्षित बनता है।

भागलपुर ईस्ट पैनल में पुराने वीएचएफ रेडियो सेट को हटाकर नया 25 वॉट क्षमता वाला वीएचएफ रेडियो सेट स्थापित किया गया है। यह नया सेट ट्रेन परिचालन प्रबंधन के दौरान अधिक स्पष्ट और निर्बाध वायरलेस संचार उपलब्ध कराएगा।

स्पष्ट रेडियो संचार रेल संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, विशेषकर उन परिस्थितियों में जब त्वरित निर्देश देना आवश्यक हो। बेहतर रेडियो सिस्टम से नियंत्रण कक्ष और फील्ड स्टाफ के बीच संवाद अधिक प्रभावी होगा।

इसके अलावा राजमहल सीएमएस में नया सीएमएस लिंक, जो राजमहल से जमालपुर तक जुड़ा है, शुरू कर दिया गया है। यह प्रणाली ट्रेन क्रू परिवर्तन की निगरानी और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएगी। अधिकारियों के अनुसार इससे ट्रेन संचालन में देरी कम होगी और समयपालन क्षमता में सुधार आएगा।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि पूर्व रेलवे हर यात्रा को सुरक्षा और भरोसे का वादा मानता है। उन्होंने कहा कि भूमिगत केबलों के उन्नयन, बैकअप सिस्टम की मजबूती और इलेक्ट्रॉनिक संचार नेटवर्क के विस्तार के जरिए एक अधिक सक्षम और आधुनिक रेलवे नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, पूर्व रेलवे द्वारा किए गए ये तकनीकी उन्नयन दिखाते हैं कि भारतीय रेलवे तेजी से स्मार्ट, डिजिटल और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रही है। भले ही इन सुधारों का बड़ा हिस्सा यात्रियों को सीधे दिखाई न दे, लेकिन इनके प्रभाव से अधिक सुरक्षित रेल पथ, बेहतर समयपालन, मजबूत निगरानी और विश्वसनीय संचार व्यवस्था सुनिश्चित होगी। आने वाले समय में ऐसे उन्नयन रेल यात्रा को और अधिक आधुनिक तथा यात्री-केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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