
बेतिया। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में जिला प्रशासन ने राजस्व विभाग के एक कर्मचारी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी लंबे समय से अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरत रहे थे, राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण मामलों को समय पर नहीं निपटा रहे थे और वरीय अधिकारियों के निर्देशों की लगातार अनदेखी कर रहे थे।
जिला पदाधिकारी तरणजोत सिंह द्वारा की गई इस कार्रवाई को प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं और समीक्षा बैठकों में भी उनकी कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे थे।
मझौलिया अंचल में पदस्थापित थे कर्मचारी
जानकारी के अनुसार निलंबित किए गए राजस्व कर्मचारी प्रदीप कुमार मिश्र पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया अंचल में पदस्थापित थे। उन पर आरोप है कि वे अपने कार्यक्षेत्र में राजस्व से जुड़े मामलों का समयबद्ध निष्पादन करने में विफल रहे।
राजस्व विभाग के विभिन्न मामलों की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि उनके जिम्मे सौंपे गए कई महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय से लंबित पड़े हुए थे। इससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था और सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने पर बढ़ी मुश्किल
मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब राजस्व मामलों की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में संबंधित कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। अधिकारियों के अनुसार उनकी अनुपस्थिति की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी और न ही अनुपस्थिति का कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत किया गया।
जिला प्रशासन के लिए यह मामला इसलिए भी गंभीर माना गया क्योंकि समीक्षा बैठकें विभागीय कार्यों की प्रगति और लंबित मामलों के निपटारे के लिए आयोजित की जाती हैं। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर कर्मचारी की गैरमौजूदगी को प्रशासन ने अनुशासनहीनता के रूप में देखा।
अपर समाहर्ता राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कर्मचारी द्वारा आवंटित हल्का क्षेत्र में राजस्व संबंधी कई मामलों का निष्पादन निर्धारित समय सीमा के भीतर नहीं किया गया था।
दाखिल-खारिज और परिमार्जन के मामले पड़े थे लंबित
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि दाखिल-खारिज, परिमार्जन और अन्य महत्वपूर्ण राजस्व मामलों का समय पर निपटारा नहीं किया गया था। बड़ी संख्या में आवेदन लंबित पड़े हुए थे, जिससे आम लोगों को लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे।
दाखिल-खारिज और भूमि अभिलेखों के संशोधन जैसे कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन प्रक्रियाओं में देरी होने पर जमीन से जुड़े विवाद बढ़ सकते हैं और नागरिकों को कानूनी तथा प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन ने पाया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने के बजाय अधिकांश मामलों को लंबित छोड़ दिया गया था, जो सरकारी सेवा मानकों के विपरीत माना गया।
बिना सूचना के अनुपस्थित रहने की शिकायत
मझौलिया अंचल कार्यालय द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित कर्मचारी अक्सर बिना सूचना के अनुपस्थित रहते थे। उनकी अनुपस्थिति के कारण कार्यालय के नियमित कार्य प्रभावित हो रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार कई महत्वपूर्ण योजनाओं और सेवाओं से जुड़े कार्यों में देरी हो रही थी। इसमें जमाबंदी संशोधन, आधार सीडिंग, सरकारी भूमि सत्यापन, लगान अद्यतीकरण और लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम के तहत आने वाले मामलों का निष्पादन भी शामिल था।
इन सेवाओं का सीधा संबंध आम नागरिकों से होता है। ऐसे में कर्मचारी की लापरवाही का प्रभाव सीधे जनता पर पड़ रहा था, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा था।
कई बार मांगा गया स्पष्टीकरण
जिला प्रशासन ने कार्रवाई से पहले संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया था। अधिकारियों के अनुसार उन्हें कई बार स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया।
इतना ही नहीं, वरीय अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का भी अनुपालन नहीं किया गया। बार-बार चेतावनी और निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्यशैली में कोई सुधार नहीं देखा गया।
प्रशासन का मानना है कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों से अनुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है। जब कोई कर्मचारी इन मानकों का पालन नहीं करता तो विभागीय कार्रवाई आवश्यक हो जाती है।
आचार नियमावली के उल्लंघन का आरोप
जिला पदाधिकारी ने मामले की समीक्षा के बाद पाया कि संबंधित कर्मचारी का आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। लगातार अनुपस्थिति, कार्यों में लापरवाही और अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना को गंभीर प्रशासनिक त्रुटि माना गया।
इसके आधार पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यों में लापरवाही किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती, विशेष रूप से तब जब उसका प्रभाव सीधे जनता को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा हो।
निलंबन अवधि में बेतिया रहेगा मुख्यालय
जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान संबंधित कर्मचारी का मुख्यालय जिला राजस्व शाखा, बेतिया निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें विभागीय नियमों के अनुरूप भत्ता और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
साथ ही मामले की विभागीय जांच भी आगे बढ़ाई जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर भविष्य में और भी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासन ने दिया स्पष्ट संदेश
इस कार्रवाई को जिला प्रशासन का एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि सरकारी कार्यों में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल के वर्षों में बिहार के कई जिलों में प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने के लिए ऐसी कार्रवाइयां लगातार की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिकारी और कर्मचारी समयबद्ध तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन करें तो आम जनता को सरकारी सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकता है। वहीं लापरवाही की स्थिति में विकास योजनाएं और जनसेवाएं प्रभावित होती हैं।
फिलहाल पश्चिम चंपारण में हुई इस कार्रवाई की चर्चा प्रशासनिक गलियारों में तेजी से हो रही है। माना जा रहा है कि इससे अन्य कर्मचारियों को भी अपने दायित्वों के प्रति अधिक सजग और जवाबदेह रहने का संदेश मिलेगा तथा राजस्व कार्यों के निष्पादन में गति आएगी।


