खरीफ महाभियान 2026 की शुरुआत, भागलपुर में किसानों को आधुनिक खेती, जैविक कृषि और ड्रोन तकनीक का मिलेगा प्रशिक्षण

भागलपुर जिले में खरीफ मौसम की तैयारियों को लेकर कृषि विभाग ने व्यापक अभियान की शुरुआत कर दी है। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों और फसल विविधीकरण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 के तहत जिलास्तरीय कर्मशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों, नाबार्ड अधिकारियों तथा जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए कृषि पदाधिकारियों और किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन भागलपुर में किया गया, जहां कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बदलती जलवायु परिस्थितियों, घटती कृषि भूमि और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए किसानों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ना होगा।

खरीफ महाभियान के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचेगी जानकारी

कार्यक्रम में बताया गया कि 12 जून से 30 जून 2026 तक जिले के सभी प्रखंडों में शारदीय (खरीफ) महाभियान सह खेत बचाओ अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रखंड कृषि कार्यालयों में प्रशिक्षण-सह-उपादान वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही जिले की सभी पंचायतों में कृषि जनकल्याण चौपाल का आयोजन कर किसानों को खेती से जुड़ी नवीनतम जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देना नहीं है, बल्कि किसानों को खेती की बदलती जरूरतों और नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना भी है।

खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में खाद्य सुरक्षा पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। बढ़ती आबादी, सीमित कृषि भूमि और जलवायु परिवर्तन जैसी परिस्थितियों के बीच कृषि उत्पादन बढ़ाना समय की मांग है।

इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को ऐसी फसलों और तकनीकों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिनके माध्यम से कम भूमि में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। कृषि विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीकों का उपयोग ही भविष्य की कृषि व्यवस्था को मजबूत बना सकता है।

इन विषयों पर मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

खरीफ महाभियान के दौरान किसानों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें जलवायु अनुकूल खेती, मोटे अनाजों की खेती, शारदीय मक्का उत्पादन, बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती, दलहनी फसलें, प्याज उत्पादन, जीरो टिलेज तकनीक से धान की खेती, उद्यानिकी फसलें, कृषि यंत्रीकरण और ड्रोन तकनीक का उपयोग शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रही हैं। इससे उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव में समय और लागत दोनों की बचत होगी।

इसके अलावा फसल विविधीकरण पर भी विशेष बल दिया जाएगा ताकि किसान एक ही फसल पर निर्भर न रहें और अपनी आय के स्रोतों को बढ़ा सकें।

जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही जल और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

किसानों से अपील की गई कि वे अपनी कुल कृषि भूमि के कम से कम एक चौथाई हिस्से में जैविक खेती अपनाने का प्रयास करें। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य में जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है, इसलिए किसानों के लिए यह आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी हो सकता है।

उर्वरक के संतुलित उपयोग पर दिया गया जोर

कृषि अधिकारियों ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बिना मिट्टी की जांच कराए उर्वरकों का उपयोग करना लंबे समय में नुकसानदायक हो सकता है।

मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र को अपनाने पर बल दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि मिट्टी भी एक जीवंत संसाधन है और उसका स्वास्थ्य बनाए रखना उतना ही आवश्यक है जितना किसी जीवित प्राणी का।

किसानों को बाहर भेजकर सिखाई जाएगी नई तकनीक

कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग को यह भी निर्देश दिया गया कि जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों से चयनित किसानों को देश के अन्य राज्यों में भेजा जाए, जहां वे आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।

प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले किसानों को बाद में “मास्टर ट्रेनर” के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि वे अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी नई तकनीकों और नवाचारों की जानकारी दे सकें।

अधिकारियों का मानना है कि किसानों के बीच किसानों द्वारा दी गई जानकारी अधिक प्रभावी होती है और इससे तकनीकों का प्रसार तेजी से होता है।

किसान पंजीकरण और FR ID पर विशेष जोर

कार्यक्रम में किसान पंजीकरण और किसान पहचान पत्र से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में कृषि विभाग की अधिकांश योजनाओं का लाभ डिजिटल पहचान प्रणाली के माध्यम से दिया जाएगा।

इसके लिए किसानों का FR ID बनवाना आवश्यक है। बताया गया कि भागलपुर जिले में लाखों किसानों के नाम पर भूमि दर्ज है, लेकिन अभी तक अपेक्षाकृत कम किसानों का ही FR ID बन पाया है।

अधिकारियों ने सभी किसानों से जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की अपील की ताकि वे बीज, उर्वरक, फसल क्षति मुआवजा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें।

नाबार्ड और बैंकिंग संस्थानों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम में नाबार्ड के प्रतिनिधियों ने किसानों को किसान उत्पादक संगठन (FPO) के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एफपीओ के माध्यम से किसानों को सामूहिक रूप से बाजार, प्रशिक्षण और वित्तीय सुविधाओं का लाभ मिलता है।

इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड केवल खेती के लिए ही नहीं, बल्कि पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों के लिए भी उपयोगी है।

बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने किसानों को कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी। उनका कहना था कि केवल उत्पादन बढ़ाने से आय नहीं बढ़ती, बल्कि उत्पादों को बाजार के अनुसार तैयार करना भी जरूरी है।

कृषि वैज्ञानिकों ने साझा की तकनीकी जानकारी

कार्यक्रम में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों को फसल प्रबंधन, मिट्टी परीक्षण, फसल चक्र, जैविक उर्वरकों और कृषि नवाचारों से संबंधित विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में कृषि को टिकाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है। किसानों को मौसम आधारित खेती और संसाधनों के बेहतर उपयोग के बारे में भी जागरूक किया गया।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा अभियान

भागलपुर में शुरू हुआ शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक, जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस अभियान के तहत दी जाने वाली जानकारियां और तकनीकें प्रभावी रूप से खेतों तक पहुंचती हैं, तो आने वाले वर्षों में भागलपुर जिले में कृषि उत्पादन, किसानों की आय और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

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