
भागलपुर: किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड स्थित कृषि भवन सभागार में “खरीफ महोत्सव सह खेती बचाओ अभियान” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर किसानों को खरीफ मौसम की खेती, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग तथा जैविक खेती के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन प्रखंड कृषि कार्यालय की ओर से किया गया। इसमें कृषि पदाधिकारी सत्यम राज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भागलपुर जिले के कृषि वैज्ञानिक शिव शंकर आचार्य, कृषि विशेषज्ञ डॉ. सरोज यादव, प्रखंड सलाहकार समिति के अध्यक्ष अनुरंजन सिंह, प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी मनोज कुमार तथा भाजपा नेता हर्षनाथ मिश्र उपस्थित रहे।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्ज्वलन कर की गई। मुख्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया और किसानों के उज्ज्वल भविष्य तथा कृषि क्षेत्र की समृद्धि की कामना की।
इसके बाद अतिथियों का स्वागत पौधा एवं पुष्प भेंट कर किया गया। आयोजकों ने कहा कि पौधा भेंट करना पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रतीक है और किसानों के जीवन से प्रकृति का गहरा संबंध है।
कार्यक्रम का संचालन कृषि समन्वयक अनुप कुमार ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य और कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी उपस्थित किसानों को दी।
खरीफ मौसम की खेती पर विशेष चर्चा
कार्यक्रम में खरीफ फसलों की खेती को लेकर विशेष सत्र आयोजित किया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान, मक्का, दलहन, तिलहन तथा अन्य खरीफ फसलों की उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत को भी कम किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेती की शुरुआत से पहले मिट्टी की जांच अवश्य कराएं ताकि फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जा सके।
जैविक खेती पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक शिव शंकर आचार्य और कृषि पदाधिकारी सत्यम राज ने किसानों को जैविक खेती के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इससे उत्पादन क्षमता पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि वे रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग करें और अधिक से अधिक जैविक विकल्पों को अपनाएं। गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक कीटनाशक और प्राकृतिक खेती की तकनीकों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कृषि पदाधिकारी सत्यम राज ने कहा कि जैविक खेती न केवल पर्यावरण के लिए लाभदायक है बल्कि किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली उपज और अधिक बाजार मूल्य भी दिला सकती है।
मिट्टी की सेहत बचाने की अपील
“खेती बचाओ अभियान” के तहत किसानों को मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य बनाए रखने के उपाय भी बताए गए।
विशेषज्ञों ने कहा कि भूमि की उत्पादकता बनाए रखने के लिए फसल चक्र अपनाना जरूरी है। एक ही फसल को बार-बार लगाने से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।
किसानों को हरी खाद, जैव उर्वरक और जैविक अपशिष्टों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही पानी के संतुलित उपयोग और जल संरक्षण के महत्व पर भी चर्चा की गई।
सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान किसानों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें बीज वितरण, कृषि यंत्रीकरण, फसल बीमा, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सिंचाई योजनाएं और कृषि ऋण जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
किसानों को बताया गया कि वे संबंधित विभागों से संपर्क कर इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
खरीफ महोत्सव बना संवाद का मंच
कार्यक्रम केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच संवाद का एक प्रभावी मंच भी बना।
कई किसानों ने अपनी समस्याएं और अनुभव साझा किए। उन्होंने फसल रोग, सिंचाई, बाजार व्यवस्था और कृषि लागत से जुड़े सवाल पूछे।
विशेषज्ञों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए व्यावहारिक सुझाव दिए और उन्हें वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित किया।
कृषि में तकनीक के उपयोग पर चर्चा
कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि आज के दौर में तकनीक आधारित खेती ही किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है। मोबाइल ऐप, मौसम पूर्वानुमान, ड्रिप सिंचाई, कृषि मशीनरी और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किसानों को अधिक लाभ पहुंचा सकता है।
किसानों को यह भी बताया गया कि कृषि विभाग समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है, जिनमें भाग लेकर वे नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
किसानों ने जताई संतुष्टि
कार्यक्रम में शामिल किसानों ने इसे उपयोगी और जानकारीपूर्ण बताया। कई किसानों ने कहा कि उन्हें खेती के नए तरीकों और सरकारी योजनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
किसानों का मानना था कि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों तक वैज्ञानिक कृषि की जानकारी पहुंच सके।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में भाजपा जिला मंत्री कन्हैया झा, इंग्लिश चिचरौन के पूर्व मुखिया ओमदत्त चौधरी, भाजपा नेता मुक्ति कुमार, शुभम कुमार, राजद नेता शिवम कुमार, पंचायत समिति सदस्य सुधीर कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके अलावा किसान सलाहकार, कृषि समन्वयक, कृषि विभाग के कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में किसान कार्यक्रम में शामिल हुए।
कृषि जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन किसानों को नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खरीफ महोत्सव सह खेती बचाओ अभियान का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देना भी है।
सुल्तानगंज में आयोजित यह कार्यक्रम किसानों के लिए ज्ञान, संवाद और जागरूकता का प्रभावी मंच साबित हुआ। कृषि विभाग को उम्मीद है कि कार्यक्रम में दी गई जानकारी का लाभ किसानों को आने वाले खरीफ सीजन में मिलेगा और वे अधिक वैज्ञानिक तथा पर्यावरण अनुकूल खेती की ओर कदम बढ़ाएंगे।


