
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। गोपालगंज और कैमूर (भभुआ) सहित कई जिलों में लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर घटना की न्यायिक जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
गोपालगंज में सैकड़ों लोगों का कैंडल मार्च
गोपालगंज में पोस्ट ऑफिस चौक से थाना चौक तक निकाले गए कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मोमबत्तियां और तख्तियां लेकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
लोगों का आरोप है कि यह कोई वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि एक सुनियोजित हत्या है। उनका कहना है कि भरत भूषण तिवारी ने कथित तौर पर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
- पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो।
- शामिल पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।
- दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए।
- स्पीडी ट्रायल के माध्यम से सख्त सजा दिलाई जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
भभुआ में भी निकला आक्रोश मार्च
कैमूर जिले के भभुआ में भी नगर पालिका मैदान से एकता चौक तक आक्रोश मार्च निकाला गया। मार्च में कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
पूर्व विधायक रिंकी रानी पांडेय ने कहा:
“भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सभी दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”
वहीं प्रदर्शनकारियों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और फांसी तक की मांग उठाई।
क्या है पूरा मामला?
17 जून को भोजपुर के बिलौटी गांव में पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी गोली लगने से घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस का दावा है कि भरत ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में गोली चलाई गई।
वहीं स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि भरत ने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था और इसके बाद उन्हें गोली मारी गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर भी कई लोग पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।
सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ने के बाद बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने घोषणा की है कि मामले की जांच एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश करेंगे।
इसके अलावा शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकर सहित कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। अब सभी की नजर न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना आत्मरक्षा में हुई पुलिस कार्रवाई थी या फिर एनकाउंटर प्रक्रिया में कोई गंभीर चूक हुई।


