हीरा है या नहीं…? कंगन विवाद पर अब EOU से लेकर ED तक शिकायत

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन समारोह में भोजपुरी गायक राम शरण यादव उर्फ छोटू छलिया को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा कथित रूप से कंगन देने का मामला अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने इस प्रकरण की जांच की मांग करते हुए आर्थिक अपराध इकाई (EOU), आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और लोकायुक्त को शिकायत भेजी है।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था मामला

नीरज कुमार ने अपने आवेदन में कहा है कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया गया कि राबड़ी देवी ने जन्मदिन समारोह के दौरान छोटू छलिया को एक बहुमूल्य कंगन उपहार में दिया था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि गायक ने खुद सार्वजनिक रूप से कंगन मिलने की बात स्वीकार की है।


कंगन की कीमत और प्रकृति पर विवाद

इस मामले में तब विवाद बढ़ा जब कंगन को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे। कुछ रिपोर्टों में इसे हीरे का कंगन बताया गया, जबकि आरजेडी नेताओं ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह कोई कीमती हीरा जड़ित आभूषण नहीं था। इसी विरोधाभास को आधार बनाकर जांच की मांग की गई है।


आर्थिक जांच की मांग

शिकायत में कहा गया है कि यदि कंगन वास्तव में कीमती धातु या रत्न से बना है तो उसकी खरीद, भुगतान और आय के स्रोत की जांच जरूरी है। साथ ही यह भी देखा जाए कि क्या किसी प्रकार की कर चोरी या अघोषित संपत्ति का मामला बनता है।

नीरज कुमार ने ईओयू से निम्न बिंदुओं पर जांच की मांग की है:

  • कंगन की वास्तविक कीमत और प्रकृति
  • खरीद बिल और भुगतान स्रोत
  • आयकर अनुपालन
  • बेनामी लेन-देन की जांच
  • PMLA के तहत संभावित वित्तीय अनियमितताएं
  • अघोषित संपत्ति की संभावना

पुराने मामलों का भी जिक्र

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का नाम पहले भी जमीन के बदले नौकरी मामले में जांच के दायरे में रहा है। हालांकि वर्तमान शिकायत केवल कंगन प्रकरण से जुड़ी वित्तीय जांच तक सीमित है।


राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्ष इसे पारदर्शिता का मुद्दा बता रहा है, जबकि आरजेडी का कहना है कि इसे राजनीतिक कारणों से अनावश्यक रूप से बढ़ाया जा रहा है।


एजेंसियों की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या इस मामले में औपचारिक जांच शुरू होती है या नहीं।

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