राजद में फिर दिखी अंदरूनी कलह: रोहिणी आचार्या ने संजय यादव और कुमार सर्वजीत पर साधा निशाना

पटना। बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में एक बार फिर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठन और राजनीतिक रणनीति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बुधवार को नया विवाद खड़ा हो गया। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्या ने पार्टी सांसद संजय यादव की तारीफ करने वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए न केवल सांसद पर सवाल उठाए, बल्कि राष्ट्रीय महासचिव और विधायक कुमार सर्वजीत को भी निशाने पर लिया।

रोहिणी आचार्या की यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सामने आई, जहां उन्होंने संजय यादव की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन लोगों को पार्टी का कायाकल्प करने का श्रेय दिया जा रहा है, उन्हीं की वजह से पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। उनके बयान के बाद राजद के भीतर चल रहे मतभेद एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

किस बयान से शुरू हुआ विवाद?

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब राजद विधायक और राष्ट्रीय महासचिव कुमार सर्वजीत ने एक पॉडकास्ट कार्यक्रम में पार्टी संगठन और उसके आधुनिकीकरण को लेकर अपनी राय रखी। बातचीत के दौरान उन्होंने सांसद संजय यादव की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें राजद में तकनीकी बदलाव लाने वाला प्रमुख चेहरा बताया।

कुमार सर्वजीत ने कहा कि संजय यादव ने पार्टी को पारंपरिक राजनीतिक शैली से निकालकर आधुनिक राजनीतिक कार्यप्रणाली की ओर बढ़ाने का काम किया। उन्होंने दावा किया कि संगठन में अनुशासन स्थापित करने और तकनीक आधारित कार्य संस्कृति विकसित करने में भी संजय यादव की अहम भूमिका रही है।

इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि राजद को एक नई पहचान देने और उसे हाईटेक राजनीतिक दल के रूप में विकसित करने में संजय यादव का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई और फिर रोहिणी आचार्या की प्रतिक्रिया ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।

रोहिणी आचार्या ने किया तीखा पलटवार

कुमार सर्वजीत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को पार्टी में बदलाव का श्रेय दिया जा रहा है, वही राजद को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार है।

रोहिणी ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर कई समस्याओं और राजनीतिक चुनौतियों के पीछे संजय यादव की भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता वास्तव में इतना सक्षम और प्रभावशाली है तो उसे अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाकर अपनी क्षमता साबित करनी चाहिए।

उनके अनुसार किसी एक व्यक्ति को पार्टी की उपलब्धियों का पूरा श्रेय देना न केवल गलत है बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं के योगदान को भी नजरअंदाज करना है जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए संघर्ष किया है।

परिवार और संगठन को लेकर भी लगाए आरोप

रोहिणी आचार्या ने अपने बयान में केवल राजनीतिक मुद्दों तक ही बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी और परिवार के बीच मतभेद बढ़ने के पीछे भी कुछ नेताओं की भूमिका रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के भीतर ऐसे हालात पैदा किए गए जिससे पार्टी की एकजुटता प्रभावित हुई। उनके अनुसार इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ा और राजद कई मौकों पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका।

हालांकि इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बयान की व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

‘लठैत पार्टी’ वाले बयान पर भी जताई आपत्ति

विवाद का एक बड़ा कारण वह शब्दावली भी बनी जिसे लेकर रोहिणी आचार्या ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को ‘लठैत पार्टी’ जैसे शब्दों से संबोधित करना उचित नहीं है।

उनका कहना था कि ऐसी भाषा विरोधी दलों और सामंती मानसिकता वाले लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाती रही है। उन्होंने इसे राजद और उसके कार्यकर्ताओं का अपमान बताया।

रोहिणी ने कहा कि जिस पार्टी ने सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों के अधिकार और लोकतांत्रिक भागीदारी की राजनीति को मजबूत किया हो, उसके लिए ऐसी भाषा का उपयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे पार्टी के प्रति असम्मानजनक रवैया बताया।

राजद के भीतर बढ़ रही है बयानबाजी

पिछले कुछ समय से राजद के कई नेताओं के बयान चर्चा का विषय बनते रहे हैं। पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति को लेकर अलग-अलग राय सामने आती रही है।

हालांकि सार्वजनिक मंचों पर अधिकांश नेता पार्टी की एकजुटता की बात करते हैं, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले बयान यह संकेत देते हैं कि संगठन के भीतर विभिन्न मुद्दों पर मतभेद मौजूद हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े राजनीतिक दलों में विचारों का अंतर सामान्य बात है, लेकिन जब ऐसे मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं तो विपक्षी दलों को हमला करने का अवसर मिल जाता है।

बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

रोहिणी आचार्या के बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे राजद के भीतर चल रहे शक्ति संतुलन और प्रभाव की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी चुनावों से पहले पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकता संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की होगी। ऐसे समय में नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।

दूसरी ओर, कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद केवल व्यक्तियों के बीच मतभेद का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी के भविष्य, कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर चल रही व्यापक चर्चा का हिस्सा भी हो सकता है।

चुनावी तैयारी के बीच बढ़ी चुनौती

बिहार में आने वाले चुनावों को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। राजद भी संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान और राजनीतिक गठबंधनों पर काम कर रहा है। ऐसे समय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और प्रभावशाली चेहरों के बीच सार्वजनिक मतभेद संगठनात्मक चुनौतियां बढ़ा सकते हैं।

फिलहाल राजद नेतृत्व की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर बातचीत हो सकती है।

कुल मिलाकर, कुमार सर्वजीत के एक बयान से शुरू हुआ यह विवाद अब राजद की आंतरिक राजनीति की बड़ी बहस में बदलता दिखाई दे रहा है। रोहिणी आचार्या की तीखी प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद पर अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया और पार्टी नेतृत्व का रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाएगा।

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