सरकारी आवास खाली करने के नोटिस के बीच RJD ने संभाला मोर्चा, 24 घंटे तैनात किए कार्यकर्ता

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास चर्चा के केंद्र में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी बंगले और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जारी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हालांकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को उम्मीद थी कि वर्ष 2018 की तरह इस बार भी सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।

सरकार की ओर से न तो राबड़ी देवी को पुराने सरकारी आवास में बने रहने के संकेत मिले हैं और न ही सुरक्षा व्यवस्था में की गई कटौती वापस लेने की संभावना दिखाई दे रही है। ऐसे में राजद ने अपने स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है और राबड़ी आवास को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया है।

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सिंगापुर से लौटने की तैयारी के बीच आवास पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियां तेज हो गई हैं। पार्टी ने कार्यकर्ताओं की दो पालियों में ड्यूटी लगाई है। सुबह से रात और रात से सुबह तक कार्यकर्ता आवास परिसर में तैनात रहकर निगरानी कर रहे हैं। वहीं पार्टी नेताओं का भी लगातार आवागमन बना हुआ है।

इसी बीच लालू परिवार के नए आवास में शिफ्ट होने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। रविवार को राबड़ी देवी ने कौटिल्य नगर स्थित निर्माणाधीन मकान का निरीक्षण किया। माना जा रहा है कि भविष्य में लालू परिवार वहीं स्थानांतरित हो सकता है।

दरअसल, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राबड़ी देवी को पिछले वर्ष नवंबर में 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था। इसके बावजूद वे अब तक 10 सर्कुलर रोड स्थित पुराने आवास में रह रही हैं। सरकार की ओर से तीसरी बार आवास खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद राबड़ी देवी ने कहा था कि यदि सरकार चाहे तो बलपूर्वक आवास खाली करा सकती है, लेकिन वे स्वेच्छा से नहीं जाएंगी।

आवास विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और राजद के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। राजद नेताओं ने चेतावनी दी थी कि यदि पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाया गया तो सभी जनप्रतिनिधि अपने सरकारी आवास लौटा देंगे। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकारी आवास किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होता और नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं।

विवाद के बीच राज्य सुरक्षा समिति द्वारा लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजप्रताप यादव की सुरक्षा श्रेणी में कटौती किए जाने का फैसला भी राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, सांसद मीसा भारती और राजश्री यादव को अब भी सरकारी सुरक्षा उपलब्ध है।

राजद नेताओं का आरोप है कि सुरक्षा में कटौती का फैसला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। पार्टी नेताओं को वर्ष 2018 की वह घटना भी याद आ रही है, जब लालू प्रसाद की सुरक्षा में तैनात जवानों को वापस बुला लिया गया था। उस समय राबड़ी देवी द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था बहाल कर दी गई थी।

फिलहाल राबड़ी आवास की सुरक्षा और राजनीतिक गतिविधियों की जिम्मेदारी पूर्व विधायक दीनानाथ यादव को सौंपी गई है। उनका दावा है कि पार्टी कार्यकर्ता चौबीसों घंटे पहरा दे रहे हैं और हर परिस्थिति में लालू परिवार के साथ खड़े रहेंगे।

रविवार को लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत की। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया और संयम के साथ राजनीतिक संघर्ष जारी रखने की अपील की।

अब बिहार की राजनीति में सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि लालू प्रसाद यादव के पटना लौटने के बाद यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या राजद इसे बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप देता है।

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