विदाई समारोह में भावुक हुए डीएम नवल किशोर चौधरी, बोले— भागलपुर से बना आत्मीय रिश्ता हमेशा रहेगा याद

भागलपुर में आयोजित विदाई-सह-सम्मान समारोह उस समय भावनात्मक हो उठा जब निवर्तमान जिलाधिकारी ने अपने ढाई वर्षों के प्रशासनिक सफर को याद करते हुए अनुभव साझा किए। शहर के में आयोजित इस समारोह में प्रशासनिक और पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों और कर्मचारियों की बड़ी उपस्थिति रही। समारोह केवल औपचारिक विदाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसे प्रशासक के प्रति सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया, जिन्होंने अपने कार्यकाल में भागलपुर के प्रशासनिक ढांचे पर गहरी छाप छोड़ी।

समारोह में भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), वरीय पुलिस अधीक्षक, विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, नगर आयुक्त, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला स्तरीय और प्रखंड स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मियों की मौजूदगी इस बात का संकेत थी कि डॉ. चौधरी ने अपने कार्यकाल में केवल प्रशासनिक नेतृत्व ही नहीं किया, बल्कि लोगों के साथ आत्मीय संबंध भी स्थापित किए।

अपने विदाई संबोधन की शुरुआत करते हुए डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि भागलपुर में बिताए गए लगभग ढाई वर्षों का समय कब गुजर गया, उन्हें इसका एहसास ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण की सूचना मिलने के बाद ही उन्हें गहराई से महसूस हुआ कि भागलपुर और यहां के लोगों से उनका संबंध केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि भावनात्मक बन चुका है। उनके शब्दों में एक गहरा अपनापन झलक रहा था, जिसने समारोह में मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण गुण है। यदि किसी अधिकारी के भीतर संवेदना नहीं है, तो वह केवल मशीन की तरह कार्य करेगा। उनके अनुसार प्रशासन का वास्तविक उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को समझना और मानवीय दृष्टिकोण से समाधान प्रदान करना है। यही सोच उनके पूरे कार्यकाल की आधारशिला रही।

डॉ. चौधरी ने अपने पेशेवर जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि एक सर्जन के रूप में मिले अनुभवों ने उन्हें जीवन को अधिक मानवीय दृष्टि से देखना सिखाया। चिकित्सा क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने लोगों के दर्द, संघर्ष और उम्मीदों को करीब से समझा। यही अनुभव प्रशासनिक सेवा में भी उनके लिए मार्गदर्शक बना। उन्होंने कहा कि हर प्रशासनिक निर्णय के केंद्र में इंसान और उसकी जरूरतें होनी चाहिए।

अपने कार्यकाल की उपलब्धियों पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भागलपुर जिला प्रशासन की सफलताएं किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जिले ने विभिन्न प्रशासनिक मानकों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जो सफलता हासिल की है, वह पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने केवल दिशा देने और मार्गदर्शन करने का प्रयास किया, जबकि वास्तविक कार्य सभी अधिकारियों और कर्मियों ने मिलकर किया।

उन्होंने प्रशासनिक कार्यशैली पर भी विस्तार से अपने विचार साझा किए। डॉ. चौधरी ने कहा कि उन्होंने हमेशा पारदर्शिता, ईमानदारी और व्यावसायिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने कभी किसी अधिकारी पर अनैतिक कार्य करने का दबाव नहीं बनाया। उनके अनुसार प्रशासन की विश्वसनीयता तभी कायम रहती है जब निर्णय निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमसम्मत हों।

जन शिकायतों के समाधान को उन्होंने अपने कार्यकाल की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि आम नागरिक अंतिम उम्मीद लेकर जिला प्रशासन के पास आता है। जब कोई व्यक्ति अपनी समस्या लेकर प्रशासनिक कार्यालय पहुंचता है, तो उसके मन में न्याय और समाधान की अपेक्षा होती है। इसलिए जन शिकायतों का त्वरित और संवेदनशील समाधान प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

डॉ. चौधरी ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अपने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा पूरे प्रशासनिक तंत्र को एक परिवार की तरह देखा। उनके अनुसार प्रशासन तभी मजबूत बनता है जब टीम के भीतर विश्वास, सहयोग और संवाद बना रहे। उन्होंने कहा कि यदि उनकी कार्यशैली या निर्णयों से किसी अधिकारी या कर्मचारी को कभी कष्ट पहुंचा हो, तो वे उसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मंशा हमेशा बेहतर परिणाम और जनहित सुनिश्चित करने की रही।

उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग के लिए विशेष आभार व्यक्त किया। भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त और आईजी के मार्गदर्शन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्रशासनिक कार्यों को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा उन्होंने , उप विकास आयुक्त, नगर आयुक्त, अपर समाहर्ताओं, अनुमंडल पदाधिकारियों और सभी विभागीय अधिकारियों के सहयोग की सराहना की।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक दायित्व निभाते समय उन्होंने जिले के हर नागरिक को अपने परिवार का सदस्य माना। यही कारण था कि कई बार कठिन निर्णय लेने पड़े, लेकिन उन निर्णयों का उद्देश्य हमेशा व्यापक जनहित ही रहा। उन्होंने अधिकारियों से भी अपेक्षा जताई कि वे समस्याओं को संवेदनशीलता और समाधान केंद्रित दृष्टिकोण से देखें।

समारोह के दौरान डॉ. चौधरी ने स्थानांतरित हो रहे अन्य अधिकारियों को भी शुभकामनाएं दीं। विशेष रूप से पर्यटन विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार के लिए उन्होंने शुभकामनाएं व्यक्त कीं और विश्वास जताया कि बिहार के पर्यटन क्षेत्र में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. नवल किशोर चौधरी ने भागलपुर के अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया प्रतिनिधियों और जिलेवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भागलपुर से मिली आत्मीयता, सहयोग और स्नेह को वे जीवनभर याद रखेंगे। उनके भावुक शब्दों ने पूरे समारोह को भावनात्मक बना दिया।

भागलपुर में आयोजित यह विदाई समारोह एक बात स्पष्ट कर गया कि प्रभावी प्रशासन केवल नियमों से नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व, मानवीय सोच और टीम भावना से स्थापित होता है। डॉ. नवल किशोर चौधरी का कार्यकाल इसी संतुलित प्रशासनिक दृष्टिकोण का उदाहरण बनकर लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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