
आरा: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आरा से माले सांसद सुदामा प्रसाद ने इस पूरे मामले को संदिग्ध बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध तथ्यों और वीडियो फुटेज के आधार पर यह मामला कथित फर्जी एनकाउंटर जैसा प्रतीत होता है।
परिजनों से मिले सांसद, सुनी पूरी घटना
शुक्रवार को माले सांसद सुदामा प्रसाद के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल बिलौटी गांव पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने मृतक भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और परिवार का पक्ष सुना। इसके बाद आरा स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
‘गिरफ्तारी हुई तो एनकाउंटर कैसे?’
प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भरत भूषण तिवारी को पहले गिरफ्तार कर मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती कराया गया था, तो बाद में एनकाउंटर की बात सामने आने से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम में कई विरोधाभास हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
वीडियो फुटेज को बताया अहम सबूत
सुदामा प्रसाद ने दावा किया कि घटना से जुड़े वीडियो फुटेज मौजूद हैं, जिनसे कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये वीडियो सामने नहीं आते, तो पूरे मामले को सिर्फ पुलिस मुठभेड़ बताकर बंद करने की कोशिश की जा सकती थी।
विस्थापितों की आवाज उठाते थे भारत भूषण
माले सांसद ने कहा कि भरत भूषण तिवारी बक्सर जिले के जवनियां क्षेत्र के विस्थापित परिवारों के मुद्दों को लेकर सक्रिय थे और लगातार आवाज उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत भूषण ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन पर गोली चलाई गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
एनकाउंटर संस्कृति पर भी हमला
सुदामा प्रसाद ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था के नाम पर एनकाउंटर संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए, न कि उसे न्यायिक प्रक्रिया से पहले मौत के घाट उतार दिया जाए।
50 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग
माले सांसद ने मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी वर्तमान सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। साथ ही घटना में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की।
“यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है”
सुदामा प्रसाद ने कहा,
“किसी नौजवान को चारों तरफ से घेरकर गोली मार देना एनकाउंटर नहीं हो सकता। यह सीधा-सीधा हत्या का मामला है। दोषियों पर आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए।”
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में सभी की निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि आखिर इस मामले की सच्चाई क्या है और क्या निष्पक्ष जांच के जरिए सभी सवालों के जवाब मिल पाएंगे।


