बिहार को मिलेगी विकास की नई रफ्तार: केंद्र-राज्य समन्वय से कृषि और ग्रामीण विकास को मिलेगा बड़ा बल

पटना, 17 जून 2026। बिहार में कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, मनरेगा भुगतान, आवास योजनाओं और कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय बिहार के सर्वांगीण विकास का आधार बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों सरकारों के संयुक्त प्रयासों से राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा। बैठक में कृषि, ग्रामीण विकास और जनकल्याण से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

1 जुलाई से पूरी तरह लागू होगी वीबीजीआरएएम योजना

बैठक में निर्णय लिया गया कि ग्रामीण विकास को नई दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी वीबीजीआरएएम (VBGRAM) योजना को 1 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे गांवों में विकास की गति तेज होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और गांवों में जीवन स्तर सुधारने के लिए कई योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है।

मनरेगा की लंबित राशि का भुगतान 30 जून तक

बैठक में मनरेगा मजदूरों से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि मनरेगा की सभी लंबित राशियों का भुगतान केंद्र सरकार के सहयोग से 30 जून 2026 से पहले सुनिश्चित किया जाएगा। इससे लाखों ग्रामीण श्रमिकों को राहत मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों के हितों की रक्षा करना है और किसी भी पात्र लाभार्थी को भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस निर्णय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी क्योंकि मजदूरों के हाथों में सीधे धन पहुंचेगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना को मिलेगी रफ्तार

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 और प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में एक करोड़ चार लाख लोगों की पहचान की गई है, जिनमें लगभग 60 लाख लोग योजना के लिए पात्र पाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पात्र गरीब परिवारों को जल्द से जल्द पक्का मकान उपलब्ध कराया जाए। नए वित्तीय वर्ष में आवास निर्माण की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक परिवारों को इसका लाभ मिल सके।

जीविका दीदियों को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर

बैठक में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि जीविका दीदियों को “लखपति दीदी” बनाने के अभियान में बिहार देश में पहले स्थान पर है। राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। सरस मेले जैसे आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अपने उत्पादों की बिक्री कर रही हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। केंद्र सरकार भी इन प्रयासों में सहयोग करेगी।

कृषि क्षेत्र में स्थापित होंगे उत्कृष्टता केंद्र

कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए राज्य में विशेष कृषि उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने टमाटर और प्याज जैसी फसलों के लिए विशेष सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

बैठक में यह भी तय हुआ कि प्याज, टमाटर, आम सहित अन्य कृषि उत्पादों के लिए आधुनिक तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा देने वाले आदर्श केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को उन्नत खेती, बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और बाजार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ेंगे बिहार के किसान

बैठक का एक महत्वपूर्ण निर्णय बिहार के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने से जुड़ा रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के फलों और कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाएगा ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके।

उन्होंने कहा कि बिहार में बागवानी क्षेत्र की अपार संभावनाएं हैं। विशेष रूप से आम, मखाना और अन्य उत्पादों की वैश्विक मांग को देखते हुए इनके निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और बिहार कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान बना सकेगा।

एकीकृत खेती मॉडल पर रहेगा विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार कृषि रोडमैप को अपनाने वाला देश का पहला राज्य रहा है। इसी उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए अब राज्य में एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) मॉडल पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य बिहार को इस क्षेत्र में मॉडल राज्य के रूप में विकसित करना है। इसके तहत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी को एक साथ जोड़कर किसानों की आय के विविध स्रोत विकसित किए जाएंगे। इससे खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सकेगी।

जल संरक्षण और मिट्टी संरक्षण पर फोकस

बैठक में पर्यावरण संरक्षण और कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए विभिन्न वाटरशेड परियोजनाओं तथा मिट्टी संरक्षण कार्यक्रमों को तेज गति से लागू करने का निर्णय लिया गया। सरकार का मानना है कि जल संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने से कृषि उत्पादन में दीर्घकालिक वृद्धि संभव होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच ऐसी योजनाएं किसानों को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

बिहार के विकास के लिए केंद्र सरकार का पूरा सहयोग

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री की बातों से सहमति जताते हुए आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार बिहार के कृषि और ग्रामीण विकास के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि, ग्रामीण विकास और गरीबों के कल्याण के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम करेंगी। इससे बिहार के विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि का नया दौर शुरू होगा।

कुल मिलाकर, इस उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय बिहार के कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्र के लिए दूरगामी महत्व रखते हैं। मनरेगा भुगतान, आवास निर्माण, महिला सशक्तिकरण, कृषि नवाचार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच जैसे कदम आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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