
भागलपुर। जिले के तिनटंगा करारी पंचायत के लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से राजस्व कार्यों के निष्पादन को लेकर उत्पन्न हो रही प्रशासनिक और भौगोलिक समस्याओं के समाधान की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। तिनटंगा करारी पंचायत के राजस्व अभिलेखों को गोपालपुर अंचल में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा जाएगा। इस कदम से पंचायत के हजारों लोगों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि तिनटंगा करारी राजस्व कचहरी वर्तमान में संचालित है और वहां राजस्व संबंधी गतिविधियां नियमित रूप से जारी हैं। हालांकि पंचायत के राजस्व अभिलेखों की स्थिति और ऑनलाइन रिकॉर्ड के कारण ग्रामीणों को कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।
भौगोलिक स्थिति बनी परेशानी की बड़ी वजह
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मौजा तिनटंगा, थाना संख्या 47 के अंतर्गत तिनटंगा दियारा उत्तर, तिनटंगा दियारा दक्षिण और तिनटंगा करारी पंचायत शामिल हैं। इनमें तिनटंगा दियारा उत्तर और तिनटंगा दियारा दक्षिण भौगोलिक रूप से रंगरा चौक अंचल के अंतर्गत आते हैं, जबकि तिनटंगा करारी पंचायत की स्थिति गोपालपुर अंचल क्षेत्र में है।
यही स्थिति लंबे समय से ग्रामीणों के लिए भ्रम और असुविधा का कारण बनी हुई है। प्रशासनिक सीमाओं और राजस्व अभिलेखों की व्यवस्था में अंतर होने के कारण लोगों को अपने विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग अंचलों का सहारा लेना पड़ता है। इससे समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की अतिरिक्त खपत होती है।
संयुक्त अभिलेखों के कारण बढ़ी समस्या
जानकारी के अनुसार कई वर्षों से तिनटंगा दियारा उत्तर, तिनटंगा दियारा दक्षिण और तिनटंगा करारी पंचायत के राजस्व अभिलेख संयुक्त रूप से तिनटंगा करारी राजस्व कचहरी में संधारित होते रहे हैं। उस समय यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर सुविधाजनक मानी जाती थी, लेकिन डिजिटल युग में ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार होने के बाद यही व्यवस्था जटिलताओं का कारण बन गई।
जब राज्य सरकार द्वारा भूमि अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड को ऑनलाइन अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की गई, तब संयुक्त रिकॉर्ड होने के कारण सभी अभिलेख रंगरा चौक अंचल के अंतर्गत अपलोड कर दिए गए। परिणामस्वरूप तिनटंगा करारी पंचायत के लोगों के भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन कार्य रंगरा चौक अंचल से जुड़ गए।
म्यूटेशन और भू-मापी के लिए जाना पड़ता है दूर
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण उन्हें म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), परिमार्जन, ई-मापी और अन्य भूमि संबंधी कार्यों के लिए रंगरा चौक अंचल जाना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर जाति, आय, निवास प्रमाण-पत्र और आरटीपीएस से जुड़े अधिकांश कार्य गोपालपुर अंचल के माध्यम से किए जाते हैं।
इस दोहरी व्यवस्था के कारण लोगों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार उन्हें यह समझने में भी कठिनाई होती है कि कौन-सा कार्य किस अंचल में होगा। इससे आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
दूरी का अंतर भी बना बड़ी चुनौती
ग्रामीणों की प्रमुख शिकायत दूरी को लेकर है। स्थानीय लोगों के अनुसार गोपालपुर अंचल कार्यालय तिनटंगा करारी पंचायत से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि रंगरा चौक अंचल कार्यालय लगभग 14 किलोमीटर दूर है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजस्व संबंधी कार्य भी गोपालपुर अंचल से होने लगें तो लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा। विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाएं, किसान और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को काफी राहत मिलेगी।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार एक छोटे से राजस्व कार्य के लिए भी पूरा दिन खर्च हो जाता है। लंबी दूरी तय करने के कारण मजदूरी करने वाले लोगों को आय का नुकसान भी उठाना पड़ता है। यही कारण है कि वर्षों से पंचायत को गोपालपुर अंचल से जोड़ने की मांग लगातार उठती रही है।
जनप्रतिनिधियों ने भी उठाई मांग
तिनटंगा करारी पंचायत के लोगों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी समय-समय पर इस मुद्दे को प्रशासन के समक्ष उठाया है। उनका तर्क है कि भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से पंचायत का गोपालपुर अंचल से जुड़ना अधिक व्यावहारिक और जनहित में होगा।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में ग्रामीणों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है। इसलिए राजस्व अभिलेखों का पुनर्गठन कर पंचायत को गोपालपुर अंचल के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
जिला प्रशासन ने दिखाई गंभीरता
ग्रामीणों की मांग और व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा स्थिति का अध्ययन किया गया है और पाया गया कि पंचायत के लोगों की समस्याएं वास्तविक हैं।
इसी आधार पर अब तिनटंगा करारी पंचायत के राजस्व अभिलेखों को गोपालपुर अंचल में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा जाएगा, जहां से अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्रस्ताव मंजूर होने पर क्या होगा लाभ?
यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो तिनटंगा करारी पंचायत के लोगों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं।
सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि भूमि संबंधी अधिकांश कार्य गोपालपुर अंचल से ही किए जा सकेंगे। इससे लोगों को 14 किलोमीटर दूर रंगरा चौक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
इसके अलावा प्रशासनिक प्रक्रिया भी सरल होगी। वर्तमान में जहां अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग अंचलों से संपर्क करना पड़ता है, वहीं प्रस्ताव लागू होने के बाद अधिकांश सेवाएं एक ही अंचल के माध्यम से उपलब्ध हो सकेंगी।
डिजिटल प्रशासन को भी मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व अभिलेखों के पुनर्संयोजन से डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा। एक ही पंचायत से जुड़े लोगों के रिकॉर्ड और सेवाएं एक ही प्रशासनिक इकाई के अधीन होने से कार्य निष्पादन में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी।
भूमि विवादों के निपटारे, रिकॉर्ड सुधार, दाखिल-खारिज और अन्य प्रक्रियाओं में भी आसानी होगी। इससे सरकारी सेवाओं की पहुंच आम लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
ग्रामीणों को फैसले का इंतजार
फिलहाल तिनटंगा करारी पंचायत के लोगों की निगाहें राज्य सरकार के निर्णय पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो यह उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन द्वारा भेजे जाने वाले प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार किया जाएगा और वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा। प्रशासनिक स्तर पर शुरू हुई यह पहल अब हजारों ग्रामीणों की उम्मीदों का केंद्र बन गई है, जो लंबे समय से सुविधाजनक और सरल राजस्व व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।


