
पटना। बिहार में सड़क और पुलों के बुनियादी ढांचे को राष्ट्रीय स्तर ही नहीं बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में पथ निर्माण विभाग के मंत्री कुमार शैलेन्द्र ने सोमवार को विभागीय सभागार में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक में राज्य में चल रही विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग योजनाओं, गंगा और कोसी नदी पर निर्माणाधीन पुलों, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, एलिवेटेड रोड परियोजनाओं तथा भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समीक्षा बैठक में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) तथा पथ निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में चल रही परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन करना, बाधाओं को दूर करना और निर्माण कार्यों को समयसीमा के भीतर पूरा करने की रणनीति तैयार करना था।
बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का लगातार विस्तार
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 6,819 किलोमीटर तक पहुंच चुकी है।
इनमें से 5,351 किलोमीटर मार्गों की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास है, जबकि शेष मार्गों का रखरखाव और प्रबंधन पथ निर्माण विभाग के अधीन किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य बिहार को देश के प्रमुख परिवहन और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में विकसित करना है, जिसके लिए सड़क संपर्क को और मजबूत बनाया जा रहा है।
41 बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से चल रहा काम
बैठक के दौरान एनएचएआई अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य में 1,634 किलोमीटर लंबाई की 41 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है।
इन परियोजनाओं में कई महत्वाकांक्षी सड़क और पुल निर्माण योजनाएं शामिल हैं, जिनके पूरा होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच यात्रा आसान होगी और माल परिवहन की लागत भी कम होगी।
अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और औद्योगिक विकास को गति देना भी है।
वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर पर विशेष जोर
समीक्षा बैठक में वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। यह छह लेन वाला कॉरिडोर बिहार के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद बिहार का संपर्क उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों से और मजबूत होगा। इससे व्यापार, उद्योग और निवेश को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आमस-दरभंगा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पर भी तेजी
राज्य की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल आमस-दरभंगा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की भी समीक्षा की गई। यह परियोजना उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है।
कॉरिडोर के निर्माण से यात्रा समय में कमी आएगी और विभिन्न जिलों के बीच आवागमन अधिक सुगम होगा।
सरकार को उम्मीद है कि यह परियोजना कृषि, व्यापार और पर्यटन क्षेत्रों को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगी।
दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर की प्रगति संतोषजनक
पटना जिले में निर्माणाधीन दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर की प्रगति को लेकर भी विस्तृत समीक्षा हुई।
लगभग 25 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में अब तक 58 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा किया जा चुका है।
यह परियोजना पटना महानगर क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और पश्चिमी क्षेत्रों से राजधानी तक तेज संपर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है।
भागलपुर क्षेत्र की परियोजनाओं में तेज प्रगति
मुंगेर से मिर्जाचौकी के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यों की स्थिति भी बैठक में प्रस्तुत की गई।
अधिकारियों ने बताया कि खैरा-भागलपुर बाईपास परियोजना में लगभग 93 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। वहीं रसलपुर-मिर्जाचौकी खंड में भी 93 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य संपन्न हो गया है।
इन परियोजनाओं को जुलाई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
भागलपुर और आसपास के जिलों के लोगों को इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यातायात और माल परिवहन में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
एनएच-31 कॉरिडोर के कई हिस्से हुए पूर्ण
छपरा-पटना-बख्तियारपुर-पूर्णिया कॉरिडोर के तहत कई महत्वपूर्ण खंडों का निर्माण पूरा हो चुका है।
पटना-बख्तियारपुर, बख्तियारपुर-मोकामा तथा औंटा-सिमरिया खंडों पर कार्य पूरा होने से उत्तर और पूर्वी बिहार के बीच संपर्क मजबूत हुआ है।
विशेष रूप से गंगा नदी पर बने छह लेन पुल को इस कॉरिडोर की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बेगूसराय एलिवेटेड कॉरिडोर अंतिम चरण में
बैठक में बताया गया कि बेगूसराय शहर में बन रहे 4.2 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का लगभग 96 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
अधिकारियों का लक्ष्य अगस्त 2026 तक इसे पूरी तरह चालू करना है।
इस परियोजना के पूरा होने से शहर में जाम की समस्या कम होगी और यातायात अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
नए महात्मा गांधी सेतु और विक्रमशिला पुल की समीक्षा
मंत्री कुमार शैलेन्द्र ने गंगा नदी पर निर्माणाधीन प्रमुख पुल परियोजनाओं की भी समीक्षा की।
महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बन रहे नए चार लेन पुल, दीघा-सोनपुर पुल, नए विक्रमशिला सेतु और कोसी फूलौत महासेतु की प्रगति पर विशेष चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि महात्मा गांधी सेतु परियोजना में लगभग 73 प्रतिशत, नए विक्रमशिला पुल में 50 प्रतिशत से अधिक तथा कोसी फूलौत महासेतु में 94 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
भूमि अधिग्रहण की बाधाओं को दूर करने का निर्देश
बैठक के दौरान कई परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए ताकि परियोजनाएं प्रभावित न हों।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास परियोजनाओं में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
समीक्षा बैठक में मंत्री ने निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सड़क और पुल निर्माण में गुणवत्ता मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और नियमित निरीक्षण के माध्यम से कार्यों की निगरानी की जाए।
मंत्री ने चेतावनी दी कि निर्धारित समयसीमा से पीछे चल रही परियोजनाओं के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
तकनीक आधारित निगरानी पर जोर
बैठक में निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा हुई।
मंत्री ने प्रमुख पुल परियोजनाओं पर सोलर आधारित कैमरे लगाने का सुझाव दिया ताकि मुख्यालय स्तर से निर्माण कार्यों की रियल टाइम निगरानी की जा सके।
इसके अलावा उन्होंने फ्लाई ऐश के विकल्प के रूप में नदियों से निकाले गए गाद के उपयोग की संभावना पर भी जोर दिया और कहा कि इस विषय को मुख्यमंत्री स्तर पर भी उठाया जाएगा।
विकास की नई तस्वीर गढ़ रहा बिहार
बैठक के अंत में मंत्री कुमार शैलेन्द्र ने कहा कि सड़क और पुल किसी भी राज्य के आर्थिक विकास की रीढ़ होते हैं। बिहार में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं राज्य की विकास यात्रा को नई गति देने वाली हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सड़क निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसा आधुनिक परिवहन नेटवर्क विकसित करना है जो उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दे सके।
राष्ट्रीय राजमार्गों, मेगा पुलों और एलिवेटेड कॉरिडोरों के निर्माण के साथ बिहार आने वाले वर्षों में देश के सबसे मजबूत सड़क नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


