मुंबई में गूंजी भारतीय संस्कृति की आवाज: स्वरांजलि कल्चरल ट्रस्ट के रजत जयंती समारोह में अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कला और सभ्यता का वैश्विक महत्व

मुंबई/भागलपुर। भारतीय संस्कृति को विश्व की सबसे प्राचीन, समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं में गिना जाता है। हजारों वर्षों की विरासत, विविधता, आध्यात्मिक मूल्यों, साहित्य, संगीत और लोककलाओं से समृद्ध भारतीय संस्कृति आज भी दुनिया भर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। इसी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को समर्पित स्वरांजलि कल्चरल ट्रस्ट ने मुंबई में अपने 25 वर्षों की सफल यात्रा पूरी होने पर भव्य रजत जयंती समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और कला प्रेमियों ने भारतीय संस्कृति की महत्ता पर विचार साझा किए।

मुंबई के मलाड में आयोजित इस समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य विषय “भारतीय कला एवं संस्कृति का वैश्विक महत्व” था, जिस पर उन्होंने विस्तार से अपने विचार रखते हुए भारतीय सभ्यता की विश्वव्यापी भूमिका को रेखांकित किया। उनके संबोधन ने न केवल उपस्थित लोगों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की याद दिलाई, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश भी दिया।

भारतीय संस्कृति विश्व को जोड़ने वाली धरोहर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल भारत की पहचान नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया को जोड़ने वाली एक अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं सदियों से मानवता, शांति, सहिष्णुता और आध्यात्मिकता का संदेश देती रही हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। योग, आयुर्वेद, भारतीय संगीत, नृत्य, दर्शन और आध्यात्मिक चिंतन ने विश्व स्तर पर भारत को एक विशिष्ट स्थान दिलाया है। यही कारण है कि आज भारतीय संस्कृति सीमाओं से परे जाकर वैश्विक समाज को प्रभावित कर रही है।

कला और संस्कृति हैं भारत की वास्तविक शक्ति

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी आर्थिक या राजनीतिक शक्ति से नहीं होती, बल्कि उसकी सांस्कृतिक ताकत भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। भारत की लोककलाएं, शास्त्रीय संगीत, लोकगीत, साहित्य, रंगमंच और पारंपरिक कलाएं हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता है। देश के अलग-अलग राज्यों की भाषाएं, परंपराएं, लोकनृत्य, लोकगीत और जीवनशैली भले ही अलग-अलग दिखाई दें, लेकिन सभी में भारतीयता की एक समान भावना दिखाई देती है। यही विविधता भारत को विश्व के अन्य देशों से अलग बनाती है।

विश्व में बढ़ रही भारतीय संस्कृति की स्वीकार्यता

अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि आज दुनिया के कई देशों में भारतीय त्योहारों, योग, ध्यान और भारतीय जीवन मूल्यों को अपनाया जा रहा है। भारतीय समुदाय जहां भी बसता है, वहां अपनी संस्कृति और परंपराओं के माध्यम से भारत की पहचान को मजबूत करता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल संदेश मानव कल्याण और विश्व बंधुत्व है। “वसुधैव कुटुंबकम्” की अवधारणा आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक है। ऐसे समय में जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, भारतीय संस्कृति लोगों को एकजुट करने और सकारात्मक दिशा दिखाने की क्षमता रखती है।

बिहार की सांस्कृतिक विरासत का भी हुआ उल्लेख

अपने संबोधन के दौरान अश्विनी कुमार चौबे ने बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा और बौद्धिक नेतृत्व प्रदान किया है।

उन्होंने अंग प्रदेश भागलपुर, मिथिला, दरभंगा, शाहाबाद-बक्सर और बिहार के अन्य क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराओं की चर्चा करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों की लोककलाएं, साहित्य, लोकगीत और सांस्कृतिक धरोहरें भारतीय संस्कृति को और समृद्ध बनाती हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत केवल राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की अमूल्य संपत्ति है, जिसे संरक्षित और प्रचारित करने की आवश्यकता है।

कलाकारों और साहित्यकारों की रही विशेष भागीदारी

रजत जयंती समारोह में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में कलाकार, साहित्यकार, विद्वान और सांस्कृतिक प्रेमी शामिल हुए। कार्यक्रम में कला, साहित्य और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

उपस्थित लोगों ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में भाग लेने वाले कई वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और तकनीकी विकास के बीच अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का संदेश

अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि आज के युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपनी परंपराओं, इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों को समझेंगे, तभी वे भविष्य का निर्माण आत्मविश्वास और गर्व के साथ कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम और ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति की गहराई और उसकी वैश्विक महत्ता का ज्ञान होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर भारतीय संस्कृति को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया जा सकता है।

संस्कृति संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं

कार्यक्रम के दौरान चौबे ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल सरकारों का दायित्व नहीं है। समाज के हर वर्ग को इस दिशा में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि परिवार, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक मंच मिलकर प्रयास करें तो भारतीय संस्कृति को और अधिक मजबूती मिल सकती है। सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती हैं और इनके संरक्षण के बिना किसी राष्ट्र की पहचान अधूरी रह जाती है।

स्वरांजलि कल्चरल ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने स्वरांजलि कल्चरल ट्रस्ट के 25 वर्षों के सांस्कृतिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने कला और संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने ट्रस्ट की पूरी टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे प्रयास भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहचान मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उनका कहना था कि सांस्कृतिक संस्थाएं समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं और देश की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारतीय संस्कृति के भविष्य को लेकर आशावादी संदेश

समारोह के अंत में अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि भारतीय संस्कृति का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारतीय कला, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक परंपराएं विश्व स्तर पर और अधिक सम्मान प्राप्त करेंगी।

मुंबई में आयोजित स्वरांजलि कल्चरल ट्रस्ट का रजत जयंती समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति की शक्ति, विविधता और वैश्विक महत्व को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी सबसे बड़ी ताकत है।

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