पीरपैंती के कोल ब्लॉक से खुल सकती है विकास की नई राह, अब मिथेन गैस उत्पादन की संभावनाओं पर हो रहा मंथन

भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती क्षेत्र में स्थित विशाल कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से कोयला खनन परियोजना के रूप में देखे जा रहे इस क्षेत्र में अब एक नया विकल्प सामने आया है। विशेषज्ञों द्वारा यहां मौजूद संसाधनों का अध्ययन करने के बाद मिथेन गैस उत्पादन की संभावनाओं पर गंभीर विचार शुरू हो गया है। यदि यह योजना आकार लेती है तो न केवल बिहार को एक नया ऊर्जा स्रोत मिलेगा, बल्कि राज्य के राजस्व, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

जानकारों का मानना है कि पीरपैंती क्षेत्र में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए पारंपरिक कोयला खनन के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं पर ध्यान देना समय की मांग है। इसी कारण अब मिथेन गैस निष्कर्षण को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा और विशेषज्ञों से परामर्श का दौर शुरू हो गया है।

कोल ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया फिर से तेज

पीरपैंती कोल ब्लॉक बिहार की उन महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है जिनसे राज्य को भविष्य में बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस ब्लॉक के आवंटन और विकास को लेकर कई प्रयास हुए, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।

वर्तमान में केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा इस ब्लॉक के आवंटन के लिए दोबारा निविदा प्रक्रिया चलाई जा रही है। सरकार चाहती है कि योग्य कंपनियां इस परियोजना में निवेश करें और यहां उपलब्ध कोयला भंडार का व्यावसायिक उपयोग शुरू किया जा सके।

इसके बावजूद अब तक उद्योग जगत की ओर से बहुत उत्साहजनक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कई कंपनियां तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों के कारण इस परियोजना में निवेश करने से बच रही हैं।

कंपनियां क्यों कर रही हैं हिचकिचाहट?

विशेषज्ञों के अनुसार पीरपैंती क्षेत्र में कोयले का भंडार काफी बड़ा है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा जमीन की सतह से लगभग 100 मीटर या उससे अधिक गहराई में स्थित है। यही वजह है कि खनन कार्य को तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अलावा जिस क्षेत्र में कोयला मौजूद है, वहां बड़ी आबादी निवास करती है। ऐसे में बड़े पैमाने पर खनन कार्य शुरू करने के लिए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पर्यावरणीय मंजूरियों जैसी कई जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है।

खनन कंपनियों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में परियोजना की लागत बढ़ सकती है और कार्यान्वयन में अधिक समय लग सकता है। यही कारण है कि अब तक कई संभावित निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

मिथेन गैस बना नया विकल्प

इन्हीं चुनौतियों के बीच विशेषज्ञों ने एक वैकल्पिक समाधान सुझाया है। उनका मानना है कि कोल ब्लॉक क्षेत्र में मौजूद कोयले की परतों से कोल बेड मिथेन (सीबीएम) यानी मिथेन गैस निकाली जा सकती है।

मिथेन गैस एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक ईंधन मानी जाती है और दुनिया के कई देशों में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। यह गैस कोयले की परतों में प्राकृतिक रूप से मौजूद रहती है और विशेष तकनीक के माध्यम से इसे निकाला जा सकता है।

यदि पीरपैंती में मिथेन गैस उत्पादन संभव होता है तो इससे बिना बड़े पैमाने पर सतही खनन किए भी ऊर्जा संसाधनों का उपयोग किया जा सकेगा। इससे पर्यावरणीय प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम हो सकता है।

ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा नया आधार

विशेषज्ञों का कहना है कि मिथेन गैस का उपयोग कई प्रकार की औद्योगिक और ऊर्जा परियोजनाओं में किया जा सकता है। इसका सबसे बड़ा उपयोग बिजली उत्पादन में होता है।

थर्मल पावर प्लांटों में मिथेन गैस को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा उर्वरक उद्योग, रासायनिक उद्योग और विभिन्न विनिर्माण इकाइयों में भी इसका उपयोग किया जाता है।

ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए मिथेन गैस उत्पादन बिहार के लिए एक रणनीतिक उपलब्धि साबित हो सकता है। इससे राज्य को बाहरी ईंधन स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

सरकार के राजस्व में हो सकती है बड़ी बढ़ोतरी

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पीरपैंती में मिथेन गैस उत्पादन परियोजना शुरू होती है तो यह राज्य सरकार के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत बन सकती है।

खनिज संसाधनों से मिलने वाली रॉयल्टी, औद्योगिक निवेश, कर संग्रह और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि से सरकार की आय बढ़ सकती है। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

सरकार लंबे समय से बिहार में औद्योगिक निवेश बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रही है। ऐसे में यह परियोजना राज्य की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

रोजगार के नए अवसर

किसी भी बड़ी ऊर्जा या खनन परियोजना का सीधा प्रभाव स्थानीय रोजगार पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिथेन गैस परियोजना शुरू होती है तो हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

परियोजना निर्माण, तकनीकी संचालन, परिवहन, सुरक्षा, रखरखाव और अन्य सेवाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा छोटे और मध्यम व्यवसायों को भी लाभ मिल सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर विकास की गति तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों की राय पर होगा आगे निर्णय

खनन एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल इस विषय पर विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही आगे की दिशा तय की जाएगी।

विभाग का मानना है कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले सभी संभावनाओं का विस्तृत मूल्यांकन जरूरी है। इसलिए मिथेन गैस उत्पादन के सुझाव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि अध्ययन सकारात्मक रहता है तो भविष्य में इस दिशा में ठोस पहल की जा सकती है।

बिहार के ऊर्जा मानचित्र पर उभर सकता है नया केंद्र

पीरपैंती पहले से ही ऊर्जा क्षेत्र में अपनी संभावनाओं को लेकर चर्चा में रहा है। यहां पहले से कई ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर योजनाएं बनती रही हैं। अब मिथेन गैस उत्पादन का नया विचार इस क्षेत्र को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोयला और मिथेन दोनों संसाधनों का संतुलित उपयोग संभव हो जाता है तो पीरपैंती बिहार के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में शामिल हो सकता है।

फिलहाल कोल ब्लॉक आवंटन की प्रक्रिया जारी है और साथ ही मिथेन गैस उत्पादन की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। आने वाले समय में सरकार और विशेषज्ञों के निर्णय इस क्षेत्र के विकास की दिशा तय करेंगे। यदि सभी परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो पीरपैंती न केवल भागलपुर बल्कि पूरे बिहार के औद्योगिक और आर्थिक विकास का नया आधार बन सकता है।

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