
भोजपुर: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब नया मोड़ आ गया है। बिहार पुलिस ने स्वीकार किया है कि पूरी घटना में कुछ स्तर पर चूक हुई है। हालांकि यह चूक किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। मामले की जांच शाहाबाद रेंज के डीआईजी को सौंपी गई है।
पांच पुलिसकर्मी निलंबित, लेकिन ग्रामीणों में नाराजगी बरकरार
एनकाउंटर के बाद से भोजपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक रूप से बयान देने से बचते रहे हैं। अब तक थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। इसके बावजूद भरत भूषण तिवारी के परिजन और ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मामले में शामिल अन्य अधिकारियों, विशेषकर संबंधित डीएसपी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी वजह से गांव में आक्रोश और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।
“डीएसपी को गिरफ्तार किया जाए” : चंदन तिवारी
मृतक भरत भूषण तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी ने पूरे मामले में संबंधित डीएसपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में ज्यादा जांच की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भरत भूषण तिवारी के संघर्ष, उनके आरोप और मानसिक स्थिति से जुड़ी बातें उनके फेसबुक पोस्ट और लाइव वीडियो में दर्ज हैं।
चंदन तिवारी ने मांग की कि संबंधित डीएसपी को तत्काल गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका आरोप है कि व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण उनके भाई को निशाना बनाया गया।
आत्मसमर्पण के बाद एनकाउंटर पर उठाए सवाल
चंदन तिवारी ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भरत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था तो फिर उनकी मौत पुलिस एनकाउंटर में कैसे हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भरोसा दिलाने के बाद उनके भाई को धोखे से गोली मार दी।
“यदि भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था तो फिर उनकी मौत कैसे हुई? इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
— चंदन तिवारी, मृतक के भाई
पुलिस जांच और न्यायिक जांच दोनों जारी
गौरतलब है कि बिहार सरकार पहले ही इस मामले में न्यायिक जांच आयोग गठित कर चुकी है। वहीं पुलिस मुख्यालय ने भी मामले की अलग से जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही के संकेत मिलने के बाद पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।
गांव में अब भी बना हुआ है तनाव
भरत तिवारी की मौत के बाद से बिलौटी गांव में लगातार विरोध प्रदर्शन, कैंडल मार्च और महापंचायत जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब सभी की निगाहें डीआईजी जांच रिपोर्ट और न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि एनकाउंटर के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।


