श्रावणी मेला 2026 की तैयारी तेज: भागलपुर शहर से होकर नहीं गुजरेंगे कांवरिया, मुख्यमंत्री ने दिए सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के निर्देश

भागलपुर। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 को लेकर बिहार सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए पैदल यात्रा करते हैं। इस विशाल धार्मिक आयोजन को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य सरकार ने इस बार कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि सुल्तानगंज से आने-जाने वाले कांवरिया अब भागलपुर शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से होकर नहीं गुजरेंगे। प्रशासन श्रद्धालुओं के लिए शहर से बाहर वैकल्पिक मार्ग विकसित करेगा ताकि यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम बनाई जा सके।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट रूप से जिम्मेदारियां सौंपी गईं और यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावणी मेला केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इसलिए व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि कांवरिया पथ के शुरुआती चार किलोमीटर क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जहां पीसीसी और ब्लैक टॉप सड़कें हैं, वहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बालू बिछाने का कार्य समय पर पूरा किया जाए। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु नंगे पैर यात्रा करते हैं। ऐसे में गर्म सड़क या कठोर सतह पर चलना उनके लिए कठिन होता है। बालू बिछाने से यात्रियों को राहत मिलेगी और पैदल यात्रा अपेक्षाकृत आसान हो जाएगी।

श्रावणी मेला के दौरान सुल्तानगंज और भागलपुर क्षेत्र में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। इस कारण शहर के भीतर अक्सर यातायात का दबाव बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए शहर के बाहर से वैकल्पिक मार्ग विकसित किया जाए। इससे एक ओर जहां कांवरियों को निर्बाध यात्रा का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर शहरवासियों को भी जाम और यातायात संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी।

जल संसाधन विभाग को भी इस बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि वैकल्पिक कांवरिया मार्गों की पहचान कर उन्हें उपयोग योग्य बनाया जाए। साथ ही नदी घाटों की गहराई, जल स्तर और सुरक्षा संबंधी मानकों का आकलन कर आवश्यक इंतजाम किए जाएं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए घाटों पर चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा संकेतक और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मेला क्षेत्र में साफ-सफाई को लेकर भी विशेष जोर दिया गया है। नगर विकास एवं आवास विभाग को कांवरिया पथ, विश्राम स्थलों और सार्वजनिक क्षेत्रों की स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा इस बार पंचायती राज विभाग को भी इस अभियान से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि विभिन्न विभागों के समन्वय से सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के कारण स्वच्छता एक बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में अस्थायी और स्थायी शौचालयों की संख्या बढ़ाने, नियमित सफाई कराने और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएं।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी व्यापक योजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुल्तानगंज से देवघर तक की यात्रा पूरी करने में आमतौर पर तीन से चार दिन का समय लगता है। इस दौरान कई श्रद्धालु थकान, गर्मी, मौसम परिवर्तन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करते हैं। इसलिए पूरे कांवरिया मार्ग पर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एम्बुलेंस, प्राथमिक उपचार केंद्र, चिकित्सकों की टीम और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मेला क्षेत्र में खाद्य निरीक्षकों की तैनाती अनिवार्य रूप से की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं को मिलने वाला भोजन और पेय पदार्थ निर्धारित मानकों के अनुरूप हों। मिलावटी या खराब खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को नियमित निरीक्षण और जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

कांवरिया मार्ग के जंगल और सुनसान इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ऐसे क्षेत्रों में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए जाएं, जिन पर जिम्मेदार अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से लिखे हों। इससे किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालु तुरंत प्रशासन से संपर्क कर सकेंगे। इसके अलावा पुलिस गश्त, सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

बैठक की कार्यवाही में दर्ज निर्देशों के आधार पर जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभिन्न विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस बार श्रावणी मेला को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है।

श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी प्रतीक है। हर वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं। ऐसे में सरकार और प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं, सुरक्षित वातावरण और सुचारु यात्रा का अनुभव मिल सके। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब सभी संबंधित विभाग तैयारी में जुट गए हैं और उम्मीद की जा रही है कि इस बार का श्रावणी मेला पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक साबित होगा।

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