
पटना, 18 जून 2026: बिहार में उद्योग, निवेश और रोजगार को नई रफ्तार देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सम्राट चौधरी कैबिनेट की बैठक में सहरसा, पूर्णिया और कैमूर जिलों में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न सिर्फ औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
बिहार लंबे समय से औद्योगिक विकास के मामले में कई चुनौतियों का सामना करता रहा है। रोजगार की कमी और उद्योगों के सीमित विस्तार के कारण बड़ी संख्या में युवाओं को दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता है। ऐसे में राज्य सरकार का यह निर्णय बिहार की आर्थिक तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सहरसा में औद्योगिक विस्तार को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने सहरसा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए वनगांव और देवनागोपाल मौजा में लगभग 420.63 एकड़ भूमि अधिग्रहण को मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना पर लगभग 88.01 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यहां आधुनिक सुविधाओं से लैस औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना है, जिससे छोटे और बड़े उद्योगों को स्थापित करने में सुविधा मिले।
सहरसा को कोसी क्षेत्र का प्रमुख जिला माना जाता है। यहां औद्योगिक विकास होने से आसपास के जिलों के लोगों को भी लाभ मिलेगा। स्थानीय व्यापार, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं पैदा होंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यहां खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और कृषि आधारित उद्योग लगाए जाते हैं, तो यह क्षेत्र तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत हो सकता है।
पूर्णिया में औद्योगिक निवेश को मिलेगा बढ़ावा
पूर्णिया जिले में नए औद्योगिक क्षेत्र के विकास का रास्ता भी अब साफ हो गया है। कैबिनेट ने करीब 1.25 अरब रुपये की लागत से भूमि अधिग्रहण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह परियोजना सीमांचल क्षेत्र के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
पूर्णिया पहले से ही व्यापारिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां बेहतर औद्योगिक आधारभूत संरचना विकसित होने से निजी निवेशकों का रुझान बढ़ सकता है। सड़क, बिजली, जलापूर्ति और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाओं के विकास से उद्योग स्थापित करना आसान होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्णिया में वस्त्र उद्योग, कृषि उत्पाद प्रसंस्करण, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े उद्योगों के लिए अपार संभावनाएं हैं। इससे न सिर्फ स्थानीय रोजगार बढ़ेगा बल्कि सीमांचल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कैमूर में एक्सप्रेसवे के पास बनेगा बड़ा औद्योगिक क्षेत्र
कैमूर जिले के चांद और चैनपुर अंचल में केंद्र सरकार की प्रस्तावित वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे परियोजना के समीप बड़े औद्योगिक क्षेत्र के विकास का फैसला लिया गया है। इसके लिए 781.18 एकड़ भूमि अधिग्रहण की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना पर लगभग 230.64 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने का सबसे बड़ा फायदा बेहतर कनेक्टिविटी के रूप में मिलेगा। उद्योगों के लिए परिवहन लागत कम होगी और कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक की सप्लाई आसान होगी। यही कारण है कि सरकार को उम्मीद है कि यह क्षेत्र निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
कैमूर का भौगोलिक स्थान इसे व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बेहतर संपर्क इसे औद्योगिक हब बनाने में सहायक हो सकता है। यहां मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और निर्माण आधारित उद्योगों की बड़ी संभावनाएं देखी जा रही हैं।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
इन तीनों जिलों में औद्योगिक क्षेत्र बनने से सबसे बड़ा लाभ रोजगार के रूप में देखने को मिलेगा। उद्योग स्थापित होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कारखानों में तकनीकी और गैर-तकनीकी नौकरियों के अलावा परिवहन, होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों में भी रोजगार पैदा होगा।
बिहार के युवाओं के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि अब रोजगार के लिए बाहर जाने की मजबूरी कुछ हद तक कम हो सकती है। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
निवेशकों के लिए बेहतर माहौल बनाने की तैयारी
राज्य सरकार लगातार निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में काम कर रही है। औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में सुधार, बिजली आपूर्ति को मजबूत करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
उद्योग विभाग का मानना है कि यदि निवेशकों को अनुकूल वातावरण मिला तो बिहार आने वाले वर्षों में बड़े निवेश का केंद्र बन सकता है। इससे राज्य की आय बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
बिहार के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य बिहार के औद्योगिक आधार को मजबूत करना, निवेश को आकर्षित करना और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है। सहरसा, पूर्णिया और कैमूर में बनने वाले नए औद्योगिक क्षेत्र आने वाले समय में राज्य के आर्थिक विकास की नई कहानी लिख सकते हैं।
यदि योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो बिहार न केवल कृषि आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित रहेगा बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में भी मजबूत पहचान बना सकेगा। यह फैसला राज्य के विकास को नई दिशा और नई गति देने वाला साबित हो सकता है।


