
राजगीर: नालंदा जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले राजगीर मलमास मेले (पुरुषोत्तम मास) के तीसरे और अंतिम शाही स्नान पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंडों में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। अनुमान के मुताबिक केवल ब्रह्मकुंड में ही करीब 10 लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, जबकि सूर्यकुंड समेत अन्य सरोवरों में लगभग एक लाख लोगों ने स्नान किया।
8 घंटे तक लाइन में लगे रहे श्रद्धालु
अंतिम शाही स्नान को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्थिति यह रही कि लोगों को अपनी बारी का इंतजार करने के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ा। कई श्रद्धालु आठ घंटे तक लाइन में लगे रहे।
भीड़ इतनी अधिक थी कि कतार जिग-जैग बैरिकेडिंग पार करते हुए गुरुद्वारा, जरा देवी मंदिर से आगे बढ़कर जरासंध स्मारक तक पहुंच गई। यह कतार करीब तीन किलोमीटर लंबी बताई गई।
होटल और धर्मशालाएं हुईं फुल
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण राजगीर के होटल, धर्मशालाएं और यात्री शेड पूरी तरह भर गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी।
एक दिन पहले से ही कुंड क्षेत्र में लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था और सुबह होते-होते पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं से भर गया।
संतों ने परंपरा अनुसार किया शाही स्नान
सनातन परंपरा के अनुसार सबसे पहले उदासीन अखाड़ा (खाक चौक) के महंत संजीव दास और अयोध्या शरण जी महाराज ने शाही स्नान किया।
इसके बाद पुरानी लंका के अंतर्यामी शरण जी महाराज, धनिमा पहाड़ी के महंत विद्यासागर जी महाराज, बड़ी संगत के विवेक मुनि जी महाराज, रामायण आश्रम के बृज बिहारी जी महाराज तथा मसान घाट के प्रेमनाथ जी महाराज समेत दो दर्जन से अधिक मठों और अखाड़ों के संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र स्नान किया।
सप्तधारा कुंड में प्रवेश पर रोक
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को विशेष व्यवस्था करनी पड़ी। सप्तधारा कुंड में अत्यधिक भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं के सीधे प्रवेश पर रोक लगा दी गई।
इसके बदले पाइप के माध्यम से पानी का छिड़काव कर लोगों को स्नान कराया गया। हालांकि कुछ श्रद्धालुओं ने इस व्यवस्था पर नाराजगी भी जताई।
सरस्वती नदी में स्नान पर लगी पाबंदी
प्रशासन ने पवित्र सरस्वती नदी में भी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी। बताया गया कि जंगलों से आए बाढ़ के गंदे पानी के कारण सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया।
इसके चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरस्वती नदी में स्नान नहीं कर सके।
वैतरणी पार करने की परंपरा निभाई
मलमास मेले के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करने की परंपरा का भी पालन किया।
मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में इस धार्मिक अनुष्ठान को करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है।
4500 अतिरिक्त पुलिसकर्मी रहे तैनात
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा।
नालंदा के जिलाधिकारी कुंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक भरत सोनी, एसडीओ सूर्य प्रकाश गुप्ता समेत कई वरिष्ठ अधिकारी लगातार कुंड क्षेत्र में कैंप करते रहे।
पुलिस अधीक्षक भरत सोनी ने बताया कि अंतिम शाही स्नान को लेकर करीब 4500 अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
डीएम बोले- 10 लाख श्रद्धालुओं ने किया स्नान
नालंदा के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे। भीड़ नियंत्रण के लिए होल्डिंग एरिया, बफर जोन, जिगजैग बैरिकेडिंग और रेड कॉरिडोर की व्यवस्था की गई थी।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम और डॉक्टरों को भी विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया था ताकि किसी भी श्रद्धालु को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
जिलाधिकारी के अनुसार अंतिम शाही स्नान के दिन लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं ने राजगीर के पवित्र कुंडों में स्नान किया।
शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ महाआयोजन
भारी भीड़ के बावजूद प्रशासन की सतर्कता, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं और सुचारू प्रबंधन के कारण राजगीर मलमास मेले का तीसरा और अंतिम शाही स्नान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपराओं से जुड़ा यह महाआयोजन एक बार फिर राजगीर की धार्मिक महत्ता और सांस्कृतिक विरासत का भव्य उदाहरण बनकर सामने आया।


