
रांची: CBSE कक्षा 12वीं के री-इवैल्यूएशन ने एक बार फिर मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड की राजधानी रांची स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) धुर्वा की छात्रा अवनी केजरीवाल ने री-इवैल्यूएशन के बाद ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है।
पहले घोषित परिणाम में अवनी को 500 में से 476 अंक (95.2%) मिले थे, लेकिन री-इवैल्यूएशन के बाद उनके अंकों में 24 नंबर की बढ़ोतरी हुई और अब उन्होंने 500 में 500 अंक हासिल कर ऑल इंडिया स्तर पर परफेक्ट स्कोर दर्ज किया है।
इंग्लिश में मिले थे सिर्फ 81 नंबर
13 मई को जारी हुए CBSE परिणाम में अवनी ने अकाउंटेंसी, इकोनॉमिक्स और एप्लाइड मैथेमेटिक्स में 100 में 100 अंक प्राप्त किए थे। हालांकि उनके पसंदीदा विषय इंग्लिश में मात्र 81 अंक और बिजनेस स्टडीज में 95 अंक दिए गए थे।
अपने परिणाम को देखकर अवनी संतुष्ट नहीं थीं। उन्हें विश्वास था कि इंग्लिश में उनके अंक वास्तविक प्रदर्शन के अनुरूप नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन कराने का फैसला किया।
री-इवैल्यूएशन के बाद बढ़े 24 अंक
री-इवैल्यूएशन के बाद इंग्लिश में 19 अंक और बिजनेस स्टडीज में 5 अंक बढ़े। इस तरह कुल 24 अंकों की बढ़ोतरी के साथ अवनी का स्कोर 476 से बढ़कर 500 हो गया।
अवनी ने कहा,
“इंग्लिश हमेशा से मेरा सबसे मजबूत विषय रहा है। 81 अंक देखकर मैं हैरान रह गई थी। मुझे विश्वास था कि मूल्यांकन में कहीं न कहीं गलती हुई है। री-इवैल्यूएशन के बाद मेरे अंक बढ़े और अब मैंने 500 में 500 अंक हासिल किए हैं।”
समय पर सही रिजल्ट मिलता तो मिल सकता था विदेशी कॉलेज में दाखिला
अवनी ने CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिणामों में हुई गलती का असर सीधे छात्रों के भविष्य पर पड़ता है।
उन्होंने कहा,
“अगर मुझे शुरुआत में ही 100 प्रतिशत अंक मिल गए होते, तो मैं सिंगापुर के एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कॉलेज में दाखिला ले सकती थी। अब उसकी समय सीमा निकल चुकी है।”
बिजनेस की दुनिया में बनाना चाहती हैं पहचान
रांची के प्रसिद्ध व्यवसायी मितेश केजरीवाल और पूनम केजरीवाल की बेटी अवनी का सपना पारंपरिक नौकरी करना नहीं बल्कि एक सफल उद्यमी बनना है।
CUET-UG परीक्षा दे चुकी अवनी अब दिल्ली या बेंगलुरु के किसी प्रतिष्ठित संस्थान से बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य अपने पिता के व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना और भविष्य में खुद एक सफल एंटरप्रेन्योर बनना है।
री-इवैल्यूएशन ने खड़े किए सवाल
अवनी के मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि जब एक छात्रा के अंक 24 तक बढ़ सकते हैं, तो ऐसे कितने छात्र होंगे जिनके भविष्य पर गलत मूल्यांकन का असर पड़ता होगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड को मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा त्रुटिरहित बनाने की जरूरत है।
रांची की बेटी अवनी केजरीवाल की यह उपलब्धि आज पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय बन गई है।


