बिहार सरकार देगी लद्दाख घूमने के लिए ₹20,000 तक की सहायता, जानिए सिंधु दर्शन योजना का पूरा विवरण

बिहार सरकार ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक नई पहल शुरू की है। “सिंधु दर्शन तीर्थयात्रा वित्तीय सहायता अनुदान योजना 2026” के तहत अब बिहार के लोग लद्दाख जाकर सिंधु नदी के दर्शन कर सकेंगे और यात्रा खर्च पर सरकार से आर्थिक सहायता भी प्राप्त कर सकेंगे।

क्या है सिंधु दर्शन योजना?

सम्राट कैबिनेट की मंजूरी के बाद शुरू की गई इस योजना के तहत बिहार के स्थायी निवासियों को लद्दाख स्थित सिंधु नदी के दर्शन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। यात्रा पूरी करने के बाद सरकार कुल खर्च का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹20,000 (जो कम हो) तक अनुदान देगी।

कौन उठा सकता है लाभ?

  • आवेदक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • यात्रा पूरी करने के बाद आवेदन करना होगा।
  • यात्रा खर्च से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

कैसे मिलेगा अनुदान?

यात्रा समाप्त होने के बाद श्रद्धालु को आवेदन जमा करना होगा। आवेदन की जांच और स्वीकृति के बाद पात्र व्यक्ति के खाते में अनुदान राशि भेजी जाएगी।

हर साल सिर्फ 100 लोगों को मिलेगा मौका

पर्यटन विभाग के अनुसार, योजना के तहत फिलहाल प्रति वर्ष 100 श्रद्धालुओं को ही लाभ दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया और विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।

क्यों शुरू की गई यह योजना?

सरकार का कहना है कि गंगा और सिंधु दोनों भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक हैं। बिहार गंगा सभ्यता का प्रमुख केंद्र रहा है, जबकि सिंधु नदी भारतीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ी हुई है। ऐसे में बिहारवासियों को सिंधु दर्शन और राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है।

अन्य राज्यों में पहले से चल रही हैं ऐसी योजनाएं

उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों में पहले से तीर्थयात्रा सहायता योजनाएं संचालित हैं। अब बिहार भी इस सूची में शामिल हो गया है।

योजना का मुख्य उद्देश्य

✔ धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देना
✔ बिहारवासियों को सिंधु दर्शन का अवसर देना
✔ आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को सहायता प्रदान करना
✔ गंगा और सिंधु की सांस्कृतिक विरासत से लोगों को जोड़ना

बड़ी बात: अब लद्दाख और सिंधु नदी का दर्शन करना बिहार के श्रद्धालुओं के लिए पहले की तुलना में काफी सस्ता और आसान हो जाएगा, क्योंकि यात्रा खर्च का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी।

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