विक्रमशिला सेतु की सेहत जांचने पहुंचे विशेषज्ञ, एक्सपेंशन ज्वाइंट से लेकर वेंट सिस्टम तक की हुई गहन पड़ताल

भागलपुर। बिहार के महत्वपूर्ण सड़क संपर्कों में शामिल विक्रमशिला सेतु की संरचनात्मक स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन शुरू कर दिया गया है। सेतु की मौजूदा स्थिति, मरम्मत की आवश्यकता और भविष्य में संभावित जोखिमों का आकलन करने के लिए पथ निर्माण विभाग ने विशेष तकनीकी जांच कराई है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गुरुवार को सेतु विशेषज्ञों की टीम ने विक्रमशिला पुल का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट, बियरिंग, ड्रेनेज सिस्टम, वेंट, रबर सील, ट्रैफिक लोड और अन्य तकनीकी हिस्सों की बारीकी से जांच की गई।

यह निरीक्षण ऐसे समय में किया गया है जब विक्रमशिला सेतु पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव और समानांतर पुल निर्माण परियोजना को लेकर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। पुल की संरचनात्मक मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस तकनीकी अध्ययन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख सह अपर आयुक्त एवं विशेष सचिव (मुख्यालय) अनिल कुमार सिंह के निर्देश पर विभाग के सेतु विशेषज्ञ चंद्र मोहन सिंह ने विक्रमशिला सेतु का निरीक्षण किया। चंद्र मोहन सिंह विभाग में सहायक सेतु अभियंता-4 के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें पुलों की तकनीकी स्थिति का आकलन करने का विशेष अनुभव प्राप्त है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पुल के विभिन्न हिस्सों की जांच करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट किया।

जांच के दौरान सबसे अधिक ध्यान एक्सपेंशन ज्वाइंट की स्थिति पर दिया गया। एक्सपेंशन ज्वाइंट किसी भी बड़े पुल का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो तापमान परिवर्तन और भार के प्रभाव से पुल में होने वाले फैलाव और संकुचन को संतुलित करने का कार्य करता है। विशेषज्ञ ने प्रत्येक एक्सपेंशन गैप की माप फीते से ली और उसकी स्थिति को तकनीकी डायरी में दर्ज किया। साथ ही ज्वाइंट में लगी रबर सील की स्थिति का भी निरीक्षण किया गया। कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त रबर सील की स्थिति को रिकॉर्ड किया गया ताकि भविष्य में आवश्यक मरम्मत की योजना तैयार की जा सके।

विशेषज्ञ टीम ने पुल के ड्रेनेज स्पाउट की भी जांच की। ड्रेनेज स्पाउट वर्षा के पानी को पुल की सतह से बाहर निकालने का कार्य करते हैं। यदि ये अवरुद्ध या क्षतिग्रस्त हो जाएं तो पानी जमा होने से पुल की संरचना को नुकसान पहुंच सकता है। निरीक्षण के दौरान इनकी सफाई और कार्यक्षमता का आकलन किया गया। जहां आवश्यक लगा वहां मरम्मत और रखरखाव संबंधी सुझाव भी दर्ज किए गए।

निरीक्षण के दौरान पुल के बियरिंग सिस्टम की स्थिति भी देखी गई। बियरिंग पुल की संरचना को संतुलित रखने और भार को समान रूप से वितरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी भी बड़े पुल की सुरक्षा के लिए बियरिंग की स्थिति का नियमित परीक्षण आवश्यक माना जाता है। विशेषज्ञों ने इनकी कार्यक्षमता और वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन किया।

विक्रमशिला सेतु के भीतर बने वेंट सिस्टम की भी विशेष रूप से जांच की गई। इसके लिए वेंट के ढक्कन खुलवाकर अंदर की स्थिति देखी गई। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार पुल के स्लैब के भीतर विशेष मार्ग बनाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य वाहनों की आवाजाही से उत्पन्न होने वाले दबाव, गैस और हवा के प्रवाह को नियंत्रित करना होता है। यदि ये वेंट सिस्टम प्रभावित हो जाएं तो पुल की संरचना पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। इसलिए इनकी नियमित जांच और रखरखाव आवश्यक माना जाता है।

निरीक्षण के दौरान पुल पर मौजूद ट्रैफिक लोड का भी आकलन किया गया। विक्रमशिला सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला एक प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन हजारों वाहनों का आवागमन होता है। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से पुल की संरचना पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन भी इस निरीक्षण का हिस्सा रहा। विशेषज्ञों ने विभिन्न तकनीकी मानकों के आधार पर यातायात दबाव का विश्लेषण किया।

पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार निरीक्षण रिपोर्ट तैयार होने के बाद पुल की मरम्मत, रखरखाव और आवश्यक सुधार कार्यों को लेकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। अभियंता प्रमुख ने सेतु विशेषज्ञ को निर्धारित प्रारूप में विस्तृत निरीक्षण प्रतिवेदन जमा करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि पुल के किन हिस्सों में तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है और किन कार्यों के लिए विशेष बजट की जरूरत होगी।

इस निरीक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि विशेषज्ञ टीम ट्रैफिक रेगुलेशन के लिए बनाए गए बैरियर और डायवर्जन की भी समीक्षा कर रही है। राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल द्वारा तैयार किए गए विभिन्न यातायात प्रबंधन उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया ताकि पुल पर यातायात संचालन को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

इधर विक्रमशिला सेतु के समानांतर बन रहे नए पुल के निर्माण कार्य को भी गति देने की तैयारी शुरू हो गई है। निर्माण एजेंसी एसपी सिंगला ने बरारी क्षेत्र की ओर से कार्यस्थल को घेरने के लिए चदरा लगाना शुरू कर दिया है। यहां पुल निर्माण से जुड़े तकनीकी उपकरणों और मशीनों की स्थापना की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए आवश्यक संसाधनों को पुनः सक्रिय किया जा रहा है।

गौरतलब है कि मई महीने के बाद समानांतर पुल निर्माण कार्य की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई थी। इसका प्रमुख कारण यह था कि निर्माण एजेंसी की नाव, डेक और अन्य संसाधनों का उपयोग जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए किया था। अब इन संसाधनों की वापसी के बाद निर्माण गतिविधियों को दोबारा गति देने की योजना बनाई गई है।

इसी बीच शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तिलकामांझी चौक स्थित ट्रैफिक चेक पोस्ट को भी स्थानांतरित कर दिया गया है। नया चेक पोस्ट विक्रमशिला सेतु टीओपी के निकट विकसित किया जा रहा है। नगर निगम के अनुसार इसका निर्माण अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे तिलकामांझी चौक पर लगने वाले जाम की समस्या में काफी कमी आएगी।

कुल मिलाकर विक्रमशिला सेतु की तकनीकी जांच, मरम्मत योजना और समानांतर पुल निर्माण परियोजना को लेकर प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद पुल की सुरक्षा और मजबूती को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। ऐसे में यह निरीक्षण न केवल वर्तमान पुल की स्थिति जानने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाले वर्षों में सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।

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