शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिवार में सहायता राशि को लेकर विवाद, पिता ने उठाए गंभीर सवाल

पटना, 18 जून 2026। असम में हुए विमान हादसे में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के बलिदान ने पूरे बिहार को गर्व और शोक, दोनों भावनाओं से भर दिया। एक ओर देश ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से विदाई दी, वहीं दूसरी ओर शहीद के परिवार में आर्थिक सहायता राशि को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शहीद के पिता अमरेंद्र शर्मा ने सरकार की ओर से दी गई 21 लाख रुपये की सहायता राशि को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह राशि शुभम की कथित पत्नी श्रेया राय को सौंप दी गई, जबकि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी तक नहीं दी गई।

पिता का कहना है कि बेटे की शहादत का दुख पहले से ही असहनीय है, लेकिन अब आर्थिक सहायता को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया है, उसने परिवार के जख्मों को और गहरा कर दिया है। उनका दर्द शब्दों में साफ झलकता है। वे कहते हैं कि उन्होंने अपना बेटा खो दिया और अब सहायता से भी वंचित कर दिया गया।

बेटे की शहादत के बाद टूट पड़ा दुखों का पहाड़

फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, पूरे घर में मातम पसर गया। परिवार के लिए यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी। शुभम केवल परिवार का बेटा नहीं था, बल्कि पूरे घर की आर्थिक और भावनात्मक ताकत भी था।

पिता अमरेंद्र शर्मा बताते हैं कि परिवार आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है। शुभम की नौकरी और भविष्य की योजनाओं से पूरे परिवार को सहारा मिलने की उम्मीद थी। उनका कहना है कि बेटा देश सेवा में शहीद हो गया, इस पर गर्व है, लेकिन उसके जाने के बाद घर की जिम्मेदारियां और भी कठिन हो गई हैं।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि शुभम हमेशा अपने माता-पिता और घर के भविष्य को लेकर गंभीर रहता था। वह चाहता था कि परिवार बेहतर जीवन जी सके और सभी आवश्यक जरूरतें पूरी हो सकें।

21 लाख की सहायता राशि पर शुरू हुआ विवाद

शहीदों के परिजनों के लिए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता की घोषणा की जाती है ताकि परिवार को कठिन समय में सहयोग मिल सके। इसी क्रम में शुभम कुमार के परिवार के लिए भी 21 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई थी।

लेकिन यही सहायता राशि अब विवाद का कारण बन गई है। पिता अमरेंद्र शर्मा का आरोप है कि यह राशि कथित पत्नी श्रेया राय को सौंप दी गई, जबकि परिवार को इसकी कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई।

उनका कहना है कि अगले दिन जब उन्हें इस संबंध में जानकारी मिली, तब उन्होंने संबंधित अधिकारी से संपर्क किया। वहां उन्हें पता चला कि चेक पहले ही सौंपा जा चुका है। इस जानकारी ने परिवार को और अधिक आहत कर दिया।

पिता बोले— हमें बताया तक नहीं गया

अमरेंद्र शर्मा का सबसे बड़ा आरोप प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर है। उनका कहना है कि यदि सहायता राशि दी जानी थी तो परिवार को विश्वास में लिया जाना चाहिए था।

वे कहते हैं कि उन्हें न तो प्रशासन की ओर से कोई सूचना दी गई और न ही राशि सौंपे जाने की प्रक्रिया में शामिल किया गया। उनका आरोप है कि परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के बावजूद उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखा गया।

उनके अनुसार, यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है बल्कि सम्मान और विश्वास का भी प्रश्न है। बेटे की शहादत के बाद परिवार को सहयोग मिलने की उम्मीद थी, लेकिन घटनाक्रम ने उल्टा उन्हें असहाय महसूस कराया।

श्रेया राय को लेकर पिता का पक्ष

शुभम कुमार के पिता ने श्रेया राय को लेकर संतुलित लेकिन भावुक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि शुभम ने वास्तव में श्रेया से विवाह किया था, तो वे उसे अपनी बहू मानते हैं और सहायता राशि पाने का अधिकार भी हो सकता है।

हालांकि उनका कहना है कि रिश्ते केवल कानूनी दस्तावेजों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों से भी तय होते हैं। पिता ने सवाल उठाया कि यदि श्रेया पत्नी थीं, तो उन्हें परिवार के साथ रहकर दुख की इस घड़ी में साथ देना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि पति के श्राद्धकर्म से पहले ही सहायता राशि लेकर चले जाना परिवार के लिए पीड़ादायक रहा। उनके अनुसार, इस व्यवहार ने परिवार के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रेम संबंध और शादी की थी तैयारी

परिजनों के अनुसार शुभम कुमार और श्रेया राय लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और दोनों के बीच प्रेम संबंध था। परिवार भी इस रिश्ते से परिचित था और विवाह को लेकर सहमत था।

बताया जा रहा है कि इसी वर्ष नवंबर में दोनों की शादी तय थी। हालांकि परिवार में दादी के निधन के कारण विवाह को टालकर वर्ष 2027 की होली के आसपास करने की योजना बनाई गई थी।

यही कारण है कि परिवार अब कोर्ट मैरिज के दावे को लेकर असमंजस में है। उनका कहना है कि यदि कोर्ट मैरिज हुई थी, तो इसकी आधिकारिक जानकारी परिवार को क्यों नहीं दी गई। इसी प्रश्न ने पूरे विवाद को और जटिल बना दिया है।

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

अब शहीद के परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सहायता राशि वितरण की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए और यह बताया जाए कि किन दस्तावेजों और आधारों पर राशि सौंपी गई।

परिवार चाहता है कि प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य सामने रखे ताकि विवाद खत्म हो सके। उनका कहना है कि शहीद परिवार के साथ किसी भी स्तर पर अन्याय नहीं होना चाहिए।

कई स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में संवेदनशीलता बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि शहीद परिवार पहले ही गहरे सदमे में है, ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त सावधानी बरती जानी चाहिए थी।

रक्षा मंत्री से लगाई मदद की गुहार

अमरेंद्र शर्मा ने रक्षा मंत्री से परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बेटे की शहादत देश के लिए गर्व का विषय है, लेकिन उसके बाद परिवार को बेसहारा महसूस नहीं होना चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों इस मामले को संवेदनशीलता से देखेंगी और परिवार को न्याय दिलाने में मदद करेंगी।

फिलहाल यह मामला केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रह गया है। यह शहीद परिवार के सम्मान, प्रशासनिक पारदर्शिता और संवेदनशीलता से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन चुका है। आने वाले दिनों में प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच की दिशा तय करेगी कि इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकलता है।

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