किसान की बेटी ने रचा इतिहास! BPSC में बनी RTO अधिकारी, ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ भव्य स्वागत

कैमूर: कहते हैं कि मेहनत और लगन के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है। इसका जीता-जागता उदाहरण कैमूर जिले की बेटी मधुबाला कुमारी ने पेश किया है। साधारण किसान परिवार से आने वाली मधुबाला ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर क्षेत्रीय परिवहन पदाधिकारी (RTO) पद पर चयनित होकर पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है।

मंगलवार को जैसे ही मधुबाला कुमारी अपने गृह क्षेत्र पहुंचीं, कुदरा रेलवे स्टेशन पर उनका भव्य स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूल-मालाओं की बारिश और लोगों की भीड़ ने उनकी उपलब्धि को यादगार बना दिया। परिवार, रिश्तेदार और ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

किसान की बेटी ने रचा इतिहास! BPSC में बनी RTO अधिकारी, ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ भव्य स्वागत

कुदरा प्रखंड के डिहरा गांव की रहने वाली मधुबाला कुमारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। कठिन परिस्थितियों में लगातार मेहनत और अनुशासित पढ़ाई के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।

मधुबाला के पिता संतोष कुमार उर्फ पप्पू सिंह किसान हैं, जबकि माता संजू देवी गृहिणी हैं। चार भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर आने वाली मधुबाला को परिवार का पूरा सहयोग मिला, जिसने उनकी सफलता की राह आसान बनाई।

पांचवें प्रयास में मिली सफलता

मधुबाला ने बताया कि यह सफलता उन्हें पांचवें प्रयास में मिली है। उन्होंने कहा कि लगातार प्रयास और सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी है।

“निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। पांचवीं बार में मुझे यह सफलता मिली है। 70वीं BPSC परीक्षा में मैं RTO बनी हूं, लेकिन मेरा लक्ष्य अभी और बड़ा है। 71वीं BPSC में बेहतर रैंक लाकर SDM बनना चाहती हूं।” — मधुबाला कुमारी

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, नाना-नानी, छोटे भाई और शिक्षकों को दिया।

गांव में खुशी की लहर

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मधुबाला की सफलता की खबर मिलते ही डिहरा गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि मधुबाला ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो गांव की बेटियां भी बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर सकती हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि मधुबाला आज पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी सफलता से यह संदेश गया है कि सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकते।

मधुबाला की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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