
पटना, 18 जून 2026। बिहार सरकार द्वारा सुशासन, प्रशासनिक सुधार और नीति निर्माण की प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना को राज्य के भविष्य के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को पटना के अधिवेशन भवन स्थित पुराना सचिवालय परिसर में मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के अंतर्गत चयनित युवाओं के लिए एक विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशासनिक विशेषज्ञों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और चयनित फेलोज़ को उनकी जिम्मेदारियों, कार्यप्रणाली तथा शासन व्यवस्था में उनकी भूमिका से अवगत कराया।
यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक परिचय सत्र नहीं था, बल्कि इसे बिहार के भविष्य के निर्माण से जुड़े युवाओं के लिए एक मार्गदर्शन मंच के रूप में देखा गया। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वर्ष 2047 तक विकसित बिहार की परिकल्पना को साकार करने में मुख्यमंत्री फेलोज़ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
विकसित बिहार 2047 की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास
ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव और बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी के मिशन निदेशक डॉ. बी. राजेन्दर ने कहा कि मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना केवल एक रोजगार आधारित पहल नहीं है, बल्कि यह राज्य के प्रशासनिक तंत्र और नीति निर्माण प्रक्रिया को नई सोच एवं ऊर्जा प्रदान करने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने वर्ष 2047 तक राज्य को विकास के नए मानकों तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवा प्रतिभाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री फेलोज़ प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझते हुए न केवल सीखेंगे बल्कि अपने विचारों और नवाचारों के माध्यम से शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में योगदान भी देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के चुनिंदा राज्यों में ही ऐसी योजनाएं संचालित हो रही हैं और बिहार ने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई है। योजना का उद्देश्य केवल प्रतिभाओं का चयन करना नहीं बल्कि उन्हें प्रशासनिक सुधारों का सक्रिय भागीदार बनाना है।
जमीनी स्तर पर बदलावों को समझने का मिलेगा अवसर
कार्यक्रम में मौजूद विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने चयनित फेलोज़ को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी नीति या योजना की वास्तविक सफलता उसके जमीनी प्रभाव से तय होती है। इसलिए मुख्यमंत्री फेलोज़ को केवल कार्यालयों तक सीमित न रहकर लोगों के बीच जाकर योजनाओं के प्रभाव का अध्ययन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर संचालित सहयोग शिविर, सेवा वितरण कार्यक्रम और जनकल्याण योजनाएं फेलोज़ के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय हो सकती हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सुविधाओं और सेवाओं को पहुंचाना है।
उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उनके द्वारा किया गया प्रत्येक सकारात्मक प्रयास समाज और शासन व्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ सकता है। यदि वे अपने कार्य को राष्ट्र सेवा की भावना से करेंगे तो उनका योगदान केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह राज्य और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रशासनिक सुधार और सुशासन को मिलेगा नया आयाम
मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना का मूल उद्देश्य प्रशासनिक सुधारों को बढ़ावा देना, क्षमता निर्माण को मजबूत करना और शासन व्यवस्था में नवाचार को प्रोत्साहित करना है। राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान केवल पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए नई सोच, डेटा आधारित विश्लेषण और तकनीकी दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
योजना के अंतर्गत चयनित युवा विभिन्न विभागों, कार्यालयों और प्रशासनिक इकाइयों में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर कार्य करेंगे। इससे उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया को नजदीक से समझने और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवा पेशेवरों की भागीदारी से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में नई ऊर्जा आएगी तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बन सकेगी।
आईआईएम बोधगया के सहयोग से तैयार हुआ कार्यक्रम
मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना की विशेषता यह है कि इसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बोधगया के सहयोग से विकसित किया गया है। इस साझेदारी का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में आधुनिक प्रबंधन सिद्धांतों और व्यावसायिक दक्षता को शामिल करना है।
आईआईएम बोधगया के विशेषज्ञों द्वारा चयनित फेलोज़ को विभिन्न प्रशिक्षण मॉड्यूल, शोध पद्धतियों, नीति विश्लेषण और परियोजना प्रबंधन से संबंधित विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इससे प्रतिभागियों को प्रशासनिक चुनौतियों को समझने और उनके समाधान विकसित करने में सहायता मिलेगी।
सरकार का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों और प्रशासनिक तंत्र के बीच इस प्रकार का सहयोग शासन व्यवस्था को अधिक आधुनिक और परिणाम आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कठोर चयन प्रक्रिया के बाद हुआ उम्मीदवारों का चयन
मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के लिए राज्यभर और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन प्रक्रिया को बहुस्तरीय और प्रतिस्पर्धात्मक बनाया गया था ताकि केवल योग्य और प्रतिभाशाली उम्मीदवारों का चयन किया जा सके।
योजना के तहत कुल 121 फेलोज़ नियुक्त किए जाने का प्रावधान रखा गया था। हालांकि विस्तृत मूल्यांकन, लिखित परीक्षण, साक्षात्कार और अन्य प्रक्रियाओं के बाद 106 उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया गया।
चयनित उम्मीदवार विभिन्न शैक्षणिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमियों से आते हैं। इनमें प्रशासन, प्रबंधन, इंजीनियरिंग, सामाजिक विज्ञान, नीति अध्ययन, डेटा विश्लेषण और विकास क्षेत्र से जुड़े युवा पेशेवर शामिल हैं।
दो वर्षों तक प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ेंगे फेलोज़
योजना के अंतर्गत चयनित अर्ली और मिड-कैरियर प्रोफेशनल्स को दो वर्षों के लिए प्रशासनिक तंत्र के विभिन्न स्तरों पर नियुक्त किया गया है। इस अवधि के दौरान वे राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं और नीति निर्माण प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से योगदान देंगे।
मुख्यमंत्री सचिवालय और उपमुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात फेलोज़ को उच्च स्तर की नीतिगत प्रक्रियाओं के साथ कार्य करने का अवसर मिलेगा। वहीं मुख्य सचिव कार्यालय, विकास आयुक्त कार्यालय, विभिन्न विभागों, प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालयों, जिला पदाधिकारी कार्यालयों और नगर निगम कार्यालयों में नियुक्त फेलोज़ को प्रशासनिक क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को समझने का मौका मिलेगा।
यह अनुभव उन्हें भविष्य में नीति विशेषज्ञ, प्रशासनिक सलाहकार और विकास प्रबंधन पेशेवर के रूप में बेहतर अवसर प्रदान कर सकता है।
शासन व्यवस्था में नवाचार की नई शुरुआत
बिहार सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना केवल युवाओं को अवसर देने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में नवाचार, शोध और साझेदारी को बढ़ावा देने का एक व्यापक प्रयास है। चयनित फेलोज़ के सुझावों और अनुभवों का उपयोग योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, सेवा वितरण में सुधार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए किया जाएगा।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान फेलोज़ को प्रशासनिक संरचना, कार्य संस्कृति, अपेक्षित जिम्मेदारियों और राज्य सरकार की विकास प्राथमिकताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि आने वाले वर्षों में बिहार को विकसित राज्य बनाने की दिशा में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होगी।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के माध्यम से तैयार होने वाला यह युवा नेतृत्व न केवल बिहार के विकास में योगदान देगा, बल्कि सुशासन और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में एक नई मिसाल भी स्थापित करेगा।


