भोजपुर में 32 एकड़ में बनेगा इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क, मत्स्य उत्पादन के साथ पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

पटना/भोजपुर, 15 जून 2026। बिहार सरकार ने राज्य में मत्स्य पालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। भोजपुर जिले के उदवंतनगर प्रखंड स्थित नवादाबेन पंचायत के बाणासुर मत्स्य बीज क्षेत्र में 32 एकड़ भूमि पर इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को रिमोट माध्यम से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया। लगभग 31.21 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पार्क बिहार में आधुनिक और समेकित मत्स्य विकास का मॉडल केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

इस परियोजना का उद्देश्य केवल मत्स्य उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि इसे पर्यटन, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन से भी जोड़ना है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को परियोजना के लेआउट प्लान और विकसित होने वाली विभिन्न संरचनाओं की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों और मत्स्य पालकों को सहायता सामग्री भी वितरित की।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा एक्वा पार्क

इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क में मत्स्य पालन और उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना के तहत कार्प हैचरी, स्ट्राइप्ड कैटफिश हैचरी, ब्रूडर इन्क्यूबेशन यूनिट, ओवरहेड टैंक, कंक्रीट रियरिंग टैंक, ईटीपी पाइपलाइन, विभिन्न प्रकार के तालाब, बायोफ्लॉक इकाइयां, आरएएस प्रणाली, फीड मिल एवं मशीनरी, छात्रावास और अतिथि गृह, प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण एवं प्रयोगशाला परिसर, जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला, रोग निदान प्रयोगशाला, क्वारंटीन टैंक और वेट लैब जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुविधाओं के विकसित होने से बिहार में आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का प्रदर्शन संभव होगा और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे राज्य के मत्स्य क्षेत्र को नई तकनीकी मजबूती मिलेगी।

मत्स्य पालन के साथ पर्यटन का भी होगा विकास

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बाणासुर मत्स्य बीज क्षेत्र की 32 एकड़ भूमि पर केवल मत्स्य पालन ही नहीं, बल्कि इको-टूरिज्म और पर्यटन गतिविधियों का भी विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह स्थान भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ओर रेलवे ट्रैक और दूसरी ओर फोरलेन सड़क मौजूद है, जिससे यहां पहुंचना आसान होगा।

सरकार की योजना है कि यह परियोजना भविष्य में पर्यटन आकर्षण का केंद्र बने और बड़ी संख्या में लोग यहां आकर आधुनिक मत्स्य पालन मॉडल को देखें। इससे स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन और अन्य व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा।

बिहार की समृद्धि में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और बिहार में भी पिछले वर्षों के दौरान मछली उत्पादन में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे का विकास लगातार किया जा रहा है। इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बल

सरकार का मानना है कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, पर्यटन और प्रशिक्षण से जुड़े अनेक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलने से पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है।

इसके अलावा, पार्क में स्थापित होने वाली प्रशिक्षण सुविधाओं से किसानों और मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिलेगी। इससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी और आय में वृद्धि होगी। परियोजना पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी क्योंकि मछली प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

शिक्षा और विकास को लेकर भी मुख्यमंत्री ने रखे विचार

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार में शिक्षा और आधारभूत संरचना के विकास को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के विस्तार के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार को फिर से शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। साथ ही विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की दिशा में भी पहल की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास की गति को और तेज करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा लोगों की समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सहयोग शिविरों और जनसुनवाई कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन को जवाबदेह बनाया गया है ताकि आम लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।

बिहार में मत्स्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बनेगी परियोजना

विशेषज्ञों का मानना है कि भोजपुर में बनने वाला इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क बिहार के मत्स्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह परियोजना केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि अनुसंधान, प्रशिक्षण, पर्यटन और उद्यमिता को भी बढ़ावा देगी। इससे राज्य के मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीक अपनाने में मदद मिलेगी और वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनेंगे।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह केंद्र मत्स्य पालन के क्षेत्र में नवाचार, कौशल विकास और उत्पादन वृद्धि का प्रमुख केंद्र बनेगा। साथ ही यह ग्रामीण विकास, पोषण सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। भोजपुर में शुरू हुई यह पहल आने वाले वर्षों में बिहार के मत्स्य उद्योग को नई पहचान देने की क्षमता रखती है।

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